DU ने सेंट स्टीफंस कॉलेज को नए प्रिंसिपल की नियुक्ति रोकने का निर्देश दिया, सुसान एलियास की नियुक्ति पर विवाद
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सेंट स्टीफंस कॉलेज को निर्देश दिया है कि वह नई प्रिंसिपल प्रोफेसर सुसान एलियास की नियुक्ति फिलहाल आगे न बढ़ाएं. आइए डिटेल्स जानते हैं.

- DU ने चयन समिति के गठन में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
- कॉलेज का दावा, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और वैध।
- यह डीयू और कॉलेज के बीच स्वायत्तता पर पुराना विवाद है।
सेंट स्टीफंस कॉलेज ने हाल ही में प्रोफेसर सुसान एलियास को अपना नया प्रिंसिपल घोषित किया था. यह कॉलेज के इतिहास में पहली बार था जब किसी महिला को यह जिम्मेदारी मिलने वाली थी. लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए इसे रोकने का निर्देश दिया है, जिससे दोनों संस्थानों के बीच एक नया विवाद शुरू हो गया है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने सेंट स्टीफंस कॉलेज को एक आधिकारिक पत्र भेजकर कहा है कि नई प्रिंसिपल की नियुक्ति को फिलहाल लागू न किया जाए.DU का कहना है कि जिस चयन समिति ने प्रोफेसर सुसान एलियास का चयन किया, उसका गठन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2018 के नियमों के अनुसार नहीं किया गया.
DU के अनुसार, किसी भी कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति के लिए चयन समिति में विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की भागीदारी जरूरी होती है. लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं की गई, इसलिए चयन को मान्य नहीं माना जा सकता.
सुसान एलियास कौन हैं?
प्रोफेसर सुसान एलियास एक कंप्यूटर साइंटिस्ट और अनुभवी अकादमिक प्रशासक हैं.उन्हें सेंट स्टीफंस कॉलेज का नया प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था और वे 1 जून 2026 से पद संभालने वाली थीं. वह मौजूदा प्रिंसिपल प्रोफेसर जॉन वर्गीस की जगह लेने वाली थीं. उनकी नियुक्ति को ऐतिहासिक माना जा रहा था क्योंकि यह पहली बार था जब कॉलेज ने किसी महिला को शीर्ष पद के लिए चुना था.
DU की आपत्ति
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपनी आपत्ति में कहा है कि चयन समिति का गठन नियमों के अनुसार नहीं हुआ. विश्वविद्यालय की ओर से नामित विशेषज्ञों को शामिल नहीं किया गया.साथ ही UGC के 2018 नियमों का पालन नहीं किया गया.इसलिए चयन समिति की सिफारिशें अमान्य हो सकती हैं. DU ने कॉलेज को साफ निर्देश दिया है कि जब तक प्रक्रिया दोबारा सही तरीके से नहीं होती, तब तक नई प्रिंसिपल की नियुक्ति आगे न बढ़ाई जाए.
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कॉलेज का पक्ष
सेंट स्टीफंस कॉलेज का कहना है कि पूरी चयन प्रक्रिया नियमों के अनुसार की गई है. कॉलेज प्रशासन के अनुसार प्रिंसिपल पद के लिए सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया. उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग की गई. इंटरव्यू और प्रस्तुतियां आयोजित की गईं. चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी. कॉलेज का दावा है कि नियुक्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है और यह पूरी तरह वैध है.
लंबे समय से चल रहा विवाद
यह मामला केवल एक नियुक्ति का नहीं है, बल्कि डीयू और सेंट स्टीफंस कॉलेज के बीच लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक विवादों का हिस्सा है. दोनों संस्थानों के बीच पहले भी प्रिंसिपल की नियुक्ति, कार्यकाल विस्तार और कॉलेज की स्वायत्तता को लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं. DU का कहना है कि भले ही कॉलेज एक अल्पसंख्यक संस्थान है, लेकिन उसे UGC नियमों का पालन करना अनिवार्य है. वहीं कॉलेज का तर्क है कि उसे अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में ज्यादा ऑटोनॉमी मिलनी चाहिए.
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