(Source: ECI/ABP News)
हरियाणा चुनाव: जिंदल परिवार का गढ़ हुआ करता था हिसार, लेकिन अब कमजोर हो चुकी है पकड़
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019: 1991 में ओमप्रकाश जिंदल ने पहली बार हिसार से चुनाव लड़ा था.

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019: 1991 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार जिंदल परिवार का कोई सदस्य हिसार सीट से चुनावी मैदान में नहीं उतरा है. दो बार हिसार सीट से विधायक रही सावित्री जिंदल ने इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया. सावित्री जिंदल के स्थान पर कांग्रेस ने रामनिवास राड़ा को मैदान में उतारा है.
जिंदल परिवार का गढ़ रहा है हिसार
2014 के विधानसभा चुनाव से पहले तक हिसार विधानसभा सीट देश के सबसे अमीर घरानों में से एक जिंदल परिवार का गढ़ रही है. ओमप्रकाश जिंदल ने 1991 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर हिसार से चुनाव लड़ा था. ओमप्रकाश जिंदल अपने पहले चुनाव में जीत हासिल की. भजनलाल से मतभेद होने के चलते 1996 में जिंदल ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया. इसके बाद बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर जिंदल कुरुक्षेत्र से सांसद चुने गए.
2000 के विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश जिंदल फिर कांग्रेस में शामिल हो गए. जिंदल को कांग्रेस ने हिसार सीट से उम्मीदवार बनाया और वह जीत हासिल करने में कामयाब रहे. 2005 के विधानसभा चुनाव में भी जिंदल हिसार सीट से जीत हासिल करने में कामयाब हुए. 2005 में हुड्डा सरकार में मत्री बनने के एक महीने बाद ही एक विमान हादसे की वजह से ओमप्रकाश जिंदल का निधन हो गया.
जिंदल का निधन हो जाने के बाद कांग्रेस ने उनकी पत्नी सावित्री जिंदल को कांग्रेस ने हिसार सीट से उम्मीदवार बनाया. सावित्री जिंदल उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंची. 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सावित्री जिंदल एक बार फिर से विधानसभा पहुंचने में कामयाब रही. दूसरी बार विधायक बनने पर सावित्री जिंदल को हुड्डा सरकार में मंत्री पद भी मिला.
2014 के विधानसभा चुनाव में जिंदल परिवार की हिसार विधानसभा सीट पर स्थिति कमजोर हुई. 2014 में सावित्री जिंदल को बीजेपी उम्मीदवार कमल गुप्ता ने करीब 14 हजार वोट से मात दी. यह पहला मौका था जब जिंदल परिवार के किसी सदस्य को हिसार सीट से हार का सामना करना पड़ा.
2014 में कमजोर हुई पकड़
दरअसल 2014 लोकसभा चुनाव में ही जिंदल परिवार की हिसार सीट पर पकड़ कमजोर हो गई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा जनहित कांग्रेस के उम्मीदवार कुलदीप बिश्नोई हिसार विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार संपत्त सिंह पर 40 हजार वोट से बढ़त लेने में कामयाब रहे. संपत्त सिंह को सावित्री जिंदल का समर्थन हासिल था और दोनों उम्मीदवारों में इतना अंतर जिंदल परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था.

2014 की हार के बाद जिंदल परिवार के किसी सदस्य ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया है. 2004 में ओमप्रकाश जिंदल के बेटे नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र से लोकसभा सांसद चुने गए थे. 2009 में नवीन जिंदल दूसरी बार कुरुक्षेत्र सीट से सांसद चुने गए. लेकिन 2014 में नवीन जिंदल को बीजेपी उम्मीदवार राजकुमार सैनी ने मात दी. सावित्री जिंदल की तरह नवीन जिंदल ने भी 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा.
जिंदल ऐसे बने थे स्टील किंग
ओमप्रकाश जिंदल का जन्म 1930 में हिसार जिले के नलवा गांव में नेतराम के घर हुआ था. 22 साल की उम्र में ही ओमप्रकाश जिंदल ने बिजनेस करना शुरू कर दिया था. ओमप्रकाश जिंदल ने हिसार जिले में पहले बाल्टी बनाने की कंपनी खोली. इसके बाद 1964 में ओमप्रकाश जिंदल ने हिसार में एक पाईप यूनिट भी शुरू की. दो यूनिट खोलने के बाद जिंदल ने अपनी कंपनी को 'जिंदल इंडिया लिमिटेड' के नाम से रजिस्टर्ड करवा लिया था. इन कंपनियों की सफलता के बाद जिंदल ने दूसरे राज्यों में भी कारोबार शुरू किया.
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