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रक्षा बजट: 10 साल में 2.5 गुणा बढ़ोतरी, वैश्विक हालात के बीच ‘मिलिट्री ड्रीम' बड़ी चुनौती, जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट

Defence Budget: डिफेंस एक्सपर्ट और रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी का कहना है कि रक्षा बजट पर चर्चा करते समय देश की सुरक्षा सर्वोपरि होती है। उन्होंने कहा कि भारत इस समय चारों ओर से चुनौतियों से घिरा है.

Defence Budget 2026-27: पूरे देश की निगाह इस समय 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हुई है. हालांकि, मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे भारत के लिए रक्षा क्षेत्र एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. आज लगभग हर देश अपने रक्षा बजट में भारी इजाफा कर रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2027 के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 13.48 लाख करोड़ रुपये) के रक्षा बजट का ऐलान किया है, जो कई देशों की कुल जीडीपी से भी अधिक है. यह अमेरिका के रक्षा खर्च में करीब 500 अरब डॉलर की बढ़ोतरी को दर्शाता है. यह वृद्धि भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त रक्षा बजट (2026 में अनुमानित 473 अरब डॉलर) से भी अधिक है.

2025-26 में प्रमुख देशों का रक्षा बजट

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चीन ने अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा करते हुए इसे 245 अरब डॉलर कर दिया. वहीं भारत का रक्षा बजट 81 अरब डॉलर (करीब 6.81 लाख करोड़ रुपये) रहा. इसी अवधि में जापान का रक्षा बजट 58 अरब डॉलर, ऑस्ट्रेलिया का 44 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया का 45 अरब डॉलर रहा.


रक्षा बजट: 10 साल में 2.5 गुणा बढ़ोतरी, वैश्विक हालात के बीच ‘मिलिट्री ड्रीम' बड़ी चुनौती, जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और चीन के बढ़ते सैन्य खर्च को देखते हुए भारत के रक्षा बजट में भी आगामी बजट में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है.

पिछले 10 वर्षों में ढाई गुना बढ़ा रक्षा बजट

पिछले एक दशक में भारत के रक्षा बजट में करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 6.6 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट आवंटित किया था, जिसमें से 1.8 लाख करोड़ रुपये सेना के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित थे. यह देश की जीडीपी का लगभग 1.9 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9.5 प्रतिशत अधिक था.

वित्त वर्ष लाख करोड़ (रुपये में) जीडीपी का कितना % इजाफा
2025-26 6.81  1.9
2024-25 6.21 1.89
2023-24 5.93 1.97
2022-23 5.25 2.21
2021-22 4.78 2.66
2020-21 4.71 2.88
2019-20 4.31 2.52
2018-19 4.04 2.42
2017-18 3.59 2.51

बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • 2024-25: 6.21 लाख करोड़ रुपये
  • 2023-24: 5.93 लाख करोड़ रुपये
  • 2022-23: 5.25 लाख करोड़ रुपये
  • 2021-22: 4.78 लाख करोड़ रुपये
  • 2020-21: 4.71 लाख करोड़ रुपये
  • 2019-20: 4.31 लाख करोड़ रुपये
  • 2018-19: 4.04 लाख करोड़ रुपये
  • 2017-18: 3.59 लाख करोड़ रुपये

एक्सपर्ट की राय: रक्षा आत्मनिर्भरता पर जोर जरूरी

डिफेंस एक्सपर्ट और रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी का कहना है कि रक्षा बजट पर चर्चा करते समय देश की सुरक्षा सर्वोपरि होती है. उन्होंने कहा कि भारत इस समय चारों ओर से चुनौतियों से घिरा है, जिसमें चीन-पाकिस्तान का गठजोड़, बांग्लादेश की स्थिति और दक्षिण चीन सागर में बढ़ता तनाव शामिल है.

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका, ईरान और वेनेजुएला जैसे क्षेत्रों में भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं, जिससे भारत की रक्षा जरूरतें और बढ़ेंगी. ऐसे में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है.


रक्षा बजट: 10 साल में 2.5 गुणा बढ़ोतरी, वैश्विक हालात के बीच ‘मिलिट्री ड्रीम' बड़ी चुनौती, जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट

बख्शी के अनुसार, आधुनिक युद्ध के लिए टैंक, लड़ाकू विमान, इंजन, मिसाइल और गोला-बारूद जैसे अत्याधुनिक हथियारों का स्वदेशी उत्पादन जरूरी है. इसके साथ ही रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च बढ़ाने की आवश्यकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को रक्षा पर खर्च जीडीपी के 3.5 से 5 प्रतिशत तक बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, जैसा कि कई विकसित देश कर रहे हैं.

मजबूत डिफेंस मतलब मजबूत डिफेंस पॉलिसी

डिफेंस एक्सपर्ट और रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी का कहना है कि जिस देश की रक्षा व्यवस्था कमजोर होती है, उसकी विदेश नीति भी कमजोर रहती है. उन्होंने कहा कि कोई भी देश जितना सैन्य रूप से मजबूत होता है, उसकी फॉरेन पॉलिसी उतनी ही प्रभावशाली और आत्मविश्वास से भरी होती है.

उदाहरण देते हुए उन्होंने चीन का जिक्र किया और कहा कि पिछले 25 वर्षों में चीन ने रक्षा क्षेत्र में जिस तेजी से प्रगति की है, उसी का नतीजा है कि आज उसकी विदेश नीति बेहद आक्रामक और मजबूत नजर आती है.

बख्शी ने स्पष्ट किया कि भारत किसी देश की नकल नहीं कर रहा है, लेकिन यह एक स्थापित तथ्य है कि जो देश अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा रक्षा बजट पर खर्च करते हैं, वे रणनीतिक रूप से ज्यादा सशक्त होते हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिस देश का डिफेंस कमजोर होगा, उसकी विदेश नीति भी कमजोर रहेगी और ऐसा देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं होता.

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राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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