सावधान! अब 10000 से ऊपर के डिजिटल पेमेंट में लगेगा 1 घंटे का 'होल्ड', RBI लाया नया नियम
RBI Digital Payment: RBI ने 10000 से ज्यादा के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर फ्रॉड रोकने के लिए 1 घंटे का टाइम लैग और कैंसिल करने का ऑप्शन देने का प्रस्ताव रखा है, जिससे यूज़र्स को सोचने का समय मिल सके.

- RBI ने ₹10,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन के लिए नए सुरक्षा नियम सुझाए।
- नए खाते में ₹10,000+ भेजने पर 1 घंटे का समय अंतराल होगा।
- ₹10,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन में धोखाधड़ी के मामले अधिक पाए गए।
- मर्चेंट भुगतान पर नियम लागू नहीं, व्हाइटलिस्टिंग से मिलेगी राहत।
RBI Digital Payment Rule: ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कुछ सख्त कदम उठा रहा है. RBI ने डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए 10,000 हजार से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर नए सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव रखा है. प्रस्ताव खासतौर पर Authorised Push Payments (APP) से जुड़े बढ़ते फ्रॉड को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसके तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए गए हैं, जो आम यूज़र्स की सुरक्षा को मजबूत करेंगे.
सबसे अहम बदलाव यह है कि अगर कोई ग्राहक 10,000 से ज्यादा की रकम किसी नए व्यक्ति या अकाउंट में ट्रांसफर करता है तो उस पर 1 घंटे का अनिवार्य समय अंतराल (time lag) लगाया जा सकता है. यानी पैसा तुरंत ट्रांसफर नहीं होगा, बल्कि एक घंटे तक रुका रहेगा. इस दौरान ग्राहक को ट्रांजैक्शन को कैंसल करने का पूरा ऑप्शन मिलेगा, जिससे अगर उसे किसी तरह का शक हो या गलती का एहसास हो तो वह पैसे को जाने से रोक सकता है.
10,000 से ज्यादा ट्रांजैक्शन में ज्यादा फ्रॉड, बैंक करेगा अलर्ट
RBI के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़े बताते हैं कि ₹10,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड मामलों का लगभग 45 प्रतिशत होते हैं, लेकिन रकम के हिसाब से इनका हिस्सा करीब 98.5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. इसी कारण इस श्रेणी पर खास ध्यान दिया गया है. इसके अलावा अगर कोई ट्रांजैक्शन संदिग्ध लगता है तो बैंक ग्राहक से दोबारा कन्फर्म कर सकता है और उसे संभावित धोखाधड़ी के बारे में अलर्ट भी करेगा, इससे धोखाधड़ी के मामले कम हो सकते हैं.
मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लागू, व्हाइटलिस्ट से मिलेगी राहत
हालांकि, यह नियम मर्चेंट पेमेंट (जैसे UPI से खरीदारी), ई-मैंडेट और चेक से होने वाले भुगतानों पर लागू नहीं होगा. ग्राहकों की सुविधा के लिए ‘व्हाइटलिस्टिंग’ का ऑप्शन भी दिया जाएगा, जिससे वे भरोसेमंद लोगों या खातों को पहले से मंजूरी देकर इस देरी से बच सकते हैं. RBI ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए यह जरूरी कदम उठा रही है.
Source: IOCL

























