बर्थडे स्पेशल: हिंदुस्तानी सिनेमा में महज़ फिल्में नहीं, इतिहास बनाते हैं संजय लीला भंसाली
अपनी फिल्मों में भव्यता के लिए मशहूर संजय लीला भंसाली का जन्म 24 फरवरी 1963 को मुंबई के एक छोटे से चॉल में हुआ था. भंसाली के पिता डी.ओ भंसाली फिल्म प्रोड्यूसर थे. भंसाली बचपन से ही फिल्मों की दुनिया में नाम कमाना चाहते थे.

नई दिल्ली: बॉलीवुड में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले मशहूर फिल्मकार संजय लीला भंसाली आज अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं. अपनी फिल्मों में भव्यता के लिए मशहूर भंसाली का जन्म 24 फरवरी 1963 को मुंबई के एक छोटे से चॉल में हुआ था. भंसाली के पिता डी.ओ भंसाली फिल्म प्रोड्यूसर थे. भंसाली बचपन से ही फिल्मों की दुनिया में नाम कमाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने पुणे के मशहूर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया से फिल्म से फिल्ममेकिंग का कोर्स भी किया और फिल्मी दुनिया में कदम रखा.
पिछले साल से ही ‘पद्मावत’ को लेकर विवादों में रहे संजय लीला भंसाली सिर्फ बेहतरीन निर्देशक ही नहीं है बल्कि वो फिल्म प्रोड्यूसर, स्क्रीनराइटर और म्यूजिक डायरेक्टर भी हैं. भंसाली अपनी फिल्मों में बेहतरीन संगीत के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘गुजारिश’, ‘गोलियों की रास लीला राम-लीला’, ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ जैसी बेहतरीन और यादगार फिल्म का संगीत भी बनाया. कहा जाता है कि वो फिल्म से पहले फिल्म का संगीत तैयार करते हैं.
एक इंटरव्यू में भंसाली ने कहा था – “कुछ लोग मेरे काम से प्यार करते हैं.. कुछ लोग मेरे काम से नफरत करते हैं... लेकिन लोग मुझे इग्नोर नहीं कर सकते.”
मां के नाम को दुनिया में किया रोशन
कहते हैं मां के पैरों तले जन्नत होती है. मां की दिल से अगर कोई दुआ निकल जाए तो वो फलक को चीरकर रब के दरवाजे तक जरूर जाती है और उस दुआ को फिर रब भी नामंजूर नहीं करता. यही वजह है कि अपनी मां को जन्नत से भी ज्यादा प्यार करने वाले संजय लीला भंसाली ने जिस ओर भी कदम बढ़ाया उन्हें कामयाबी ही नसीब हुई. उनकी मां लीला भंसाली ने अपने बेटे के लिए जो भी दुआएं मांगी होंगी वो सभी जरूर कुबूल हुईं होंगी तभी तो उनका एकलौता बेटा आज बॉलीवुड के आसमां पर सबसे चमकीला सितारा बनकर अपनी रोशनी बिखेर रहा है.
भंसाली के पिता डी.ओ. भंसाली फिल्म प्रोड्यूसर थे, लेकिन फिल्मों के न चलने की वजह से उन्हें घाटे का सामना करना पड़ा. पिता के शराब की आदत की वजह से उनकी मां को घर संभालना पड़ा. उनकी मां लीला भंसाली उन दिनों कपड़े में फॉल लगाने का काम किया करती थीं और इसी से उन्होंने संजय और उनकी बहन बेला भंसाली (अब बेला सेगल) की परवरिश की.

संजय को अपनी मां से बहुत लगाव रहा, इसलिए उन्होंने पिता के नाम से पहले अपनी मां का नाम अपने नाम के साथ लगाया. दरअसल बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर संजय की पहली फिल्म ‘परिंदा’ थी. उस फिल्म में उन्होंने विधु विनोद चोपड़ा को असिस्ट किया था. जब संजय से पूछा गया कि फिल्म के क्रेडिट्स में क्या नाम लिखना है, तब उन्होंने कहा था संजय लीला भंसाली.
बॉलीवुड में ऐसे रखा था कदम
एफटीआईआई से फिल्ममेकिंग का कोर्स करने के बाद संजय लीला भंसाली ने निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के साथ काम करना शुरू किया. उन्होंने फिल्म ‘परिंदा’ (1989) और ‘1942: अ लव स्टोरी’ (1994) में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया. बाद में फिल्म ‘करीब’ का निर्देशन करने से मना कर देने पर संजय और विधु अलग हो गए.
अलग होने के दो सालों के बाद (1996) ही संजय ने डायरेक्टर के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ बनाई. इस फिल्म में नाना पाटेकर, सलमान खान और मनीषा कोइराला मुख्य किरदार में नजर आए थे. संजय की पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो कुछ खास कमाल न दिखा पाई, लेकिन समीक्षकों ने फिल्म की खूब तारीफ की. इसे फिल्मफेयर में सात नोमिनेशन हासिल हुए, जिसमें से पांच में इसने खिताब भी जीता. खास बात ये रही कि निर्देशक के तौर पर संजय की पहली फिल्म को फिल्मफेयर का क्रिटिक्स अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिल्म का खिताब मिला.

बाद में संजय लीला भंसाली ने कई फिल्में में बनाई, लेकिन लगभग सभी फिल्मों के केंद्र में एक चीज जो हमेशा देखने को मिली वो थी शिद्दत से भरी मोहब्बत. चाहे बात ‘हम दिल दे चुके सनम’ की हो या फिर ‘देवदास’, ‘गुजारिश’, ‘सांवरिया’, ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’, ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्मों की. इन सभी में मोहब्बत का बोलबाला रहा. लेकिन इन कहानियों से अलग एक ऐसी फिल्म भी संजय ने बनाई, जिसने खूब सारे तारीफों के गुलदस्ते अपने नाम किए.

फिल्म का नाम तो ‘ब्लैक’ था लेकिन संजय के फिल्मी करियर में ये सबसे ज्यादा रोशनी बिखेरने वाली फिल्मों में से एक रही. इसमें पहली दफा संजय ने अमिताभ बच्चन और रानी मुखर्जी को डायरेक्ट किया. अंधेरे से भरी इस फिल्म ने संजय लीला भंसाली के जादुई निर्देशन को दुनियाभर में पहुंचाया.

‘हम दिल दे चुके सनम’ गेम चेंजर
संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ उनके लिए गेम चेंजर साबित हुई. संजय की काबिलियत और फिल्म बनाने का उनका हुनर इसी फिल्म से बाहर निकलकर आया. फिल्म में उन्होंने सलमान खान, अजय देवगन और ऐश्वर्या राय जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया. उनका खास डायरेक्शन स्टाइल पहली बार ‘हम दिल दे चुके सनम’ में ही नजर आया. इस फिल्म की कामयाबी ने संजय को बॉलीवुड के बड़े निर्देशकों की लिस्ट में ला खड़ा किया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

संजय लीला भंसाली की पहचान ‘देवदास’
साल 2002 में शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की नोवेल पर संजय लीला भंसाली ने फिल्म ‘देवदास’ बनाई. फिल्म को बॉलीवुड के दिग्गज शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्या राय और जैकी श्रॉफ ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से यादगार बना दिया. ‘देवदास’ की भव्यता देखकर बॉलीवुड चौंक गया. पर्दे पर इतनी भव्य फिल्म को देखकर दर्शकों ने भी संजय लीला भंसाली को खूब सराहा. फिल्म ने दुनियाभर में करीब 100 करोड़ रुपए का कारोबार किया. फिल्म को मशहूर मैगजीन टाइम्स ने सदी की 100 सबसे बेहतरीन फिल्मों में जगह दी है. ‘देवदास’ में संजय लीला भंसाली की सिनेमाटोग्राफी जितनी आला दर्जे की थी, उतनी आला दर्जे की सिनेमाटोग्राफी उससे पहले शायद ही किसी बॉलीवुड फिल्म में देखने को मिली हो.

सिमी गरेवाल के शो में ‘देवदास’ का जिक्र करते हुए भंसाली ने कहा था कि फिल्म के एक सीन में शाहरुख अपने पिता के श्राद्ध में शराब के नशे में पहुंचते हैं. कुछ इसी तरह मेरे पिता भी मेरी दादी की मौत पर नशे की हालत में पहुंचे थे और लाश के पास गिर पड़े थे.
‘देवदास’ को फिल्मफेयर में 11 अवॉर्ड मिले और 5 नेशनल अवॉर्ड इसने अपनी झोली में डाले. संजय लीला भंसाली ‘देवदास’ के बाद बॉलीवुड के सबसे बड़े निर्देशक के तौर पर पुकारे जाने लगे. उनको मिली ये शोहरत उनकी मेहनत का ही नतीजा थी. इन सबके अलावा ‘देवदास’ साल 2003 में बाफ्टा अवॉर्ड्स में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज कैटोगरी में भी नोमिनेट हुई. किसी बॉलीवुड फिल्म के लिए ये उपलब्धि बहुत बड़ी थी.
इतिहास के साथ ‘विवाद’ भी बनाते रहे संजय लीला भंसाली
संजय लीला भंसाली की फिल्मों का विवादों से पुराना नाता रहा है. उनकी ज्यादातर फिल्में विवाद का शिकार हुई हैं. कुछ फिल्मों के नाम बदलने पड़े, तो कुछ को बड़े-बड़े आरोपों का सामना करना पड़ा है.
- ‘देवदास’ विवाद- संजय लीला भंसाली की जिंदगी की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक ‘देवदास’ के गाने ‘डोला रे डोला’ को लेकर खूब विवाद हुआ था. दरअसल फिल्म जिस उपन्यास पर आधारित थी उसमें चंद्रमुखी और पारो की मुलाकात हुई ही नहीं थी, लेकिन फिल्म के गाने में ऐश्वर्या और माधुरी ने एक साथ जमकर डांस किया था. इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया था.

- ‘गुजारिश’ विवाद- साल 2010 में रिलीज हुई ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय स्टारर फिल्म ‘गुजारिश’ पर सलमान खान ने एक कमेंट कर दिया, जिससे काफी विवाद हो गया था. इसके अलावा फिल्ममेकर्स पर कहानी चुराने का इल्जाम भी लगाया गया था.

- ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ विवाद- इस फिल्म के नाम को लेकर काफी हंगामा हुआ था. भंसाली की इस फिल्म का शुरुआत में नाम राम-लीला रखा गया था, जिसे अदालत के आदेश के बाद ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ कर दिया गया था. इस फिल्म से ही संजय ने रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की जोड़ी के साथ काम करना शुरू किया था.

- ‘बाजीराव मस्तानी’ विवाद- संजय लीला भंसाली की एक और कामयाब और नायाब फिल्म जिसे विवादों का सामना करना पड़ा वो थी ‘बाजीराव मस्तानी’. इसे भंसाली का ड्रीम प्रोजेक्ट भी कहा जाता है. ये फिल्म 17वीं शाताब्दी के शासक पेशवा बाजीराव द्वितीय पर बनाई गई थी. फिल्म के गाने ‘पिंगा’ में प्रियंका चोपड़ा (काशीबाई) और दीपिका पादुकोण (मस्तानी) को एक साथ कई बार दिखाया गया. गाने में उनके डांस को लेकर आपत्ति जताई गई. इसके अलावा पेशवा के वंशजों का कहना था कि काशीबाई और मस्तानी की मुलाकात जीवन में सिर्फ एक बार ही हुई थी, जबकि गाने में उन्हें एक ही फ्रेम में कई मरतबा दिखाया गया.

- ‘पद्मावत’ विवाद- संजय लीला भंसाली की सबसे ज्यादा विवादित फिल्म रही हालिया रिलीज ‘पद्मावत’. इस फिल्म को शूटिंग के दिनों से ही विरोध का सामना करना पड़ा. पहले राजस्थान में भंसाली के साथ मारपीट हुई और फिल्म के सेट पर तोड़ फोड़ किया गया. बाद में फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने पर हंगामा शुरू हो गया. विरोधियों ने भंसाली पर इतिहास से खिलवाड़ और रानी पद्मावती की गरिमा को बर्बाद करने का आरोप लगाया गया. इसका विरोध इस हद तक पहुंच गया कि फिल्म की अभिनेत्री दीपिका की गर्दन काटने की धमकी मिलने लगी. संजय लीला को जान से मारने की धमकी मिली. इन सभी मुश्किलों के बाद फिल्म को सुप्रीम कोर्ट का साथ मिला और ये बड़े पर्दे पर रिलीज हुई. फिल्म तो रिलीज हुई, लेकिन इसके मेकर्स को विरोधियों के दबाव की वजह से सेंसर बोर्ड के कहने पर फिल्म का नाम ‘पद्मावती’ से ‘पद्मावत’ करना पड़ा.

पर्दे पर मोहब्बत की दास्तान गढ़ने वाले भंसाली को नहीं मिली मोहब्बत
मोहब्बत की कई दास्तानों को अमर करने वाले संजय लीला भंसाली को जिंदगी में प्यार तो मिला पर उसका साथ चंद लम्हों का ही रहा. भंसाली ने एक इंटरव्यू के दौरान अपनी जिंदगी के इश्क के पन्ने का जिक्र करते हुए कहा था कि वो गुजरा हुआ वक्त था जो खत्म हो गया. उन्होंने कहा कि अब उसकी मेरी जिंदगी में कोई अहमियत नहीं है. भंसाली का कहना था कि अब वो खुद से ज्यादा प्यार करने लगे हैं. किसी एक इंसान को प्यार करना उनके लिए जरूरी नहीं. सब खत्म हो चुका है. गुज़रा हुआ कल हो चुका है.
Source: IOCL



























