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IAS Success Story: IIT Bombay से निकलकर UPSC टॉपर बनने तक, पांच साल लंबा रहा वरुण रेड्डी का सफर

साल 2018 के टॉपर वरुण रेड्डी ने पांचवे प्रयास में यह सफलता हासिल की. इसके पहले भी दो बार वे चयनित हुए पर रैंक मन-माफिक न आने से बार-बार परीक्षा दी. जानते हैं वरुण से उनके इस लंबे सफर के बारे में.

Success Story Of IAS Topper Varun Reddy: वरुण की यूपीएससी जर्नी काफी लंबी रही और मंजिल तक पहुंचने में उन्हें करीब पांच साल से ज्यादा लग गए. इतने लंबे समय तक एक लक्ष्य के पीछे लगे रहना और निराश न होना आसान नहीं होता. कई बार इस सफर में इतने लो प्वॉइंट्स आते हैं कि कैंडिडेट को लगने लगता है कि गलत फील्ड में तो नहीं आ गए. पर ऐसे में भी हिम्मत बनाए रखना आसान नहीं होता. आज जानते हैं वरुण रेड्डी से उनकी यूपीएससी जर्नी के बारे में जो शुरू हुई थी 2013 में और मंजिल पर पहुंची करीब छः साल बाद 2018 में. इस बारे में उन्होंने दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में खुलकर बात की.

आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट हैं वरुण –

वरुण ने हमेशा से यूपीएससी के क्षेत्र में आने की योजना नहीं बनाई थी. वे पहले इंजीनियरिंग करके आईआईएम से एमबीए करना चाहते थे. हालांकि कुछ कारणों से उन्होंने सिविल सर्विस को कैरियर बनाने का मन बनाया. साल 2013 में वरुण ने ग्रेजुएशन पूरा कर लिया था और उसी के बाद से वे यूपीएससी की तैयारी में लग गए थे. अगले ही साल उन्होंने 2014 में अपना पहला अटेम्पट दिया और इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे लेकिन सेलेक्ट नहीं हुए.

यहां देखें वरुण रेड्डी द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया इंटरव्यू

दूसरे अटेम्पट के बाद बदला ऑप्शनल –

वरुण यूपीएससी सिविल सर्विसेस परीक्षा तो पास करना चाहते थे पर रैंक के मामले में समझौता नहीं करना चाहते थे. उनका विजन हमेशा से साफ था कि वे आईएएस ही बनना चाहते हैं. इस कारण वरुण ने तब तक यह परीक्षा दी जब तक वे 2018 में 7वीं रैंक के साथ सेलेक्ट नहीं हो गए. 2014 के बाद अगले साल के अटेम्पट में वरुण का मेन्स में ही नहीं हुआ और उन्होंने अपना ऑप्शनल बदल दिया. ज्योग्राफी को हटा मैथ्स विषय को चुना.

दो बार हुए चयनित पर नहीं मिली मनचाही रैंक –

ऑप्शनल बदलने के बाद दो बार वरुण का सेलेक्शन हुआ पर एक भी बार उनके मन-मुताबिक रैंक उन्हें नहीं मिली. नतीजतन उन्होंने प्रयास बंद नहीं किए. साल 2015 में मेन्स न क्लियर कर पाने और ऑप्शनल बदलने के बाद वरुण को तीसरे प्रयास में 166 रैंक मिली और चौथे प्रयास में 225. दोनों ही सालों में वरुण को वह रिजल्ट नहीं मिला जिसकी उन्हें चाह थी. वरुण भी जिद के पक्के थे और लगे रहे. अंततः पांचवें प्रयास में वे 07वीं रैंक के साथ टॉपर बने और करीब छः साल की मेहनत के बाद उन्हें मंजिल मिली.

कम किताबें, ज्यादा रिवीजन –

वरुण अपने अनुभव से दूसरे कैंडिडेट्स को यही कहते हैं कि किसी भी विषय की बहुत किताबें इकट्ठी न करें और कुछ मुख्य किताबों से ही बार-बार रिवाइज करें. जब तैयारी पक्की हो जाए तो मॉक टेस्ट देकर खूब प्रैक्टिस करें. यही एकमात्र जरिया है जिससे आप उत्तर लिखने की सही टेक्निक सीख सकते हैं. वरुण एक बात और ध्यान रखने के लिए कहते हैं कि जब परीक्षा की तैयारी शुरू करें तो अपनी स्ट्रेटजी को जितना हो सके सिंपल रखें. हिस्ट्री के लिए छोटे-छोटे नोट्स बनाएं और करेंट अफेयर्स के लिए रोज नियम से न्यूज पेपर पढ़ें. हर विषय के अलग-अलग एमसीक्यू सॉल्व करें, यह प्री परीक्षा में बहुत मदद करते हैं. इनसे आपकी स्पीड बढ़ती है और आप पेपर को सही ढ़ंग से अपरोच करना सीख पाते हैं.

वरुण की एडवाइज –

वरुण दूसरे यूपीएससी कैंडिडेट्स को यही सलाह देते हैं कि प्री और मेन्स की तैयारी इंटीग्रेटेड वे में करें. दोनों को अलग-अलग न समझें और एक साथ पढ़ें. सबसे जरूरी बात होती है सिलेबस के अनुसार पढ़ाई करना. वरुण सिलेबस को इतना जरूरी मानते हैं कि वे कहते हैं कि आपको सिलेबस इतनी बार देखना चाहिए कि याद हो जाए. जहां पढ़ते हों, वहां उसे  स्टिक कर लें ताकि नजर के सामने हमेशा सिलेबस रहे. इसी के अनुसार तैयारी करें.

टॉपर्स की कॉपी देखें कि वे आंसर्स को कैसे फ्रेम करते हैं. कौन से डायग्राम्स, फ्लोचार्ट्स आदि यूज करते हैं. उनसे प्रेरणा लेकर आप भी अपनी आंसर राइटिंग स्किल्स को इम्प्रूव करें. यह भी देखें कि विषय के हिसाब से कैसे उत्तर लिखने का तरीका फर्क होता है. हिस्ट्री के आंसर हों, पॉलिटी के, एथिक्स के या ऐस्से के, कैसे सबको लिखने की तकनीक अलग होती है इस पर गौर फरमाएं. टेस्ट सीरीज जरूर ज्वॉइन करें यह आपकी तैयारी परखने और कमियां पता करने का बेस्ट माध्यम होती हैं. वरुण तो जब कोई विषय तैयार हो जाता था तो केवल उस विषय के टेस्ट सॉल्व करते थे ताकि जान पाएं की विषय ठीक से प्रिपेयर हुआ है या नहीं.

अंत में वरुण यही कहते हैं कि यह सफर आमतौर पर लंबा होता है इसलिए हार न मानें और जब तक सफल न हो जाएं मेहनत करते रहें. कड़ी मेहनत का कोई रिप्लेसमेंट नहीं होता और मेहनत का फल कभी बेकार नहीं जाता.

IAS Success Story: एक बार इंटरव्यू राउंड तक पहुंचकर दोबारा प्री भी पास नहीं कर पाने वाले शुभम कैसे बने UPSC टॉपर ?

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