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UPI के 200 बिलियन ट्रांजैक्शन फिर भी कैश का क्रेज बरकरार, क्यों जेब में नकद रखना पसंद कर रहे हैं भारतीय?

UPI Payments: भारत अब वैसे तो डिजिटल भारत बन गया है, लेकिन फिर भी यहां के लोग कैश जेब में रखना पसंद कर रहे हैं. आइये जानते हैं आखिर ऐसा क्यों?

UPI Payments: भारत अब डिजिटल भारत के रूप में पहचान बना चुका है. लोग अब ज्यादा से ज्यादा डिजिटल पेमेंट्स करना पसंद करते हैं. हालांकि इसी बीच कैश की अहमियत भी कम नहीं हुई है. क्योंकि कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय लोग डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल तो कर ही रहे हैं लेकिन लोग जेब में नकदी रखना भी बहुत पसंद कर रहे हैं. आखिर ऐसा क्यों? आइये समझते हैं.

डिजिटल पेमेंट का रिकॉर्ड स्तर
डिजिटल पेमेंट का स्तर भारत में रिकॉर्ड पार कर रहा है. UPI ट्रांजैक्शन ने 200 अरब का आंकड़ा पार कर लिया है. छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक हर जगह ऑनलाइन पेमेंट का बोलबाला है. इसी बीच कुछ नए आंकड़े सामने आए हैं जिनमें बताया जा रहा है कि UPI पेमेंट्स के बावजूद भी लोग जेब में कैश रखना काफी पसंद कर रहे हैं. RBI के आंकड़ों की मानें तो खुदरा डिजिटल पेमेंट में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ा है.

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जेब में नकदी रखना पसंद कर रहे लोग
दरअसल RBI की ताजा रिपोर्ट की मानें तो वित्त वर्ष 2026 में बाजार में मौजूद नकदी का सर्कुलेशन 11.4% बढ़ गया. पिछले साल ये बढ़ोतरी सिर्फ 5.8 प्रतिशत थी. इससे साफ है कि डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद कैश की जरूरत खत्म नहीं हुई है.

इसे लेकर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अब लोग कैश और डिजिटल पेमेंट दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन अलग- अलग जरूरतों के लिए. हर रोज के छोटे-मोटे खर्च के लिए और सरकारी योजनाओं से मिलने वाली रकम के लिए अभी भी कैश का इस्तेमाल होता है. कई राज्यों में सरकारी सहायता योजनाएं, फसल नुकसान का मुआवजा और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं ने भी नकदी की मांग बढ़ाई है. इसके अलावा टैक्स में राहत और GST के बाद बढ़े उपभोक्ता खर्च ने भी बाजार में कैश फ्लो बढ़ाया.

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सोने की खरीदारी के लिए कैश
दिन पर दिन सोने और चांदी की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, इसके बावजूद भी लोग लगातार इन्हें खरीद रहे हैं. सोने- चांदी को लोग निवेश के रूप में देख रहे हैं. RBI के मुताबिक, सोने का आयात कम मात्रा में हुआ, लेकिन महंगी कीमतों की वजह से उसकी कुल वैल्यू बढ़ गई. बड़ी खरीदारी में नकदी का इस्तेमाल होने से कैश की मांग बढ़ी है.

बता दें कि भारत पूरी तरह कैशलेस नहीं बन रहा है. शहरों में डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन गांवों और छोटे बाजारों में नकदी अब भी ज्यादा इस्तेमाल होती है. लोग सुविधा के लिए डिजिटल पेमेंट और सुरक्षा के लिए नकदी दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

प्रतीक्षा राणावत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 12 वर्षों का अनुभव है. इन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मल्टीमीडिया (B.Sc - Multimedia) में ग्रेजुएशन किया है और इसके बाद जन संचार (Mass Communication) में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है. अपने करियर की शुरुआत इन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, लेकिन समय के साथ लेखन में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई. वर्तमान में प्रतीक्षा बिजनेस से जुड़े विषयों के लिए लेखन करती हैं. इसके साथ- साथ ही इन्हें ट्रैवलिंग, नई चीज़ों को एक्सप्लोर करना और किताबें पढ़ने का भी शौक है.

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