पेट्रोल-डीजल का असर, अब महंगा होगा सफर, जानें कितना बढे़गा बस का किराया और ढुलाई दर का भाड़ा
Transportation Hike: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने अब आम जनता की जेब पर एक और बड़ा बोझ डाल दिया है. अब चार धाम यात्रा, तीर्थ स्थल और घूमना-फिरना भी महंगा हो सकता है.

Transportation Hike: पेट्रोल और डीजल दोनों की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है. और अब इसकी चपेट में चार धाम यात्रा, तीर्थ स्थल और हिल स्टेशन वाले सफर भी आ गए हैं. यात्री को अब करीब 20 प्रतिशत ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है. दरहसल ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष हरिश सबरवाल ने एबीपी न्यूज से विशेष बातचीत में साफ कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से बस किराए में 20 प्रतिशत और ट्रकों की ढुलाई दरों में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हम मजबूरन करनी पड़ेगी.
बस किराया होगा कितना महंगा?
उन्होंने आगे कहा 'हमारी ऑपरेशनल कॉस्ट का 60 से 70 प्रतिशत सिर्फ ईंधन पर खर्च होता है. ये स्लो पॉइजन की तरह काम कर रहा है.' इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए बताया, 'जब कच्चा तेल सस्ता था तब फायदा आम आदमी और किसानों तक नहीं पहुंचाया गया. अब महंगाई के समय पूरा बोझ ट्रांसपोर्टरों पर डाला जा रहा है.' सबरवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तुरंत राहत नहीं दी गई तो एक-दो हफ्ते में सड़कों से बड़ी संख्या में ट्रक और बस गायब हो जाएंगे. 'कोरोना काल में टोल टैक्स माफ किया था, वैसे ही अभी तुरंत टोल बंद कर दो. नहीं तो मजबूरन हमें भाड़ा बढ़ाना पड़ेगा और इसकी पूरी मार आम जनता पर पड़ेगी.'
आम आदमी की बढ़ीं मुश्किलें, 10 दिनों में 7 रुपये से अधिक महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल
बस मालिकों की मांग क्या है?
एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से दो बड़ी मांगें की हैं पहला बस-ट्रकों पर टोल टैक्स माफ किया जाए और दूसरा पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के सदस्य बिजेंद्र सिंह ने कहा, 'ट्रांसपोर्टर अपनी जेब से तो नहीं भरेंगे. रेट बढ़ाना ही पड़ेगा और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर जाएगा. सरकार पहले अपने राज्यों में टैक्स घटाकर दिखाए.'
दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन के सेक्रेटरी विजय विरमानी ने एबीपी न्यूज को बताया कि अब लागत सहने की कोई गुंजाइश नहीं बची है. “पेट्रोल-डीजल के साथ यूरिया और स्पेयर पार्ट्स भी महंगे हो रहे हैं. भाड़ा बढ़ाना ही हमारे पास एकमात्र रास्ता बचा है.”
ट्रकों पर सबसे ज्यादा मार
ट्रकों की ढुलाई दर 25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है क्योंकि वे लंबी दूरी तय करते हैं, दो ड्राइवर चलाते हैं और माल लदा रहता है. गुरमीनत सिंह टोनी जो एक ओपरेटर है उन्होंने बड़े हुए पेट्रो और डीजल के दामों को 'स्लो पॉइजन' बताते हुए कहा, 'ड्राइवर तनख्वाह बढ़ाने की मांग करेगा क्योंकि उसका घरेलू खर्च बढ़ गया है. फिर बोझ हमारे सिर आएगा. हम भाड़ा बढ़ाते हैं तो बदनाम हम होते हैं.' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधी अपील की कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाया जाए.
वहीं दिल्ली बस एसोसिएशन के वर्किंग प्रेसिडेंट सोम लुथरा ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए कहा, 'बद्रीनाथ, केदारनाथ, शिमला-मनाली की बस बुकिंग पहले से हो चुकी है. अब कॉस्ट बढ़ेगी तो कम से कम 20 प्रतिशत किराया हमको भी बढ़ाना पड़ेगा. हम इतना कहां से खर्च उठाएं?'
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाया तो न सिर्फ यात्रा महंगी होगी, बल्कि पूरे अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ेगा. आम जनता पहले ही महंगाई से परेशान है, और अब सड़क सफर भी उसके लिए सिरदर्द बन सकता है.
टोल टैक्स होगा माफ?
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि बस और ट्रकों के लिए टोल टैक्स माफ किया जाए और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए ताकि दाम कम हो सकें. ट्रांसपोर्टरों ने साफ कहा है कि अगर सरकार राहत देती है तो किराए और ढुलाई दरों में होने वाली बढ़ोतरी को रोका जा सकता.























