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UPSC टॉपर भी हो सकते हैं फेल! LBSNAA के नियम जानकर रह जाएंगे हैरान

UPSC पास करने के बाद LBSNAA की ट्रेनिंग में फेल होने पर क्या नौकरी चली जाती है? जानिए री-एग्जाम, सीनियरिटी, प्रमोशन और ट्रेनिंग से जुड़े सभी जरूरी नियम..

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  • UPSC चयनित अधिकारी LBSNAA में गहन प्रशिक्षण, परीक्षाएं देते हैं.
  • स्थानीय भाषा परीक्षा में फेल होने पर भी नौकरी नहीं जाती.
  • दोबारा परीक्षा का मौका, अंकों से वरिष्ठता, अनुशासन जरूरी.

UPSC की परीक्षा पास करना किसी भी उम्मीदवार के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन यहीं से असली सफर शुरू होता है. चयनित उम्मीदवारों को मसूरी स्थित LBSNAA में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है.यहां पढ़ाई के साथ कई परीक्षाएं भी होती हैं. अगर कोई प्रोबेशनर इनमें फेल हो जाए तो क्या उसकी नौकरी चली जाती है? यहां जानतें हैं.

UPSC के बाद शुरू होती है असली ट्रेनिंग

UPSC में चयन होने के बाद उम्मीदवार सीधे अधिकारी नहीं बन जाते.सबसे पहले उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग दी जाती है. यहां प्रशासन, संविधान, कानून, अर्थव्यवस्था, लोक प्रशासन और मैनेजमेंट जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. इन विषयों की परीक्षा भी होती है और सभी में तय न्यूनतम अंक लाना जरूरी होता है.

कई अधिकारियों को भाषा की परीक्षा में होती है दिक्कत

ट्रेनिंग के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी स्थानीय भाषा की परीक्षा में देखने को मिलती है. जिस राज्य का कैडर अधिकारी को मिलता है, उसी राज्य की भाषा सीखना और उसका टेस्ट पास करना जरूरी होता है.अगर किसी को दक्षिण भारत का कैडर मिलता है तो उसे वहां की भाषा भी सीखनी पड़ती है. कई प्रोबेशनर पहली बार में इस परीक्षा को पास नहीं कर पाते.

फेल होने पर क्या होता है

अगर कोई IAS या IPS प्रोबेशनर ट्रेनिंग के दौरान किसी परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसे नौकरी से नहीं निकाला जाता. अकादमी ऐसे उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने का मौका देती है. नियम के मुताबिक अधिकारी को सेवा में शामिल होने के चार साल के भीतर सभी लंबित परीक्षाएं पास करनी होती हैं. ज्यादातर उम्मीदवार री-एग्जाम में सफल हो जाते हैं.

अच्छे नंबर मिलने का मिलता है फायदा

LBSNAA की परीक्षाओं के नंबर सिर्फ पास या फेल तय नहीं करते, बल्कि आगे के करियर में भी इनकी अहम भूमिका होती है. इन्हीं अंकों के आधार पर बैच में सीनियरिटी तय होती है. भविष्य में प्रमोशन और कई प्रशासनिक मामलों में भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को फायदा मिल सकता है. इसलिए ट्रेनिंग के दौरान हर परीक्षा को गंभीरता से लिया जाता है.

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अनुशासन तोड़ा तो हो सकती है कार्रवाई

अकादमी में पढ़ाई के साथ अनुशासन का भी सख्ती से पालन कराया जाता है. अगर कोई अधिकारी क्लास में कम उपस्थित रहता है, सुबह की पीटी छोड़ देता है, ड्रेस कोड का पालन नहीं करता या ट्रेनिंग के दौरान मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का गलत इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.ऐसे मामलों में चेतावनी, मेमो या अंक कटने जैसी कार्रवाई होती है.


कैसी होती है LBSNAA की ट्रेनिंग

LBSNAA की ट्रेनिंग काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है. यहां सुबह जल्दी पीटी, योग और घुड़सवारी से दिन की शुरुआत होती है.इसके बाद पूरे दिन क्लास, ग्रुप एक्टिविटी और प्रशासनिक प्रशिक्षण चलता है. अधिकारियों को भारत दर्शन, हिमालय ट्रेक और जिला प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों में भी भेजा जाता है ताकि वे देश की विविधता और जमीनी प्रशासन को बेहतर तरीके से समझ सकें.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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