Budget 2025: क्या इस साल रियल एस्टेट को मिल जाएगा 'इंडस्ट्री' का दर्जा? पढ़ें बजट से इस सेक्टर को क्या उम्मीदें
Union Budget 2025: रियल एस्टेट सेक्टर की लंबे समय से मांग है कि इसे भी उद्योग का दर्जा दिया जाए. इसी के साथ होम लोन पर टैक्स छूट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की भी मांग है.

1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए बजट पेश करने वाली हैं. इससे देश के रियल एस्टेट सेक्टर को बहुत उम्मीदें हैं ताकि विकास के नए रास्ते भी खुले और लंबे समय से आ रही चुनौतियों का भी समाधान हो सके. इस सेक्टर के कई बड़े लीडर्स ने रियल एस्टेट में ट्रांसफॉर्मेशन की उम्मीदें जताई हैं ताकि देश के आर्थिक विकास और हाउसिंग फॉर ऑल के सरकार के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाया जा सके.
रियल एस्टेट सेक्टर को बजट से उम्मीदें
इसके अलावा, रियल एस्टेट सेक्टर की लंबे समय से मांग है कि इसे भी उद्योग का दर्जा दिया जाए. इसी के साथ होम लोन पर टैक्स छूट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की भी मांग है, जिससे घर खरीदने वालों को राहत मिल सके. देश के बड़े शहरों में बढ़ती कीमतों का ध्यान रखते हुए किफायती आवास की परिभाषा बदलने की भी मांग की गई है ताकि सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके. रियल एस्टेट सेक्टर की मांग स्टाम्प ड्यूटी में कटौती करने की भी है.
इन सेगमेंट में बढ़ रही घरों की मांग
सीबीआरई के भारत दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के चेयरमैन और सीईओ अंशुमान मैगजीन ने कहा, रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट मजबूत बुनियाद के आधार पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस स्पीड के आगे भी बने रहने की उम्मीद है. आने वाले समय में नई आवासीय यूनिट्स की पेशकश और बिक्री दोनों स्थिर रहेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि नोएडा, बेंगलुरु, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों में लग्जरी व प्रीमियम सेगमेंट में घरों की मांग बढ़ रही है.
वहीं मार्केट एक्सपर्टस पहले ही मौजूदा डेटा के आधार पर रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीद लगा चुके हैं. खासकर लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की डिमांड और भी बढ़ सकती है. 2024 में भी सबसे ज्यादा हलचल प्रीमियम या लग्जरी सेगमेंट में ही देखा गया. इस दौरान बेंगलुरू, गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में 10 से 80 करोड़ के बजट वाले प्रीमियम प्रॉपर्टी की अधिक बिक्री हुई. इसी दौरान दिल्ली-एनसीआर में भी जितनी भी प्रॉपर्टी बिकी उनमें 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी 1 करोड़ यानी 10 मिलियन रुपये से ज्यादा कीमत की रही.
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Source: IOCL





















