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अमेरिका की यूनिवर्सिटी से ले ली ये डिग्री तो हो जाएंगे मालामाल, मिलता है कम से कम 1 करोड़ का पैकेज

अमेरिका में पॉलिटिकल साइंस की डिग्री आज भी बेहतरीन करियर विकल्पों और तगड़ी सैलरी का रास्ता खोलती है. आइए जानते हैं डिटेल्स...

भारत में समय के साथ कुछ डिग्रियों की वैल्यू कम होती जा रही है. खासकर पॉलिटिकल साइंस की डिग्री की बात करें तो इसकी लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में काफी घट गई है. भारत में यह डिग्री ज्यादातर वे छात्र लेते हैं, जो आईएएस, आईपीएस जैसी सरकारी नौकरियों या अकादमिक क्षेत्र में प्रोफेसर बनने का सपना देखते हैं. वहीं कुछ छात्र शोध और रिसर्च में करियर बनाने के लिए भी इसे चुनते हैं. लेकिन सवाल उठता है कि क्या अमेरिका में भी पॉलिटिकल साइंस की डिग्री अपना महत्व खो रही है?

अमेरिका के विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलिटिकल साइंस की डिग्री वहां भी अभी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. वाशिंगटन डी.सी. स्थित अमेरिकन पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन में टीचिंग और लर्निंग की सीनियर डायरेक्टर मिशेल एन्डोरफर का कहना है पॉलिटिकल साइंस की डिग्री छात्रों को करियर के कई क्षेत्रों के लिए तैयार करती है. यह डिग्री उन्हें सिर्फ एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रखती.

उन्होंने बताया कि पॉलिटिकल साइंस की क्लास में मिलने वाली स्किल्स जैसे बहस का विश्लेषण करना, दावों का मूल्यांकन करना, डेटा का विश्लेषण करना, बातचीत और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता कंपनियों और संगठनों में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. यही वजह है कि अमेरिका में इस डिग्री को लेकर करियर के कई विकल्प मौजूद हैं और इसमें पैसा भी अच्छा मिलता है.

पॉलिटिकल साइंस की डिग्री से मिलने वाले करियर विकल्प

  • लॉ और कानूनी क्षेत्र: पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट्स लॉ में करियर बना सकते हैं. इसके बाद लॉ की डिग्री लेकर वकील बनने का रास्ता खुलता है.
  • सरकारी नौकरियां: अमेरिका में केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर कई सरकारी नौकरियों के लिए पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट्स की जरूरत रहती है.
  • सिविल सर्विस और पॉलिसी मेकिंग: पॉलिसी मेकिंग, प्रशासन और ब्यूरोक्रेसी में पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट्स की मांग रहती है.
  • टीचिंग और अकादमिक क्षेत्र: अमेरिकी स्कूल और कॉलेजों में पॉलिटिकल साइंस टीचर्स की जरूरत रहती है. इसके ग्रेजुएट्स शिक्षण के क्षेत्र में भी अच्छी जॉब पा सकते हैं.
  • रिसर्च और एनालिसिस: पीएचडी करने वाले छात्र पॉलिटिकल साइंटिस्ट बन सकते हैं और सरकारी या प्राइवेट रिसर्च एजेंसियों में काम कर सकते हैं.
  • अंतरराष्ट्रीय संगठन: संयुक्त राष्ट्र (UN), IMF, वर्ल्ड बैंक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों में पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट्स को हायर किया जाता है.
  • जर्नलिज्म और मीडिया: पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट्स की डिमांड अखबार और चैनलों में काफी है.
  • बिजनेस और कॉर्पोरेट सेक्टर: मार्केटिंग, एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन जैसे क्षेत्रों में भी ग्रेजुएट्स आसानी से जॉब पा सकते हैं.

अमेरिका में पॉलिटिकल साइंस डिग्री के बाद सैलरी

अमेरिका में पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट्स की औसत सालाना सैलरी लगभग 52,859 डॉलर (लगभग 47 लाख रुपये) होती है. टॉप 10 फीसदी में शामिल प्रोफेशनल्स की सैलरी 1,15,000 डॉलर (लगभग 1 करोड़ रुपये) तक जाती है. यूएस न्यूज बेस्ट जॉब्स रैंकिंग के अनुसार, पॉलिटिकल साइंटिस्ट के तौर पर काम करने वाले लोगों की सालाना सैलरी 1,28,000 डॉलर (लगभग 1.13 करोड़ रुपये) तक रही है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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