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IAS Success Story: हिंदी माध्यम के गंगा सिंह मात्र 23 साल की उम्र में बने IAS अधिकारी, कैसे की उन्होंने परीक्षा की तैयारी? पढ़ें

IAS officer Ganga Singh Success Story: राजस्थान के गंगा सिंह राजपुरोहित ने साल 2016 में अपने दूसरे प्रयास में UPSC CSE परीक्षा में 33वीं रैंक के साथ टॉप किया था. हिंदी माध्यम के गंगा सिंह ने कैसे की परीक्षा की तैयारी, जानते हैं.

Success Story Of IAS Topper Ganga Singh Rajpurohit: यूपीएससी परीक्षा पास करना आसान नहीं होता फिर अगर आपका मीडियम हिंदी हो तो ये सफर और मुश्किल हो जाता है. लेकिन ऐसे में कुछ कैंडिडेट्स गंगा सिंह जैसे भी होते हैं जो जानबूझकर हिंदी माध्यम चुनते हैं और यह परीक्षा देने का निर्णय लेते हैं. जी हां, गंगा के साथ हिंदी माध्यम चुनने की मजबूरी नहीं थी और तो और वे एक साइंस स्टूडेंट थे पर जब यूपीएससी परीक्षा देने की बारी आयी तो उन्होंने न केवल अपना ऑप्शनल हिंदी साहित्य को बनाया बल्कि हिंदी माध्यम से परीक्षा भी दी. क्यों लिए गंगा सिंह ने ऐसे फैसले? आइये जानते हैं.

दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में गंगा सिंह ने अपनी इस जर्नी के बारे में खुलकर बात की.

गंगा शुरू से थे होनहार –

गंगा बचपन से पढ़ाई में अच्छे थे और क्लास दसवीं और बारहवीं दोनों में उन्होंने टॉप किया. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बड़ामेर में ही हुई, जहां उनका जन्म हुआ था. दोनों ही बोर्ड परीक्षाओं में वे अपने स्कूल के टॉपर बने. इसके बाद शिक्षकों ने उन्हें साइंस स्ट्रीम चुनने की सलाह दी और गंगा बीएससी करने जोधपुर आ गए. उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों से ग्रेजुएशन पूरा किया और इसी दौरान उनका झुकाव यूपीएससी की तरफ हुआ. इस कॉलेज में आकर उन्हें वो एक्सपोजर और संसाधन भी मिले जिनकी सहायता से उनकी सोचने-समझने की शक्ति में काफी बदलाव आए. ग्रेजुएशन के आखिरी साल से गंगा ने यूपीएससी सीएसई परीक्षा की आरंभिक तैयारी शुरू कर दी थी.

दिए हैं और भी कई एग्जाम –

गंगा बताते हैं कि सिविल सर्विसेस एग्जाम के साथ ही उन्होंने यूपीएससी के और भी बहुत से एग्जाम दिए हैं साथ ही एनडीए और एसएससी की भी कई परीक्षाएं दी हैं. यूपीएससी की विभिन्न परीक्षाएं देनें से उन्हें इस क्षेत्र के पेपर प्रारूप का अच्छा अंदाजा हो गया था. वे कहते हैं कि काफी एग्जाम देकर मैं समझ गया था कि यूपीएससी में किस प्रकार के प्रश्न ज्यादा आते हैं. कई परीक्षाओं में उनका चयन भी हुआ पर गंगा की मंजिल सीएसई पास करना था इसलिए वे लगातार इस ओर प्रयास करते रहे.

गंगा ने दो अटेम्प्ट्स दिए और दोनों में ही प्री परीक्षा पास कर ली. हालांकि उनकी रैंक आयी सेकेंड अटेम्प्ट में जब वे ऑल इंडिया रैंक 33 के साथ टॉपर बने.

नोट्स बनाएं और रोज पेपर पढ़ें –

गंगा कहते हैं कि पढ़ाई के लिए सबसे पहले तो सिलेबस देखें और उसी के हिसाब से अपने लिए सीमित सोर्स इकट्ठे करें. इसके बाद पढ़ाई शुरू करें और नोट्स जरूर बनाएं. वे कहते हैं कि नोट्स बनाने से अंत में रिवीजन करना आसान होता है इसलिए छोटे-छोटे नोट्स जरूर बनाएं. जहां तक करेंट अफेयर्स की बात है तो इसके लिए सालों पहले से रोजाना पेपर पढ़ने की आदत डालें. पेपर पढ़ते समय ध्यान रहे कि केवल अपने विषय की भी खबरों पर ध्यान दें. बाकी फालतू खबरों पर समय बर्बाद न करें. कुछ दिनों में आप पेपर जल्दी और चुनिंदा तरह से पढ़ना सीख जाएंगे.

अगली जरूरी चीज मानते हैं गंगा एनसीईआरटी की किताबों को और कहते हैं कि संभव हो तो क्लास 6 से 12 नहीं तो क्लास 8 से 12 तक की किताबें तो जरूर पढ़ें. उनका मानना है कि यूपीएससी में सीधे इन्हीं किताबों से प्रश्न आते हैं.

गंगा की सलाह –

गंगा कहते हैं कि हिंदी माध्यम में ऑथेंटिक मैटीरियल थोड़ा कम है इसलिए सावधानी से सेलेक्शन करें और हिंदी मीडियम के मैटीरियल के लिए इंटरनेट पर कम भरोसा करें. जब तैयारी एक स्तर तक पहुंच जाए तो मॉक टेस्ट जरूर दें. इससे आपको अपनी गलतियों का समय से पता चल जाता है और आप उन्हें समय रहते दूर कर पाते हैं. इनसे अभ्यास भी होता है और वीक एरियाज भी पता चलते हैं. इसके साथ ही पिछले साल के प्रश्न-पत्र हल करना भी परीक्षा पास करने में मदद करता है. टॉपर्स के इंटरव्यू देखें और उनके दिखाए रास्ते पर अपनी जरूरत के मुताबिक चलें. सही दिशा में कड़ी मेहनत करते हुए आगे बढ़ेंगे तो सफल जरूर होंगे और माध्यम कभी आपके रास्ते की बाधा नहीं बनेगा.

IAS Success Story: तीन प्रयास और तीनों में सफल श्वेता ने किस स्ट्रेटजी से बार-बार क्रैक किया UPSC एग्जाम, जानें यहां

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