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Explainer: क्या दुनिया में आर्थिक मंदी आने वाली है? महंगाई के डर से कंपनियों की छंटनी तक- जानें क्या हैं बड़े संकेत

दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में वैश्विक आर्थिक मंदी का डर दिखाई दे रहा है और कई देशों के सेंट्रल बैंक इसकी आहट के बीच कड़े फैसले ले रहे हैं. इसका असर आप पर भी आ रहा है, जानें क्या हैं मंदी के संकेत.

Recession Fear: क्या दुनिया में मंदी आने वाली है ? बीते कुछ महीनों में महंगाई बेतहाशा बढ़ गई है. पेट्रोल डीजल के दाम से लेकर खाने पीने की चीजों के दाम देखें या फिर कुछ और, महंगाई अपने चरम पर जाती दिख रही है. हालांकि ये सवाल उठ रहा है कि क्या आर्थिक मंदी के लिए सिर्फ महंगाई ही जिम्मेदार है ? ऐसा नहीं है तो फिर मंदी का सवाल क्यों उठ रहा है, ये यहां समझने की कोशिश की जा रही है. 

आर्थिक मंदी क्या होती है?
जब अर्थव्यवस्था में लगातार कुछ समय तक विकास थम जाता है, रोजगार कम हो जाता है, महंगाई बढ़ने लगती है और लोगों की आमदनी घटने लगती है तो इसे आर्थिक मंदी कहा जाता है. पूरी दुनिया में 4 बार आर्थिक मंदी आ चुकी है. पहली बार 1975 में, दूसरी बार 1982 में, तीसरी बार 1991 में और और चौथी बार 2008 में आर्थिक मंदी आई थी.  अब पांचवीं बार इसकी आशंका जताई जा रही है.

World Bank ने कहा- देशों को आर्थिक मंदी की तैयारी कर लेनी चाहिए
World Bank की तरफ से कहा गया है कि इस साल के अंत तक दुनिया की आर्थिक प्रगति कम होने की आशंका है, इसलिए ज्यादातर देशों को आर्थिक मंदी की तैयारी कर लेनी चाहिए. पूरी दुनिया ज्यादा महंगाई और कम विकास दर से जूझ रही है, जिसकी वजह से 1970 के दशक जैसी मंदी आ सकती है. दुनिया भर में इसका असर दिखने भी लगा है.

आर्थिक मंदी की आशंका का असर कहां दिखने लगा है
गूगल की पैरेंट कंपनी एल्फाबेट ने कहा है कि वो इस साल के बचे हुए महीनों में भर्ती की प्रक्रिया को धीमा करेगी. ऐसा आने वाले महीनों में संभावित मंदी को देखते हुए किया जा रहा है. कंपनी को भेजे एक ईमेल में सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा है कि 2022-23 में कंपनी का फोकस सिर्फ इंजीनियरिंग, तकनीकी विशेषज्ञ और महत्वपूर्ण पदों पर बहाली करने पर होगा.2008-09 में जब आर्थिक मंदी आई थी, तो भी गूगल ने अपनी भर्ती प्रक्रिया रोक दी थी. 

Google के अलावा ये दिग्गज कंपनियां भी कर रही हैं भर्तियों में कटौती
जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ गूगल ही नहीं बल्कि फेसबुक भी 2022 में 10 हजार के टारगेट के बजाए सिर्फ 6 हजार से 7 हजार नए इंजीनियर की भर्ती करेगा. 2022-23 में संभावित मंदी को देखते हुए माइक्रोसॉफ्ट ने भी भर्तियों में कटौती का फैसला किया है. 

दुनिया में मंदी के हालात क्यों लग रहे हैं, संकेत हैं यहां
अमेरिका में महंगाई दर 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है जो पिछले 40 सालों में सबसे ज्यादा है. युनाइटेड किंगडम में भी महंगाई 40 साल में सबसे ज्यादा 9.1 फीसदी तक पहुंच गई है. यूरोपियन यूनियन में भी महंगाई दर 7.6 फीसदी तक पहुंच गई है. दुनिया में इस वक्त साढ़े 20 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने की आशंका है. दुनिया में कोविड शुरू होने से पहले 2019 में 18 करोड़ 70 लाख लोग बेरोजगार थे. यानी संकेत साफ हैं कि कई देशों में महंगाई और बेरोजगारी दोनों बढ़ रही हैं.

दुनिया में क्यों आई मंदी की नौबत?

पहला कारण- 2020 में जब कोविड आया तो पूरी दुनिया में लॉकडाउन हो गया, जिसकी वजह से अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर रुक गई. लॉकडाउन की वजह से करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए. लॉकडाउन खुला तो चीन की ओर से भेजे जाने वाले सामानों की सप्लाई चेन में रुकावट आ गई. सप्लाई कम हुई, तो दुनियाभर में चीजों की डिमांड बढ़ गई, जिसकी वजह से महंगाई बढ़ी है. 

अन्य कारण
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस ने हमला कर दिया जिससे दुनियाभर में खाने के सामान और तेल की सप्लाई चेन पर असर हुआ. कच्चा तेल महंगा हुआ तो इसका भी सीधा असर महंगाई पर देखने को मिला है. अब महंगाई से निपटने के लिए दुनिया के केन्द्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि कर रहे हैं और बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाईं तो शेयर मार्केट से विदेशी निवेशकों ने पैसे निकाल लिए है. विदेशी निवेशकों ने पैसे निकाले तो सीधा असर उस देश की करेंसी पर आया जैसे भारत का रुपया लगातार गिर रहा है.

दुनिया में मंदी की नौबत का सीधा संबंध देखें तो ये कोविड-लॉकडाउन-इकॉनमी की रफ्तार रुकी-बेरोजगारी बढ़ी-सप्लाई चेन रुकी-डिमांड बढ़ी-महंगाई बढ़ गई. इस तरह से ये एक चक्रीय चेन बन गई और इसकी चपेट में दुनिया के कई देश आते दिख रहे हैं. 

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