UPSC Success Story: जब लगन ने बदली किस्मत, ममता यादव बनीं देश की अफसर; पढ़ें छोटे से गांव से निकलकर IAS बनने तक का सफर
हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव ने कड़ी मेहनत और लगातार प्रयास से आईएएस बनने का सपना पूरा किया. आज हम उनका सफलता का सफर आपको बताएंगे.

हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो हालात से लड़कर अपने सपनों को सच कर दिखाते हैं. ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने मेहनत, धैर्य और लगातार कोशिश के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस में जगह बनाई. उनकी कहानी आज उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े लक्ष्य देखते हैं. आइए जानते हैं उनकी सफलता का सफर.
ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा. गांव का माहौल, सीमित संसाधन और यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. ममता शुरू से पढ़ाई में अच्छी थीं और कुछ बड़ा करने का सपना देखती थीं. उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें आईएएस अधिकारी बनना है. इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने चार साल तक लगातार यूपीएससी की तैयारी की.
यहां से की है पढ़ाई
अगर ममता की पढ़ाई की बात करें तो उनकी शुरुआती शिक्षा दिल्ली के बलवंत राय मेहता स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पक्का हो गया था.
साल 2019 में ममता ने पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की. उस समय उनकी ऑल इंडिया रैंक 556 आई थी. यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन इस रैंक पर उन्हें आईएएस सेवा नहीं मिल पाई. कई लोग यहां आकर रुक जाते हैं, लेकिन ममता ने हार मानने के बजाय इसे सीख के रूप में लिया. उन्होंने तय किया कि अगली बार और ज्यादा मेहनत करेंगी.
फिर से की तैयारी
अगले साल ममता ने फिर से परीक्षा दी. इस बार उनका आत्मविश्वास ज्यादा मजबूत था और तैयारी पहले से कहीं बेहतर. उन्होंने पूरे मन से पढ़ाई की और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश की. उनकी मेहनत रंग लाई और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया 5वीं रैंक हासिल की. यह न सिर्फ उनकी निजी जीत थी, बल्कि पूरे गांव और परिवार के लिए गर्व का पल था. ममता अपने गांव की पहली आईएएस अधिकारी बनीं.
ऐसे की तैयारी
ममता यादव AGMUT कैडर की आईएएस अधिकारी हैं. एक छोटे से गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन ममता ने यह दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं. ममता अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और सही योजना को देती हैं. उन्होंने बताया कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने कोचिंग भी ली और साथ ही खुद से पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया. ममता रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं और परीक्षा के नजदीक आते-आते यह समय 10 से 12 घंटे तक पहुंच गया था. उन्होंने एनसीईआरटी किताबों को अपनी तैयारी की नींव बनाया और बाकी विषयों के लिए जरूरी सामग्री का सहारा लिया.
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Source: IOCL





















