अमिताभ बच्चन के घर 'प्रतीक्षा' में नहीं थीं कोई खिड़की, जया बच्चन ने किया था खुलासा
Amitabh Bachchan House Prateeksha: अमिताभ बच्चन पहले अपने घर प्रतीक्षा में रहते थे. मगर बाद में जलसा में शिफ्ट हो गए थे. प्रतीक्षा को लेकर जया बच्चन ने एक बार खुलासा किया था.

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे हैं. उनकी लाइफ के बारे में लोग अक्सर बात करते रहते हैं. अमिताभ बच्चन ने शादी के बाद जया बच्चन के साथ मुंबई में घर प्रतीक्षा खरीदा था. जिसके कुछ समय पहले वो अपनी बेटी श्वेता को गिफ्ट कर चुके हैं. इस घर से बच्चन परिवार की कई यादें जुड़ी हुई हैं. अमिताभ-जया की मैरिड लाइफ से लेकर दोनों बच्चों श्वेता-अभिषेक के बचपन बीतने तक सब यहीं बीता है.अब ये घर पूरी तरह से बदल चुका है लेकिन जब पहली बार अमिताभ-जया आए थे तो ये बिल्कुल ही अलग था.
जया बच्चन ने 2002 में जब इंडिया टुडे मैगजीन के लिए एक आर्टिकल लिखा था और 1970 के दशक में अपने पति अमिताभ बच्चन की सफलता के बारे में बताया था. उन्होंने उस एस्टेट की शुरुआती यादें शेयर कीं और बताया कि जब वे पहली बार वहां रहने आए थे, तो कैसा माहौल था. जया ने बताया था कि वो 1976 में प्रतीक्षा में रहने के लिए आए थे. उस समय घर में कोई पर्दे और खिड़की नहीं थे.
घर में नहीं थीं खिड़की
जया बच्चन ने लिखा- 1976 में हम प्रतीक्षा में चले गए. वो घर जो उन्होंने बनवाया था. हम तब भी वहां रहने चले गए जब वहां ठीक से पर्दे या खिड़कियां भी नहीं थीं. अब उनके पास अपना घर था, लेकिन वह शायद ही कभी वहां रहते थे. ये उनके जीवन का सबसे व्यस्त दौर था. अभिषेक के जन्म के बाद अमितजी और मैं साथ में समय बिताने की कोशिश करते थे. वो तब बड़ी-बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में कर रहे थे लेकिन घर पर वो नॉर्मल और बेफिक्र रहते थे. धीरे-धीरे उनका कॉन्फिडेंस बढ़ रहा था. इस बीच मैं फिल्म इंडस्ट्री से और दूर होती जा रही थी. वह अपना काम घर नहीं लाते थे और मुझे इस बात की कोई खबर नहीं थी कि वह कितनी फिल्में साइन कर रहे हैं और किसके साथ काम कर रहे हैं. मैंने उनसे फालतू की पूछताछ नहीं की.
कैसे घर का नाम रखा था प्रतीक्षा
अमिताभ बच्चन के इस घर का नाम उनके पिता हरिवंशराय बच्चन ने रखा था.अमिताभ बच्चन ने एक बार कौन बनेगा करोड़पति में इस घर के नाम के पीछे की कहानी बताई थी. उन्होंने खुलासा किया कि उनके पिता ने यह नाम उनकी कविता की एक पंक्ति 'स्वागत सबके लिए है पर नहीं है किसी के लिए प्रतीक्षा' के आधार पर रखा था. जिसका मतलब ये है कि हर किसी का स्वागत है, लेकिन किसी का इंतजार न करें.
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