क्या बढ़ेगी तेल की सप्लाई और कम होगी कीमत? जानें वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन का भारत पर असर
Venezuela Crude Oil: अमेरिका के सैन्य हमले के बाद सालों से प्रतिबंधों की जंजीरों से निकलकर वेनेजुएला से तेल की ग्लोबल सप्लाई भी बढ़ेगी. इससे भारत जैसे देश को सस्ते में क्रूड ऑयल मिलने की उम्मीद है.

Venezuela Crude Oil: वेनेजुएला पर कब्जा जमाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिससे भारत को राहत मिलने की उम्मीद है. बीते मंगलवार को ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल हाई-क्वालिटी तेल सप्लाई करेगी, जिस पर अभी तक बैन लगा हुआ है.
यह तेल मार्केट प्राइस पर बेचा जाएगा और इससे होने वाली कमाई अमेरिका के पास रहेगी. इन पैसों का इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका में रह रहे लोगों के फायदे के लिए किया जाएगा. ट्रंप के बस इतना कहने के बाद ही अमेरिका में तेल की कीमत लगभग 1 डालर प्रति बैरल गिरकर 0.65 डालर के आसपास आ गई.
क्या पटरी पर लौटेगी वेनेजुएला की इकोनॉमी?
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला में अमेरिका के चलाए गए सैन्य ऑपरेशन के बाद अब वहां अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश करेंगी. इससे वहां की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा. सालों से प्रतिबंधों की जंजीरों से निकलकर वेनेजुएला से तेल की ग्लोबल सप्लाई भी बढ़ेगी. इससे भारत सहित दुनिया के तमाम देशों को सस्ता क्रूड ऑयल मिलेगा.
अमेरिका ने सबसे पहले साल 2005 में वेनेजुएला के तेल पर प्रतिबंध लगाया. बाद में 2017 और 2019 में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के दौर में इसमें और सख्ती लाई गई. अगर वाकई में आने वाले समय में वेनेजुएला में अमेरिका की अगुवाई में एक स्थिर सरकार बनती है, तो इससे वहां की टूटी हुई अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी.
ट्रंप पर क्या है आरोप?
ट्रंप प्रशासन पर लंबे समय से वेनेजुएला के तेल के भंडार पर नजर रहने के आरोप लगते रहे हैं. वहां के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरौ भी बार-बार ट्रंप पर यही आरोप लगाते रहे हैं कि ट्रंप उन्हें सत्ता से बेदखल कर वहां तेल के भंडार पर अपना कंट्रोल चाहते हैं.
आपको बता दें कि भारत से 15 हजार किलोमीटर दूर वेनेजुएला के पास 300 अरब बैरल से भी ज्यादा तेल का भंडार होने का अनुमान है, जो दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा है. सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला में कोयला, एल्यूमीनियम, निकेल, मैंगनीज, कॉपर, इस्ताप और जिंक जैसे खनिजों का भी अथाह भंडार है.
भारत को क्या होगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का 85 परसेंट तेल दूसरे देशों से आयात करता है और वेनेजुएला के पास कच्चे तेल का सबसे बड़ा भंडार है. अगर वेनेजुएला में अमेरिका समर्थित सरकार बनती है, तो वहां की तेल कंपनियों और टैंकरों पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटेंगे. इससे बड़ी मात्रा में वेनेजुएला से क्रूड ऑयल की सप्लाई भारत में भी होने की उम्मीद है और वह भी कम कीमत पर. इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत कम होगी.
फरवरी 2021 के बाद पहली बार भारत का कच्चा तेल भंडार 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया. इससे रूस की तरह डिस्काउंटेड रेट पर अगर वेनेजुएला से कच्चे तेल की सप्लाई होने लगी, तो इससे भारत को मदद मिलेगी. कच्चे तेल की कीमतों में 1 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट से तेल के आयात पर भारत का सालाना बिल लगभग 13,000 करोड़ रुपये कम हो जाएगा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसी संभावना है कि जून तक कच्चे तेल की कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी कम हो सकती हैं. इससे भारत को अपना आयात बिल कम करने में मदद मिलेगी. देश की सेविंग्स होगी, तो वे पैसे दूसरे विकास कार्यों में लगाए जाएंगे, जिससे देश और देश की जनता को फायदा पहुंचेगा.
एक्सपर्ट की क्या है राय?
देश में तेल की कीमतें वाकई में कितनी कम होंगी इस पर एबीपी लाइव की IIMC के प्रोफेसर और मार्केट के जानकार शिवाजी सरकार से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, अभी यह कहना बेहद जल्दबाजी होगा कि वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का कंट्रोल हो जाने से का भारत को फायदा होगा या नहीं. अमेरिका अभी जिस तरह से दुनिया के तमाम देशों को अपने दबाव में ले रहा है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत को तेल वहीं से खरीदना पड़ेगा जहां से अमेरिका चाहेगा. वेनेजुएला से भारत के लिए तेल की सप्लाई भी अमेरिका की ही मर्जी पर है.
उन्होंने आगे कहा, ''पहले भारत ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते उसे वहां से तेल की सप्लाई रोकनी पड़ी. रूस के साथ भी कुछ ऐसे ही हालात हैं.'' अभी दुनिया में जिस तरह के घटनाक्रम देखे जा रहे हैं जैसे कि रूस से तेल की खरीद को लेकर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर अमेरिका का दबाव बनाना और उन पर 500 परसेंट टैरिफ लगाने की बात कहना, वेनेजुएला पर अपना हक जमाना, ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाने की ट्रंप की चाहत, वेनेजुएला के पास रूसी तेल टैंकर को जब्त करना वगैरह, इन्हें देखते हुए यह कहना अभी मुश्किल है आने वाले समय में तेल के दाम बढ़ेंगे या घटेंगे.
ये भी पढ़ें:
50 से सीधे 500 परसेंट...ट्रंप का नया फरमान का भारत पर क्या होगा असर? निशाने पर चीन और ब्राजील भी
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















