अवैध फंड को वैध करने के लिए अब अगर खरीद रहें खेती वाली जमीन तो हो जाएं सावधान!
किसी व्यक्ति किसान के साथ 10 करोड़ बाजार भाव की एग्रीकल्चर जमीन का सौदा करता है. इसे डॉक्यूमेंटेशन में सिर्फ 2 करोड़ रुपये ही दिखाया जाता है. ऐसी स्थिति में आठ करोड़ रुपये अलग से दिया जा रहा है.

Income Tax Appellate Tribunal on Farm Land: अगर आप अपने उन पैसे को वैध करने की कोशिश कर रहे हैं जिसका लेखा-जोखा सरकार की नजर में नहीं है या फिर कानूनी रूप से वैध नहीं तो और इसके लिए आप खेती की जमीन खरीद रहे हैं, तो फिर ऐसा करने से पहले अब सावधान हो जाएं. क्योंकि अब ऐसे लोगों पर कर विभाग की पैनी नजर है. टैक्स अथॉरिटीज की तरफ से अब ऐसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो खेती वाली जमीन में पैसे लगा रहे हैं. इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) का हाल में आया फैसला ऐसे लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है.
आईटीएटी एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था है, जो अपीलीय मामलों की सुनवाई करती है. ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईटीएटी का फैसला एग्रीकल्चर जमीन खरीदने वालों पर असर डालेगा.
एग्रीकल्चर जमीन पर आईटीएटी का फैसला
उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि कोई व्यक्ति किसान से 10 करोड़ रुपये के बाजार भाव की एग्रीकल्चर जमीन का सौदा करता है. इसके डॉक्यूमेंटेशन में सिर्फ 2 करोड़ रुपये ही दिखाया जाता है. ऐसी स्थिति में आठ करोड़ रुपये अलग से दिया जा रहा है. इस केस में विक्रेता किसान आयकर अथॉरिटीज की तरफ मॉनिटरिंग से फ्री रहता है. आयकर विभाग की तरफ से एग्रीकल्चर लैंड को पूंजीगत संपत्ति नहीं मानी जाती है. ऐसे में इसकी बिक्री से हुई कमाई पर कोई पूंजीगत टैक्स नहीं लगता है.
लेकिन इस जमीन को दोबारा जब 10 करोड़ की वैल्यू पर बैंकिंग के चैनल से बेची जाएगी तो शुरुआत में इस जमीन के खरीदार से 8 करोड़ के छिपे हुए फंड का खुलासा करने के बारे में पूछा जा सकता है.
अब ऐसा करने वालों की खैर नहीं!
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्षों तक व्यक्तिगत प्रभावी लोग जैसे बाबू, उद्यमी, राजनीतिक हस्तियों से लेकर मनोरंजन जगत के सितारे तक इस तरह के कम पैसे में खेती वाली जमीन खरीदते रहे हैं और उसके बाद उसे ऊंची बाजार कीमत पर बेचकर अपने पैसे को वैध करने का काम करते रहे हैं.
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एग्रीकल्चर वाली जमीन को खास दर्जा मिला हुआ है. एक तरफ जहां शहर में खरीदार को बाजार की कीमत और ट्रांजेक्शन वैल्यू के अंतर पर टैक्स देना होता है तो वहीं दूसरी तरफ एग्रीकल्चर लैंड में ऐसा कोई टैक्स का प्रावधान नहीं है. अहमदाबाद की इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने एक तरफ जहां एग्रीकल्चर लैंड को कैपिटल गैन मानने से छूट दी है तो वहीं 10 करोड़ की संपत्ति को 2 करोड़ में बेचने जैसे मामलों पर चिंता जताई है.
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