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महाकुंभ में मौजूद अखाड़े में कौन-कौन से होते हैं पदाधिकारी, कैसे तय होता है इनका क्रम?

संत समाज के अनुशासन और अखाड़ों के सम्मान की रक्षा तय करने के लिए जिम्मेदार भी यही पदाधिकारी होते हैं. आइए आपको बताते हैं कि इन पदाधिकारियों की तैनाती किस तरह से की जाती है.

Akhada Parishad: कुंभ में अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों की तैनाती एक सुव्यवस्थित और परंपरागत प्रक्रिया के तहत होती है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) संत समाज की सर्वोच्च संस्था है, और कुंभ में इसके पदाधिकारियों की भूमिका बहुत जरूरी होती है. अखाड़ा परिषद केवल कुंभ तक सीमित नहीं होता है, बल्कि इनकी नियमित रूप से बैठकें और निर्णय लेने की प्रक्रियाएं चलती रहती है. आपको बता दें कि कुंभ के दौरान संत समाज के अनुशासन और अखाड़ों के सम्मान की रक्षा तय करने के लिए जिम्मेदार भी यही पदाधिकारी होते हैं. आइए आपको बताते हैं कि इन पदाधिकारियों की तैनाती किस तरह से की जाती है.

इस तरह होता है चुनाव और नॉमिनेशन

अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों का चुनाव अखाड़ों के संतों की आपसी सहमति या चुनाव के माध्यम से किया जाता है. इसके अलावा परिषद में 13 प्रमुख अखाड़े शामिल होते हैं और हर अखाड़े से वरिष्ठ संतों को प्रमुख पदों पर आपसी सहमति से नियुक्त किया जाता है. बताते चलें कि अखाड़ा परिषद के प्रमुख पद राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष होते हैं. अखाड़ा परिषद में इन पदों के लिए सबसे जरूरी होता है अनुभव और ज्ञान. ज्ञान के आधार पर अखाड़ा परिषद में पदाधिकारियों की नियुक्ति एक चुनाव प्रक्रिया के जरिए की जाती है जिसमें अखाड़े के वरिष्ठ सदस्य और कई बड़े साधु शामिल रहते हैं, यह सभी आपस में मंथन कर जिम्मेदार लोगों को नियुक्त करते हैं.

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पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां

अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कुंभ मेले की व्यवस्थाओं पर चर्चा करते हैं. पदाधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी अखाड़ों को उचित स्थान, सुविधाएं और सुरक्षा मिलें. कुंभ में शाही स्नान सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है, और अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी इसकी अगुवाई करते हैं. स्नान के लिए अखाड़ों के संतों और नागा साधुओं की टुकड़ियों का नेतृत्व करने वाले पदाधिकारी ही उनके क्रम और जगहों को तय करते हैं. अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी कुंभ के दौरान अखाड़ों के बीच किसी भी तरह के विवाद को हल करने का काम करते हैं. अगर कोई अनुशासनहीनता होती है, तो परिषद के प्रमुख संत मिलकर उसका समाधान करते हैं.

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