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क्या USA में भारतीयों और अमेरिकियों को अलग-अलग मिलती है सैलरी, जानें कितना होता है अंतर?

भारत में ज्यादातर लोग अमेरिका में नौकरी करने की सपना देखते हैं. ऐसे में आज आपको बताते हैं कि यूएस में भारतीयों और अमेरिकियों की सैलरी में कितना अंतर होता है?

आजकल ज्यादातर भारतीय लोग विदेश जाकर नौकरी करना पसंद करते हैं, जिसके चलते सऊदी अरब, कनाडा, यूएई समेत कई अन्य देशों में भारतीयों की काफी आबादी देखने को मिलती है. अपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग नौकरी के लिए अमेरिका जाने का सपना देखते हैं. इसके पीछे का कारण यह है कि बाकी देशों के मुकाबले अमेरिका में मिलने वाली सैलरी काफी अधिक होती है. क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों और अमेरिकियों को अलग-अलग सैलरी मिलती है? आइए आपको बताते हैं कि USA में अमेरिकियों और भारतीयों की सैलरी में कितना अंतर होता है?

USA में भारतीयों को कितनी मिलती है सैलरी?

भारत से USA नौकरी करने जाने वाले अधिकतर लोग वहां अच्छी पोस्ट पर काम करते हैं, जैसे डॉक्टर, इंजीनियर नर्सेज, साइंटिस्ट और रिसर्च स्कॉलर्स. काम के साथ-साथ अमेरिका में भारतीयों को मिलने वाली सैलरी भी काफी अच्छी होती है. अमेरिकी सेंसस ब्यूरो के अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की एक साल की एवरेज इनकम $95,000 थी. इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि यह एवरेज वेतन का एक अनुमान है, जो बदल भी सकता है. 

USA में अमेरिकन्स की सैलरी

अमेरिका में रहने वाले लोग अक्सर इस बात से शिकायत करते हैं कि बाहर देश से आने वाले लोगों के कारण उनके वेतन में कमी देखने को मिलती है. आपको बता दें कि साल 2022-2025 के ब्यूरो ऑफ लेबर एंड स्टेटिस्टिक्स के डेटा के अनुसार, USA में रहने वाले अमेरिकन्स की एवरेज इनकम $59,430 से $68,124 पर ईयर तक थी. साथ ही, मंथली उन्हें $5,000 - $6,000 तक सैलरी मिलती है. 

दोनों की सैलरी में कितना है अंतर?

ऐसे में देखा जाए तो USA में नॉन-आईटी सेक्टर में अमेरिकन्स की सैलरी भारतीयों से अधिक है और इसका कारण उनकी बेहतर निगोशिएशन पावर और मूल नागरिक होना है. हालांकि, कई जगहों पर चीजें इसके उलट भी दिखाई देती हैं, क्योंकि अधिकतर IT सेक्टर और सॉफ्टवेयर डेवलेपमेंट के एरिया में भारतीयों को ज्यादा सैलरी मिलती है. 

क्यों है इतना अंतर?

अमेरिका में लोगों को मिलने वाली तनख्वाह में अंतर कई कारणों से देखने को मिल सकता है. इनके पीछे स्किल्स, एक्सपीरियंस, जॉब प्रोफाइल आदि चीजें मैटर करती हैं. इसके अलावा आप किस अमेरिकन स्टेट में जॉब करते हैं, ये बात भी मायने रखती है, क्योंकि किसी राज्य की इनकम ज्यादा होती है तो किसी की बेहद कम.

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आंखों में सपने लिए, घर से हम चल तो दिए, जानें ये राहें अब ले जाएंगी कहां... कहने को तो ये सिंगर शान के गाने तन्हा दिल की शुरुआती लाइनें हैं, लेकिन दीपाली की जिंदगी पर बखूबी लागू होती हैं. पूरा नाम दीपाली बिष्ट, जो पहाड़ की खूबसूरत दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. किसी जमाने में दीपाली के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ कंधे पर झोला टांगकर और हाथों में अखबार लेकर घूमने वाले लोग होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों में इसी दुनिया का सितारा बनने के सपने पनपने लगे और वह भी पत्रकारिता की दुनिया में आ गईं. उन्होंने अपने इस सफर का पहला पड़ाव एबीपी न्यूज में डाला है, जहां वह ब्रेकिंग, जीके और यूटिलिटी के अलावा लाइफस्टाइल की खबरों से रोजाना रूबरू होती हैं. 

दिल्ली में स्कूलिंग करने वाली दीपाली ने 12वीं खत्म करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और सत्यवती कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रैजुएशन किया. ग्रैजुएशन के दौरान वह विश्वविद्यालय की डिबेटिंग सोसायटी का हिस्सा बनीं और अपनी काबिलियत दिखाते हुए कई डिबेट कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की. 

साल 2024 में दीपाली की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (नोएडा) से टीवी जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. उस दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और एंकरिंग की बारीकियां सीखीं. कॉलेज खत्म करने के बाद वह एबीपी नेटवर्क में बतौर कॉपीराइटर इंटर्न पत्रकारिता की दुनिया को करीब से समझ रही हैं. 

घर-परिवार और जॉब की तेज रफ्तार जिंदगी में अपने लिए सुकून के पल ढूंढना दीपाली को बेहद पसंद है. इन पलों में वह पोएट्री लिखकर, उपन्यास पढ़कर और पुराने गाने सुनकर जिंदगी की रूमानियत को महसूस करती हैं. इसके अलावा अपनी मां के साथ मिलकर कोरियन सीरीज देखना उनका शगल है. मस्ती करने में माहिर दीपाली को घुमक्कड़ी का भी शौक है और वह आपको दिल्ली के रंग-बिरंगे बाजारों में शॉपिंग करती नजर आ सकती हैं.

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