Sex Education: बच्चों को किस उम्र में देनी चाहिए सेक्स एजुकेशन, जानिए कब आती है समझने की क्षमता?
Sex Education: अक्सर अपने बच्चों को लेकर हर माता-पिता का एक ही सवाल होता है कि आखिर उनको किस उम्र में सेक्स एजुकेशन देना सही रहेगा? क्या आपके मन में भी है ये सवाल तो एक क्लिक में जान लीजिए इसका जवाब

सेक्स एजुकेशन एक ऐसा विषय जिसके बारे में आमतौर पर बच्चों के माता-पिता भी बात करने से कतराते हैं. लेकिन ये बात भी पूरी तरह सच है कि इस विषय के बारे में बात करने के लिए उनसे बेहतर कोई शिक्षक नहीं हो सकता, इसलिए ये जान लेना जरूरी है कि कब और किस उम्र से बच्चों को धीरे धीरे सेक्स एजुकेशन देना जरूरी है.
माता-पिता की हिचक नहीं सूझबूझ है कारगर
वहीं, बच्चों को गुड टच, बैड टच के साथ-साथ ये जानकारी देना भी जरूरी है कि शरीर के किन अंगों पर किसी भी तरह का टच होने पर उन्हें बातें माता-पिता से शेयर करनी है, लेकिन अक्सर देखने में आता है कि मम्मी-पापा खुद बच्चों से ऐसी बात करने से झिझकते हैं. जबकि डॉक्टर्स भी मानते हैं कि सेक्स एजुकेशन की शुरूआत घर से ही हो तो वो ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकती है. क्योंकि इससे बच्चों को हेल्दी माहौल में जागरूक बनाया जा सकता है.आइए अब जान लेते हैं किस उम्र में बच्चों को देनी चाहिए सेक्स एजुकेशन.
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बच्चों को सेक्स एजुकेशन देने की सही उम्र
1. चार साल में पढ़ाएं पहला पाठ: बच्चों को सेक्स एजुकेशन देने की शुरूआत चार साल की उम्र से कर देनी चाहिए. ये सही समय है जब बच्चों को प्राइवेट पार्ट्स की सेफ्टी के बारे में समझाया जाए. साथ ही ये भी बताया जाए कि उन्हें किसी के टच करने पर माता पिता को जानकारी देनी है.
2. 8वीं में बताएं फैक्ट्स: इस उम्र के बच्चे और भी ज्यादा समझदार हो जाते हैं. इस उम्र के बच्चों को काल्पनिक कहानियां न सुना कर साइंटिफिक फैक्ट्स बताएं. उन्हें ये न बताएं कि उन्हें इस दुनिया में परियां छोड़ कर गई हैं. बल्कि ये बताएं कि बच्चों के जन्म लेने के लिए स्पर्म और सेल की जरूरत होती है, जो माता-पिता दोनों से मिलता है.
3. दस में तोड़ें झिझक- इस उम्र के बच्चों के साथ अपनी झिझक को थोड़ा और कम करें. समाज में घटने वाली गंभीर घटनाओं के बारे में उन्हें बताएं. इसके साथ ही अगर उन्होंने खुद रेप या शारीरिक शोषण से जुड़ा कोई सवाल किया है तो उसे टालें नहीं बल्कि इसकी गंभीरता समझाएं. खासतौर से लड़कियों को इस बारे में ज्यादा जागरूक करें. लड़कों को सेंसिटाइज करना भी जरूरी है.
4. 15 की उम्र में दें पूरी जानकारी- ये बिलकुल न सोचें कि अब आप का बच्चा ऐसी उम्र में आ चुका है जब वो सेक्स से जुड़ी कई बातें जानता ही होगा. बल्कि आधी-अधूरी जानकारी उन्हें किसी और दिशा में भी ले जा सकती है. उनसे खुलकर बात करें ताकि बच्चों के मन में क्या चल रहा है ये आपको अच्छे से पता रहे और आप वक्त रहते उन्हें और सजग कर सकें.
क्यों जरूरी है ये शिक्षा?
- सेक्स एजुकेशन के जरिए ही बच्चे गुड टच और बैड टच के महत्व को समझ सकते हैं.
- अपने शरीर में आ रहे बदलावों को भी वो अच्छे से समझ सकते हैं.
- अपोजिट सेक्स के साथियों के साथ ज्यादा कंफर्टेबल रह सकते हैं और सही समय पर सही तरीके से व्यवहार कर सकते हैं.
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Source: IOCL























