विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: दीपिका से हनी सिंह तक, इन 5 सितारों ने खुलकर की मेंटल हेल्थ पर बात
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर दीपिका पादुकोण, आमिर खान, रणदीप हुड्डा, कुब्रा सैत और हनी सिंह के अनुभव मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने का संदेश देते हैं.

मानसिक स्वास्थ्य आज सार्वजनिक चर्चा का एक अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में बॉलीवुड के कई सितारे अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करके इससे जुड़े मिथकों और झिझक को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. डिप्रेशन और भावनात्मक चुनौतियों के बारे में बात करने से लेकर रिकवरी तक के अपने सफर को साझा करने तक, इन सितारों ने लोगों को यह समझाने में मदद की है कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही जरूरी है.
तो 10 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर आइए, बॉलीवुड की उन पांच हस्तियों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात की है और इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने में योगदान दिया है.
दीपिका पादुकोण: डिप्रेशन पर चुप्पी तोड़कर पेश की मिसाल
दीपिका पादुकोण भारत में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की प्रमुख आवाजों में से एक रही हैं. साल 2015 में उन्होंने क्लिनिकल डिप्रेशन से अपने अनुभव के बारे में खुलकर बात की थी.
उस समय मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करना आम नहीं था. ऐसे में दीपिका ने अपना अनुभव साझा कर लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है, फिर चाहे वह अपने करियर में कितना ही सफल क्यों न हो या उसकी सार्वजनिक छवि कैसी भी हो.
इसके बाद उन्होंने 'द लिव लव लाफ फाउंडेशन' की स्थापना की, जो मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने की दिशा में काम करता है.
दीपिका लगातार लोगों को अपनी परेशानियों को पहचानने, अपनी भावनाओं के बारे में बात करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करती रही हैं. अपने अनुभव को सार्वजनिक रूप से साझा करके उन्होंने उस मुद्दे को चर्चा में लाने में मदद की, जिससे आज भी कई लोग चुपचाप जूझते हैं.
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आमिर खान: भावनात्मक परेशानियों पर बात करने और मदद लेने की अहमियत
अभिनेता आमिर खान भी भावनात्मक चुनौतियों और विशेषज्ञों की मदद लेने के महत्व पर बात कर चुके हैं. हालिया इंटरव्यू में उन्होंने रीना दत्ता से अलग होने के बाद के मुश्किल दौर का जिक्र किया और बताया कि उस समय वह लंबे समय तक डिप्रेशन से गुजरे और शराब का सहारा लेने लगे थे.
आमिर अपनी बेटी इरा खान के साथ थेरेपी सेशन में शामिल होने के बारे में भी बात कर चुके हैं. इससे यह संदेश मिलता है कि भावनात्मक परेशानियों से निपटने के लिए प्रोफेशनल मदद लेना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है.
अपने अनुभव साझा करके उन्होंने इस सोच को चुनौती देने में मदद की है कि मनोवैज्ञानिक सहायता लेना शर्मिंदगी की बात है. उनकी बातें इस बात पर जोर देती हैं कि मुश्किल भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना जरूरी है.
रणदीप हुड्डा: जिंदगी की भावनात्मक चुनौतियों को समझने की जरूरत
अपनी दमदार अदाकारी और किरदारों के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले रणदीप हुड्डा ने फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के दौरान आने वाले दबाव और भावनात्मक चुनौतियों पर भी चर्चा की है. दूसरे कलाकारों की तरह, अभिनेताओं को भी व्यस्त शूटिंग शेड्यूल, लोगों की निगाहों में रहने और अपने पेशे से जुड़ी उम्मीदों का सामना करना पड़ता है.
मनोरंजन जगत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर होने वाली चर्चाओं ने इस बात को सामने लाया है कि भावनात्मक परेशानियों को समझना और खुद का ख्याल रखना कितना जरूरी है.
रणदीप का नाम इस चर्चा से जुड़ना इस व्यापक मुद्दे की ओर ध्यान दिलाता है कि शोहरत और पेशेवर सफलता किसी को भी निजी चुनौतियों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाती. ऐसे अनुभवों पर खुलकर बात करने से एक ऐसा माहौल बनाने में मदद मिल सकती है, जहां लोग बिना झिझक अपनी परेशानियां साझा कर सकें और जरूरत पड़ने पर मदद ले सकें.
कुब्रा सैत: ADHD को बताया अपनी सुपरपावर खुद को स्वीकार करने पर दिया जोर
अभिनेत्री कुब्रा सैत ने अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) के साथ अपने सफर के बारे में खुलकर बात करके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक अहम चर्चा को आगे बढ़ाया है. अप्रैल 2026 में सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि सालों तक थेरेपी लेने और खुद को समझने की कोशिश करने से उन्हें अपने दिमाग के काम करने के तरीके और अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली.
कुब्रा ने ADHD को अपनी कमजोरी के बजाय अपनी ‘सुपरपावर’ बताते हुए कहा कि वह भावनाओं को काफी गहराई से महसूस करती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि पहले जो चीजें उन्हें परेशान और असमंजस में डाल देती थीं, उनके पीछे के पैटर्न को समझना उनके लिए कितना जरूरी रहा. कुब्रा के मुताबिक, थेरेपी से उन्हें स्पष्टता हासिल करने, अपने ध्यान को बेहतर बनाने और अपनी अलग पहचान को अधिक आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करने में मदद मिली.
यो यो हनी सिंह: रिकवरी की ओर एक लंबा सफर
रैपर और गायक यो यो हनी सिंह बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़े अपने अनुभवों और उस मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात कर चुके हैं, जिसके चलते उन्हें कुछ समय के लिए लाइमलाइट से दूर होना पड़ा था. अपने जोशीले संगीत और हिट गानों के लिए मशहूर हनी सिंह को लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसका असर उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी पर भी पड़ा.
इंटरव्यू और सार्वजनिक बातचीत के दौरान हनी सिंह ने अपनी स्थिति के प्रभाव, लोगों की नजरों से दूर रहने के फैसले और रिकवरी में इलाज व दवाइयों की भूमिका के बारे में बताया है. उनके अनुभव इस बात को समझने में मदद करते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को बिना किसी पूर्वाग्रह के देखना और यह स्वीकार करना जरूरी है कि ठीक होने की प्रक्रिया में समय लग सकता है.
अपने सफर को साझा करके हनी सिंह ने इस गलत धारणा को चुनौती देने में भी मदद की है कि सफल और आत्मविश्वास से भरे दिखने वाले लोग गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना नहीं कर सकते. उनकी कहानी इस बात की याद दिलाती है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं और सही समय पर मदद लेना रिकवरी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.




















