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पहली से 5वीं कक्षा के बीच पता लग जाता है बच्चे भविष्य, ऐसे होती है पहचान

बच्चों की शुरुआती शिक्षा में उन पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जाता. इस दौरान उन्हें खेल, कहानी, ड्राइंग, म्यूजिक और अलग-अलग एक्टिविटी के माध्यम से सीखने पर जोर दिया जाता है.

Child Development: अक्सर माना जाता है कि बच्चे का भविष्य बोर्ड परीक्षा या करियर चुनने के समय तय होता है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों के जीवन की सबसे मजबूत नींव शुरुआती वर्षों में ही तैयार हो जाती है. पहली से पांचवीं कक्षा तक का समय केवल पढ़ने-लिखने और सीखने का नहीं होता, बल्कि इसी दौरान बच्चों की सोच, व्यवहार, सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और समस्या को समझने का तरीका विकसित होता है. यह वजह है कि शुरुआती शिक्षा को बच्चों के पूरे भविष्य की बुनियाद माना जाता है. चलिए अब आपको बताते हैं कि पहली से पांचवीं कक्षा के बीच ही बच्चे का भविष्य कैसे पता लग जाता है और इसकी पहचान कैसे होती है. 

पहले से पांचवीं तक क्या सीखता है बच्चा?

बच्चों की शुरुआती शिक्षा में उन पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जाता. इस दौरान उन्हें खेल, कहानी, ड्राइंग, म्यूजिक और अलग-अलग एक्टिविटी के माध्यम से सीखने पर जोर दिया जाता है. इस प्रक्रिया में बच्चा भाषा समझना, अपनी बात कहना, गिनती करना, अक्षरों की पहचान करना, ड्राइंग बनाना, ग्रुप में काम करना और अनुशासन जैसे बुनियादी बातें सिखाता है. इस समय बच्चों में पेंसिल पकड़ने, ध्यान लगाकर बैठने, सवाल पूछने और अपने विचार व्यक्त करने जैसी आदतें भी विकसित होती हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यही कौशल आगे चलकर पढ़ाई की गति और समझ को मजबूत बनाते हैं. 

यहीं से बनती है सोचने और समझने की क्षमता 

एक्सपर्ट्स के अनुसार शुरुआती शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती. इस दौरान बच्चों में समस्या का समाधान निकालने, नई चीजों को समझने, याद रखना और तर्क करने की क्षमता तेजी से विकसित होती है. पहेलियां, कहानी सुनना, चित्र बनाना और ग्रुप एक्टिविटी बच्चों की सोचने की क्षमता को मजबूत करती है. यही समय भाषा विकास का भी सबसे जरूरी दौर माना जाता है, जिन बच्चों को शुरुआती वर्षों में बातचीत, कहानी और पढ़ने का अच्छा माहौल मिलता है उनकी शब्दावली और संवाद क्षमता बेहतर होती है. आगे चलकर यही कौशल पढ़ाई और करियर दोनों में मददगार साबित होते हैं. 

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सामाजिक और इमोशनल विकास भी होता है मजबूत 

पहली से पांचवीं कक्षा के दौरान बच्चा केवल पढ़ाई नहीं सिखाता, बल्कि दूसरों के साथ रहना भी सीखता है. इस दौरान वह दोस्तों के साथ मिलकर काम करना, अपनी बारी का इंतजार करना, भावनाओं को समझना और शेयर करना जैसी सामाजिक आदतें विकसित करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है की इस उम्र में कॉन्फिडेंस और इंडिपेंडेंस की शुरुआत होती है. अगर बच्चे को प्रोत्साहन और सकारात्मक माहौल मिले तो वह नई समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार होता है और धीरे-धीरे डिसीजन लेने की क्षमता भी विकसित करता है. 

आगे की पढ़ाई और करियर पर भी पड़ता है असर

रिसर्च यह भी बताती है कि जिन बच्चों को शुरुआती वर्षों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है, वे आगे की पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. वे शुरुआत में जिन चीजों में रुचि लेते हैं आगे चलकर वह वैसा ही करियर भी चुनते हैं. इसके अलावा बचपन में ही बच्चों में पढ़ने-लिखने और गणित की समझ मजबूत होती है. साथ ही वह स्कूल के माहौल में जल्दी ढल जाते हैं और नई परिस्थितियों के साथ आसानी से तालमेल बिठा लेते हैं. एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करती है. यही आदत आगे चलकर उन्हें नहीं चीज सीखने, चुनौतियों का सामना करने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में भी मदद करती है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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