महाराष्ट्र: BJP-शिवसेना में 50-50 फॉर्मूले पर तकरार बरकरार, राउत बोले- कोई हमें बच्चा पार्टी न समझे
शिवसेना के 50-50 फॉर्मूले के दावे पर बीजेपी से उसकी तकरार हो रही है. अब शिवसेना ने बीजेपी को खुली चुनौती देते हुए यहां तक कह दिया है कि अगर उनके पास 145 का आंकड़ा है तो वो सरकार बना लें.

मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा नतीजे आने के आठ दिन बाद भी साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी और शिवसेना सरकार नहीं बना पाई हैं. दोनों पार्टियों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर झगड़ा हो रहा है. कल बीजेपी ने देवेंद्र फड़णवीस को सीएम बनाने के लिए नेता चुन लिया. अब मुंबई में शिवसेना के विधायक अपना नेता चुनने के लिए बैठक कर रहे हैं. इस बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बीजेपी से चेतावनी के लहजे में कहा है कि शिवसेना को कई बच्चा पार्टी न समझे.
बीजेपी के पास 145 का आंकड़ा है तो वो सरकार बना लें- शिवसेना
शिवसेना के 50-50 फॉर्मूले के दावे पर बीजेपी से उसकी तकरार हो रही है. अब शिवसेना ने बीजेपी को खुली चुनौती देते हुए यहां तक कह दिया है कि अगर उनके पास 145 का आंकड़ा है तो वो सरकार बना लें. यही नहीं संजय राउत ने बीजेपी को उसकी हद बताते हुए ये भी कहा था, ‘’महाराष्ट्र की कुंडली तो हम ही बनाएंगे. कौन से तारे को जमीन पर उतारना है और किस तारे को चमक देना है, ये शिवसेना की तय करेगी.’’
सीएम बीजेपी का हो और पूरे 5 साल के लिए हो- आठवले
वहीं, खबर मिल रही है कि महाराष्ट्र के महायुति के चार घटकों की बैठक हुई है. आरपीआई के रामदास आठवले ने कहा है कि 50-50 का फार्मूला मंजूर नहीं है. सीएम बीजेपी का हो और पूरे 5 साल के लिए हो. रामदास आठवले के साथ राष्ट्रीय समाज पक्ष के महादेव जानकर, रयत क्रांति संघटन के सदाभाऊ खोत और शिवसंग्राम के विनायक मेटे बैठक में थे.
जो तय किया गया था उसे अमल में लाया जाए- शिवसेना
वहीं, शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए भी बीजेपी पर हमला बोला है और उसे उसका वादा याद दिलाया है. सामना के संपादकीय में शिवसेना ने कहा है, ‘’लोकसभा चुनावों के पहले ‘युति’ की बुझी हुई बाती जलाते समय जो तय किया गया था उसे अमल में लाया जाए. शिवसेना की सिर्फ यही मांग है. युति की बाती जलाते समय दीपक में विश्वास का तेल डाला गया, वो तेल नहीं तो क्या गंदा पानी था? बिल्कुल नहीं. सत्ता पद का समान वितरण, इस शब्द का मुख्यमंत्री ने पत्रकार परिषद में प्रयोग किया था और सहमति से ही प्रयोग किया था.’’
आगे लिखा है, ‘’अब अगर किसी राज्य के मुख्यमंत्री का पद ‘सत्ता पद’ के अंतर्गत नहीं आता, ऐसा कोई कह रहा हो तो राज्य शास्त्र का पाठ नए सिरे से लिखना होगा. समान वितरण में सबकुछ आ गया. साल 2015 में देश में मोदी के नेतृत्व में बड़ी जीत मिलते ही बीजेपी ने शिवसेना से ‘युति’ तोड़ दी और 2019 में ‘सफलता’ मिलते ही आवश्यकता पूरी होने पर वैद्य के मरने का दूसरा चरण शुरू हो गया है, लेकिन यहां ‘वैद्य’ नहीं मरेगा.’’
शिवसेना की ताकत 63 हुई
बता दें कि शिवसेना ने सात निर्दलीय के समर्थन का दावा करके भी बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. शिवसेना का दावा है कि साक्री के विधायक मंजुला गावित, मक्ताईनर के चंद्रकांत पाटिल, अचलपूर के बच्चू कडू, मेलघाट के राजकुमार पटेल, रामटेक के आशीष जयसवाल, भंडारा के विधायक नरेंद्र भोंडेकर और नेवासा के एमएलए शंकरराव गडाख उनके साथ हैं. इस तरह अपने 56 विधायक और सात निदर्लीय के समर्थन से शिवसेना की ताकत अब 63 हो गई है.
उधर, कांग्रेस और एनसीपी के खेमे में भी हलचल तेज है. दोनों दल इस फिराक में है कि अगर बीजेपी का खेल बिगड़ता है तो शिवसेना का साथ देकर फिर से सत्ता का स्वाद चखा जाएगा. आज एनएसपी के नेता 12.30 बजे राज्यपाल से भी मिलने वाले थे लेकिन ये मुलाकात अब रद्द हो गई है.
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