J&K में भूख हड़ताल क्यों कर रहे मेडिकल इंटर्न, जानें क्या है उनकी प्रमुख मांगें?
जम्मू कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और दो डेंटल कॉलेज के मेडिकल इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. अब इंटर्न ने 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है.

जम्मू कश्मीर में मेडिकल इंटर्न का विरोध प्रदर्शन अब और तेज हो गया है. सरकारी मेडिकल कॉलेज और डेंटल कॉलेज में इंटर्न पिछले 7 दिनों से बढ़े हुए मासिक स्टाइपेंड की मांग को लेकर हड़ताल पर है. सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उनकी मांग पर अब तक कोई औपचारिक लिखित आदेश नहीं जारी नहीं हुआ है. इसी के चलते सोमवार से प्रदर्शन कर रहे इंटर्न ने 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में मेडिकल एंट्रेंस बुक हड़ताल क्यों कर रहे हैं और उनकी प्रमुख मांगे क्या है.
7 दिन प्रदर्शन के बाद शुरू की भूख हड़ताल
जम्मू कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और दो डेंटल कॉलेज के मेडिकल इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. करीब एक सप्ताह से चल रही हड़ताल के बाद भी सरकार और इंटर्न के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया. इसके बाद प्रदर्शनकारी इंटर्न आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला किया. मेडिकल इंटर्न का कहना है कि बार-बार बातचीत, प्रतिनिधित्व और आश्वासन के बावजूद स्टाइपेंड संशोधन को लेकर औपचारिक लिखित कार्यकारी आदेश जारी नहीं किया गया.
क्या है मेडिकल इंटर्न के प्रमुख मांग?
मेडिकल इंटर्न की सबसे बड़ी मांग मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी है. उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड 12,300 रुपये प्रतिमाह है और यह राशि करीब 7 साल से नहीं बदली. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लिखे पत्र में स्टाइपेंड की राशि को देश में सबसे कम में से एक बताया. इंटर्न का कहना है कि इस मामले में सक्षम समिति की ओर से पहले ही सिफारिश की जा चुकी है. इसलिए अब वह आगे और इंतजार करने के बजाय उन सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं.
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मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं इंटर्न
प्रदर्शनकारी मेडिकल इंटर्न का कहना है कि सरकार की ओर से लगातार समय मांगा जा रहा है, लेकिन वह इस मुद्दे पर करीब 3 साल से इंतजार कर रहे हैं. इंटर्न्स का कहना है कि सरकार उनके किसी मुद्दे को गंभीरता से लेती तो उसके लिए आदेश जारी करने में इतना लंबा समय नहीं लगना चाहिए. उनके अनुसार स्टाइपेंड बढ़ाने की सिफारिश 2023 में की गई थी. उनका कहना है कि अगर यह माना भी जाए कि सरकार ने हड़ताल शुरू होने के बाद इस मुद्दे को गंभीरता से लेना शुरू किया. तब से भी एक सप्ताह से ज्यादा का समय बीत चुका है और अब तक कोई आदेश नहीं आया. इंटर्न का कहना है कि उन्हें मौखिक आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन वह अब ऐसे आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म करने के लिए तैयार नहीं है. इसके अलावा प्रदर्शनकारी इंटर्न ने कॉलेज प्रशासन की ओर से दबाव बनाए जाने और उन्हें ड्यूटी पर वापस लौट के लिए मजबूर करने की कोशिश का भी आरोप लगाया. उनका कहना है कि प्रिंसिपलों के माध्यम से उन्हें ऐसे संदेश दिए जा रहे हैं, जिनसे आंदोलन खत्म कर दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करने का दबाव महसूस हो रहा है.
CM उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी मेडिकल इंटर्न्स के आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह मामला इस स्तर तक नहीं पहुंचना चाहिए था. मुख्यमंत्री के अनुसार यह स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा विषय है और स्वास्थ्य विभाग के फैसले के बिना कोई दूसरा विभाग इस मामले में कुछ नहीं कर सकता. उमर अब्दुल्ला ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने मेडिकल इंटर्न से बातचीत की है और जहां तक उन्हें जानकारी है इंटर्न को आश्वासन दिया गया है. उन्होंने कहा कि मामले का जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए.
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