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AICTE Report: इंजीनियरिंग करने वाले 17% ही नौकरी के लायक, खत्म हो रहा IT सेक्टर का क्रेज? 

AICTE Report: ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन ने 2025-26 शैक्षणिक स्तर में देशभर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों को कैटेगरी वाइज तरीके से बंद करने की मंजूरी दे दी है.

AICTE Report: एक समय था जब इंजीनियरिंग को देश के सबसे सुरक्षित और सबसे भरोसेमंद करियर ऑप्शन के रूप में देखा जाता था लाखों छात्र हर साल इंजीनियर बनने का सपना लेकर कॉलेज में एडमिशन लेते थे और अच्छी नौकरी की उम्मीद करते थे. लेकिन अब इंजीनियरिंग सेक्टर की तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है. देश भर में इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लगातार घट रहे हैं, बड़ी संख्या में सीटें खाली रह रही है और कई इंस्टीट्यूट को बंद करने की नौबत आ गई है. इस बीच एक रिपोर्ट ने इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगार को लेकर भी नई चिंता पैदा कर दी है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि इंजीनियरिंग करने वाले सिर्फ 17 प्रतिशत ही नौकरी के लायक कैसे हैं और आईटी सेक्टर का क्रेज कैसे खत्म हो रहा है.

58 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद, नए छात्रों का नहीं होगा एडमिशन 

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन ने 2025-26 शैक्षणिक स्तर में देशभर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों को कैटेगरी वाइज तरीके से बंद करने की मंजूरी दे दी है. आपको बता दें की एआईसीटीई ने जिन 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों को प्रोग्रेसिव क्लोजर की मंजूरी दी है, उनमें अब से प्रथम वर्ष के छात्रों का एडमिशन नहीं होगा. हालांकि इन कॉलेज में पहले से पढ़ रहे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, वह अपनी डिग्री इस इंस्टीट्यूट से पूरी कर सकेंगे. एआईसीटीई के अनुसार यह पूर्ण बंदी नहीं है, बल्कि चरणबद्ध प्रक्रिया है, जिसके तहत मौजूदा बच्चों के पास आउट होने के बाद संस्थान पूरी तरह बंद हो जाएंगे. इन कॉलेज के बंद होने के पीछे सबसे बड़ी वजह कम छात्र एडमिशन, योग्य फैकल्टी की कमी, बुनियादी ढांचे से जुड़ी मांगों का पालन न कर पाना और दूसरी शर्तों को पूरा नहीं करना बताया गया है. 

किन राज्यों में सबसे ज्यादा कॉलेज बंद हुए?

एआईसीटीई के अनुसार सबसे ज्यादा 12-12 इंजीनियरिंग कॉलेज उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बंद किए जा रहे हैं. इसके बाद मध्य प्रदेश में 8, तेलंगाना और पंजाब में 4-4, आंध्र प्रदेश और राजस्थान के 3-3 कॉलेजों को प्रोग्रेसिव क्लोजर की मंजूरी मिली है. गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, उड़ीसा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों के कॉलेज भी इस लिस्ट में शामिल है. इन 58 इंस्टीट्यूट में केवल तीन सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज है, जबकि बाकी सभी प्राइवेट कॉलेज शामिल है. 

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950 से ज्यादा टेक्निकल कोर्स भी हुए बंद 

एआईसीटीई के अनुसार सिर्फ कॉलेज ही नहीं तकनीकी शिक्षा से जुड़े 950 से ज्यादा इंजीनियरिंग और तकनीकी कोर्स भी बंद कर दिए गए हैं. लगातार कम एडमिशन मिलने की वजह से कई इंस्टिट्यूट में सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल जैसे पारंपरिक शाखाओं के कोर्स चलाना बंद कर दिया है. जिन पाठ्यक्रमों में पर्याप्त छात्र नहीं मिल रहे थे, उन्हें जारी रखना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है. 

आखिर सिर्फ 17 प्रतिशत ही नौकरी के योग्य क्यों? 

कर्नाटक सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य यही पता लगाना है कि इंजीनियरिंग डिग्री हासिल करने वाले अधिकांश छात्र उद्योगों की अपेक्षाओं पर खरे क्यों नहीं उतर पा रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण कॉलेज की पढ़ाई और उद्योग की वास्तविक जरूरत के बीच बड़ा अंतर है. कई कॉलेज में आज भी पुराना पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है, जबकि कंपनियां एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, ऑटोमेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर जैसी नई तकनीक में प्रशिक्षित युवाओं की मांग कर रही है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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