Karnataka Elections 2023: कर्नाटक चुनाव को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर कांग्रेस की बैठक, राहुल गांधी के साथ आगे की रणनीति पर मंथन
Karnataka Assembly Elections 2023: कर्नाटक में 10 मई को होने वाले मतदान के लिए राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं. कांग्रेस 166 उम्मीदवारों का एलान कर चुकी है.

Congress Meeting On Karnataka Elections 2023: कर्नाटक में विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. राजनीतिक पार्टियों की बैठकों का दौर शुरू हो गया है और इसी क्रम में कांग्रेस ने रविवार (09 अप्रैल) को अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास (10 राजाजी मार्ग) पर बैठक की है. इस बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा राहुल गांधी, मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला, केसी वेणुगोपाल और मोहन प्रकाश मौजूद रहे.
बैठक का समय शाम को 4 बजे रखा गया था. इसमें बची हुई सीटों पर उम्मीदवारों के नाम और राज्य में आगे की रणनीति पर मंथन किया गया. फिलहाल कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस 166 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का एलान कर चुकी है और बाकी बची हुई सीटों के लिए चर्चा की गई.
वहीं, कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 के लिए केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी सहित अन्य बीजेपी नेता पार्टी मुख्यालय पहुंचे हैं.
सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तनातनी
उधर, कोलार में होने वाली राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की रैली फिर टल गई है. इस बार राहुल की रैली 16 अप्रैल तक के लिए टल गई है. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रैली टलने की वजह कोलार विधानसभा सीट को लेकर फंसा हुआ पेंच है. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया अपनी परंपरागत वरुणा सीट के अलावा कोलार से भी चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार इसके पक्ष में नहीं हैं. जिसकी वजह से कोलार सीट का मामला पार्टी हाईकमान पर छोड़ दिया गया है. कोलार पर फैसले में हो रही देरी के कारण राहुल की कोलार रैली की तारीख तीसरी बार बढ़ी है.
कोलार में राहुल की रैली क्यों है अहम?
सिद्धारमैया की दावेदारी के अलावा कोलार में राहुल गांधी की रैली इसलिए अहम है, क्योंकि अप्रैल 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान कोलार में ही राहुल ने "मोदी सरनेम" वाला विवादित बयान दिया था. जिससे जुड़े मानहानि केस में उन्हें बीते महीने दो साल की सजा हुई और लोकसभा सदस्यता भी खत्म हो गई. जानकारी के मुताबिक रैली टलने की वजह से जनता पर प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकता है.
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Source: IOCL
















