एक्सप्लोरर

हर 100 में 8 लड़कियां बीच में छोड़ रहीं पढ़ाई, डरा देंगे आंकड़े

अब लगभग सभी लड़कियां स्कूल में एडमिशन ले रही है और शुरुआती कक्षाओं तक पढ़ाई जारी रख रही है. हालांकि सेकेंडरी स्तर पर पहुंचते-पहुंचते बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ाई बीच में ही छोड़ रही है.

देश में बेटियों की स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई योजनाएं चलाई गई है और इसका असर प्राथमिक स्तर पर साफ दिखाई भी दे रहा है. अब लगभग सभी लड़कियां स्कूल में एडमिशन ले रही है और शुरुआती कक्षाओं तक पढ़ाई जारी रख रही है. हालांकि सेकेंडरी स्तर पर पहुंचते-पहुंचते बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ाई बीच में ही छोड़ रही है.

संसद में पेश किए गए शिक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में माध्यमिक स्तर पर हर 100 में से 8 लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ देती है. हालांकि पिछले तीन वर्षों की तुलना में यह स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि किशोरावस्था में सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक कारण अब भी लड़कियों की पढ़ाई में बड़ी बाधा बने हुए हैं. 

लोकसभा में पेश हुए यह आंकड़े 

लोकसभा में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के आंकड़े जारी किए हैं. उनके अनुसार वर्ष 2023-24 में सेकेंडरी स्तर पर लड़कियों का ड्रॉप आउट रेट 12.6 प्रतिशत था, जो 2024-25 में घटकर 9.6 प्रतिशत और 2025-26 में 8 प्रतिशत पर आ गया. इसके बावजूद माध्यमिक शिक्षा अब भी लड़कियों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है.

प्राथमिक से सेकेंडरी तक बदल जाती है तस्वीर 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक स्तर पर लड़कियों का ड्रॉप आउट रेट केवल 0.1 प्रतिशत है. उच्च प्राथमिक स्तर पर यह बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो जाता है, लेकिन कक्षा 9 और 10 तक पहुंचते-पहुंचते यह आंकड़ा 8 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. यानी प्राथमिक शिक्षा की तुलना में माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के स्कूल छोड़ने की संभावना कई गुना ज्यादा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि शुरुआती कक्षाओं तक परिवार बेटियों को पालने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन किशोरावस्था में प्रवेश के बाद परिस्थितियां बदल जाती है और कई छात्राओं की पढ़ाई बीच में ही रुक जाती है. 

क्यों छूट रही है लड़कियों की पढ़ाई?

शिक्षा मंत्रालय ने पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24 के आधार पर कई प्रमुख कारण बताए हैं. आर्थिक तंगी के कारण कई छात्राओं को परिवार की आय बढ़ाने में मदद करनी पड़ती है. कई लड़कियां घरेलू कामकाज और छोटे भाई-बहनों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालने लगती है. वहीं कुछ परिवारों में अभी भी यह सोच बनी हुई है कि बेटियों के लिए ज्यादा पढ़ाई जरूरी नहीं है. इसके अलावा माध्यमिक विद्यालयों की दूरी, सुरक्षित परिवहन की कमी, सामाजिक प्रबंधन, कम उम्र में शादी और लड़कियों की आवाजाही को लेकर परिवारों की चिंता भी पढ़ाई छोड़ने की बड़ी वजह बन रही है. 

ये भी पढ़ें-क्यों भारतीय युवा सरकारी नौकरियों के पीछे इतने पागल हैं?

इन राज्यों में सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट 

आंकड़ों के अनुसार सेकेंडरी स्तर पर लड़कियों का सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट रेट लद्दाख में 15.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है. इसके बाद असम और कर्नाटक में 13.9 प्रतिशत, गुजरात में 13.3 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में 12.4 प्रतिशत लड़कियां माध्यमिक शिक्षा पूरी नहीं कर पा रही है. इन राज्यों के आंकड़े यह भी बताते हैं कि समस्या केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि भौगोलिक परिस्थितियों, स्कूलों तक पहुंच, सामाजिक सोच और स्थानीय चुनौतियां भी बड़ी भूमिका निभाती है. 

लड़कियों के लिए स्कूलों में बढ़ी सुविधा 

सरकार के अनुसार देशभर के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में लगातार सुधार हुआ है. UDISE+ 2025-26 के अनुसार 95.4 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में अब लड़कियों के लिए अलग से कार्यरत शौचालय उपलब्ध है. इससे 9.5 लाख से ज्यादा स्कूलों को कवर किया जा चुका है. दिल्ली, गोवा और चंडीगढ़ में सभी सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध है, जबकि अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम अभी भी इस मामले में पीछे हैं. हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई केंद्रीय अध्ययन नहीं हुआ है, जिससे यह साबित हो कि केवल शौचालय की उपलब्धता से ही लड़कियों का ड्रॉप आउट कम हुआ है. 

ये भी पढ़ें-BPSC TRE-4  के 32388 पदों के लिए भेजा गया प्रस्ताव, नोटिफिकेशन जल्द

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI

कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

12वीं तक पढ़ाई पूरी करना लड़कियों के लिए अब भी चुनौती, रिपोर्ट में खुलासा
12वीं तक पढ़ाई पूरी करना लड़कियों के लिए अब भी चुनौती, रिपोर्ट में खुलासा
बंगाल मदरसा शिक्षक भर्ती के बदलेंगे नियम, एक ही आयोग से होगी भर्ती
बंगाल मदरसा शिक्षक भर्ती के बदलेंगे नियम, एक ही आयोग से होगी भर्ती
70 साल से ज्यादा उम्र के लोग दे रहे नीट, अब तय होगी एज लिमिट!
70 साल से ज्यादा उम्र के लोग दे रहे नीट, अब तय होगी एज लिमिट!
दिल्ली में 10वीं पास के लिए सरकारी नौकरी, सफाई कर्मचारी और सरकारी पदों पर भर्ती
दिल्ली में 10वीं पास के लिए सरकारी नौकरी, सफाई कर्मचारी और सरकारी पदों पर भर्ती
Advertisement

वीडियोज

CJP का 'चलो दिल्ली' मार्च...पूरी तरह फ्लॉप!
फसल तबाह...कौन देगा सहारा? महाराष्ट्र से राजस्थान...परेशान किसान
'वोट चोरी' पर सियासत...हल है हिरासत!
सख्ती का असर...'जंतर-मंतर 2.0' बेअसर!
SIR पर लड़ाई...मीर जाफर तक कैसे आई? बड़ा विश्लेषण
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'GenZ को वही सब बातें...', PM मोदी का पुराना ट्वीट शेयर कर शशि थरूर ने कसा तंज
'GenZ को वही सब बातें...', PM मोदी का पुराना ट्वीट शेयर कर शशि थरूर ने कसा तंज
1 साल तक नहीं..., अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को इस शर्त पर किया रिहा
1 साल तक नहीं..., अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को इस शर्त पर किया रिहा
TMC विधायक बिभास सरदार पर हमला, कार शीशे भी तोड़े, किस पर लगा आरोप?
TMC विधायक बिभास सरदार पर हमला, कार शीशे भी तोड़े, किस पर लगा आरोप?
'मैं कितना खुशकिस्मत हूं', रकुल प्रीत के बर्थडे पर पति जैकी भगनानी ने लुटाया प्यार
'मैं कितना खुशकिस्मत हूं', रकुल प्रीत के बर्थडे पर पति जैकी भगनानी ने लुटाया प्यार
'बांग्लादेश ने हमें डरा दिया...', क्रिस गेल ने क्यों कहा ऐसा
'बांग्लादेश ने हमें डरा दिया...', क्रिस गेल ने क्यों कहा ऐसा
ध्रुव राठी हिरासत से छूटे, CJP प्रोटेस्ट में जाएंगे तो एक्शन लेगी दिल्ली पुलिस
ध्रुव राठी हिरासत से छूटे, CJP प्रोटेस्ट में जाएंगे तो एक्शन लेगी दिल्ली पुलिस
सुबह उठकर अपनी गर्लफ्रेंड को कभी न करें ऐसे मैसेज, बिगड़ सकता है रिश्ता
सुबह उठकर अपनी गर्लफ्रेंड को कभी न करें ऐसे मैसेज, बिगड़ सकता है रिश्ता
Bluetooth हमेशा ऑन रखने से फोन पर क्या असर पड़ता है? जानें
Bluetooth हमेशा ऑन रखने से फोन पर क्या असर पड़ता है? जानें
Embed widget