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अमेरिका में भारतीय छात्रों की बढ़ती ताकत, 2024-25 में फिर बना नंबर वन, दर्ज हुई जबरदस्त बढ़ोतरी

भारतीय छात्रों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 14 अरब डॉलर का योगदान दिया और OPT प्रोग्राम में 47% की बढ़ोतरी ने साबित कर दिया कि भारतीय युवाओं की शिक्षा और रोजगार दोनों में मजबूत पकड़ बनी हुई है.

भारतीय छात्र आज सिर्फ विदेश जाकर पढ़ाई नहीं कर रहे, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान भी बना रहे हैं. इसका सबसे बड़ा प्रमाण है अमेरिका, जहां साल 2024-25 में भारतीय छात्रों की संख्या में फिर एक बार बड़ी छलांग देखने को मिली है. ओपनडोर्स इंटरनेशनल एजुकेशनल एक्सचेंज रिपोर्ट 2025 के मुताबिक भारत ने लगातार दूसरे साल अमेरिका में विदेशी छात्रों की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है.

रिपोर्ट के अनुसार इस साल भारतीय छात्रों की संख्या करीब 10% बढ़कर 3,63,000 के पार पहुंच गई. यह वृद्धि साबित करती है कि भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका अभी भी शिक्षा और करियर के बेहतरीन अवसरों का केंद्र है.

8 साल में लगभग दोगुने हुए भारतीय छात्र

यह उछाल सिर्फ एक साल का नहीं है, बल्कि पिछले आठ सालों में भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. 2017-18 में जहां भारतीय छात्रों की संख्या 1,96,000 थी. वहीं आज यह बढ़कर 3,63,000 तक पहुंच चुकी है. यानी महज आठ साल में करीब 85% की बढ़ोतरी. कोविड महामारी के बाद अमेरिका में चीनी छात्रों की संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन उसी दौरान भारतीय छात्र बड़ी संख्या में अमेरिका पहुंचे, और इस खाली जगह को तेजी से भर दिया. इससे भारत ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली.

अमेरिका को मिला 14 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ

भारतीय छात्रों का असर सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में भारतीय छात्रों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगभग 14 अरब डॉलर का योगदान दिया. फीस, रहने का खर्च, स्थानीय खरीदारी, यात्रा और रोजमर्रा के खर्चों के कारण अमेरिका में हजारों नौकरियां बनी रहती हैं.

भारतीय छात्रों की पहली पसंद

अमेरिका में पढ़ने वाले लगभग 49% भारतीय छात्र ग्रेजुएट (मास्टर्स/पीएचडी) डिग्री कर रहे हैं. यह दिखाता है कि भारतीय युवा रिसर्च, टेक्नॉलजी, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट जैसे उन्नत क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. साथ ही लगभग 40% छात्र OPT (Optional Practical Training) पर हैं.

जिसके तहत उन्हें पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने का मौका मिलता है. इस साल OPT में भारतीयों की संख्या में 47% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसका मतलब है कि भारतीय छात्र न केवल अमेरिका में पढ़ रहे हैं बल्कि वहां आसानी से नौकरी भी पा रहे हैं.

भारत के बाद दूसरे स्थान पर चीन, लेकिन गिरावट जारी

पिछले कई सालों से अमेरिका में चीनी छात्रों की संख्या घट रही है. 2024-25 में चीन से आए छात्रों की संख्या में 4% की गिरावट हुई, जबकि भारतीय छात्रों में लगभग 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

कौन-कौन से राज्य हैं भारतीय छात्रों की पसंद?

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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