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राजस्थान के स्कूलों में लोकल लैंग्वेज को बढ़ावा, किताबों में दिखेंगे लाडू-मोटो बापो जैसे शब्द

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) की निदेशक श्वेता फगेड़िया ने बताया कि शिक्षा विभाग ने बहुभाषी शिक्षा परियोजना शुरू की है.

राजस्थान सरकार अब सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को और रोचक और आसान बनाने के लिए नई पहल करने जा रही है. इसके तहत अब किताबों और शिक्षण सामग्री में बच्चों की लोकल लैंग्वेज के शब्दों को शामिल किया जाएगा.  जैसे लड्डू को अब लाडू, रोटी को रोटलो, बड़े पापा को मोटो बाप और रुपया को पिया के रूप में पढ़ाया जाएगा. यह कदम बच्चों की भाषा की समझ बढ़ाने और स्कूल में पढ़ाई को उनके लिए सहज बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. 

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) की निदेशक श्वेता फगेड़िया ने बताया कि शिक्षा विभाग ने बहुभाषी शिक्षा परियोजना शुरू की है. इस परियोजना के माध्यम से बच्चे अपनी स्थानीय भाषा में पढ़ाई करेंगे, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और स्कूल में रुचि दोनों बढ़ेगी. 

राजस्थान स्कूलों के सर्वेक्षण और आंकड़े

इस परियोजना को लागू करने से पहले आरएससीईआरटी ने राज्य के स्कूलों में भाषायी सर्वेक्षण किया. दो चरणों में किए गए इस सर्वेक्षण में राज्य के विभिन्न जिलों के हजारों स्कूलों और लाखों बच्चों को शामिल किया गया. पहले चरण में प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, पाली, सिरोही और उदयपुर के 20,298 प्राथमिक स्कूलों के 2,43,532 बच्चों और उनके शिक्षकों को शामिल किया गया. इस दौरान 31 से ज्यादा बोलियों की पहचान हुई, जिसमें वागड़ी और मेवाड़ी भाषाएं सबसे ज्यादा बोली जाने वाली पाई गई, 

वहीं दूसरे चरण में 24 जिलों के 41,686 स्कूलों के 3,66,782 विद्यार्थियों को शामिल किया गया. इस सर्वेक्षण का उद्देश्य यह समझना था कि बच्चों की घर की भाषा और स्कूल में पढ़ाई की भाषा में कितना अंतर है और इससे उनके सीखने पर क्या प्रभाव पड़ता है. 

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बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत

सर्वेक्षण के आधार पर डूंगरपुर और सिरोही जिलों को कार्यक्रम के लिए चुना गया. इन जिलों में भाषायी विविधता सबसे ज्यादा थी और घर की भाषा और स्कूल की भाषा में अंतर ज्यादा था.  यह परियोजना यूनिसेफ, रूम टू रीड और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है. आरएससीईआरटी ने शुरुआत में 200 स्कूलों में बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम लागू किया. पहले वर्ष कक्षा एक और दूसरे वर्ष कक्षा दो के बच्चों को उनकी स्थानीय भाषा में पढ़ाया गया. 

11 स्थानीय भाषाओं में सामग्री तैयार

इस सफलता के बाद शिक्षा विभाग ने राज्य की 11 प्रमुख स्थानीय भाषाओं के लिए शिक्षण सामग्री तैयार की है. इसमें कार्यपुस्तिकाएं, कहानी की किताबें, चित्र चार्ट, कविता पोस्टर, स्थानीय भाषा की पहेलियां, खेल और बालगीत शामिल हैं. आरएससीईआरटी का लक्ष्य है कि इस कार्यक्रम को पहले 11 जिलों में लागू किया जाए और फिर चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में फैलाया जाए. इस पहल से बच्चों के लिए शिक्षा और ज्यादा रोचक, सहज और उनकी लोकल लैंग्वेज के करीब होगी. 

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