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दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार साल का कोर्स बना नई पहचान, ह्यूमैनिटीज के छात्र सबसे आगे

​दिल्ली यूनिवर्सिटी के चार वर्षीय स्नातक कोर्स को लेकर छात्रों में उत्साह बढ़ रहा है. सबसे ज्यादा भागीदारी ह्यूमैनिटीज के छात्रों की है, जो इसे रिसर्च और करियर दोनों के लिए फायदेमंद मान रहे हैं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में इस साल छात्रों के बीच एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. नई चार वर्षीय स्नातक डिग्री यानी फोर-ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) की शुरुआत के बाद अब बड़ी संख्या में छात्र चौथे वर्ष तक पढ़ाई जारी रख रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि इनमें सबसे ज्यादा संख्या ह्यूमैनिटीज यानी कला संकाय के छात्रों की है.

केंद्रीय और नामी कॉलेजों जैसे मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) और हिंदू कॉलेज में करीब 40 प्रतिशत छात्रों ने चौथा वर्ष जारी रखने का फैसला किया है. इनमें ज्यादातर छात्र राजनीति विज्ञान, इतिहास, मनोविज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषयों से हैं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार कुल मिलाकर लगभग 30 प्रतिशत अंडर ग्रेजुएट छात्रों ने चौथे वर्ष के लिए नामांकन किया है. हालांकि, यह आंकड़ा सभी कॉलेजों में समान नहीं है. केंद्रीय इलाकों में स्थित कॉलेजों में छात्रों की दिलचस्पी सबसे ज्यादा है, जबकि बाहरी इलाकों के कॉलेजों में यह संख्या 15 से 27 प्रतिशत के बीच है.

इन विषयों का बोलबाला 

विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस विषयों में छात्रों की भागीदारी सबसे अधिक है, जबकि साइंस कोर्सों में यह संख्या कम दिखाई दे रही है. कारण यह है कि साइंस के कई छात्र IITs या IISERs जैसे संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएशन करने चले जाते हैं, जहां उन्हें सीधे विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलता है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने हाल ही में कॉलेजों के साथ बैठक की थी ताकि यह समझा जा सके कि नया चार वर्षीय कोर्स कितना सुचारू रूप से लागू हो रहा है. कुछ कॉलेजों ने बताया कि कुछ विषयों में चौथे वर्ष के लिए बहुत कम छात्रों ने दाखिला लिया है, जिससे अकादमिक और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आ रही हैं. विश्वविद्यालय ने ऐसे मामलों में सलाह दी है कि कॉलेज क्लस्टर सिस्टम बनाएं, यानी समान विषय वाले छात्रों को अन्य कॉलेजों के छात्रों के साथ संयुक्त कक्षाएं लेने की सुविधा दी जाए.


ये है उम्मीद 

DU प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में छात्रों की भागीदारी और बढ़ेगी, जैसे-जैसे उन्हें इस कोर्स के लंबे समय के फायदे समझ में आएंगे. यह रुझान खासकर लोकप्रिय कॉलेजों में स्पष्ट रूप से दिख रहा है. मिरांडा हाउस में करीब 30 प्रतिशत छात्र चौथे वर्ष तक बने हुए हैं, हिंदू कॉलेज में लगभग 38 प्रतिशत और लेडी श्रीराम कॉलेज में लगभग 40 प्रतिशत छात्र चौथे वर्ष तक पढ़ाई जारी रख रहे हैं.

ऑफ-कैंपस कॉलेजों में यह संख्या काफी कम है. प्रिंसिपल्स का कहना है कि इसका कारण कॉलेज की प्रतिष्ठा, संसाधनों की उपलब्धता और केंद्र से दूरी है. हालांकि, कुछ प्रिंसिपल्स इसे एक सकारात्मक पहलू के रूप में भी देख रहे हैं. उनका कहना है कि छोटे बैच से उन्हें धीरे-धीरे इस नए सिस्टम को समझने और भविष्य में इसे बेहतर ढंग से लागू करने का मौका मिलेगा. वहीं, फैकल्टी मेंबर्स का कहना है कि जो छात्र चौथे वर्ष तक बने हुए हैं, वे मुख्य रूप से दो श्रेणियों में आते हैं. एक, जो अपने मनपसंद पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला नहीं पा सके और दूसरा, जो रिसर्च या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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