म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया, ITR में नहीं बताया तो रिफंड पर क्या असर होगा?
ITR Refund News: क्या आपने भी आईटीआर भरते वक्त म्यूचुअल फंड में निवेश की जानकारी नहीं दी थी. क्या इससे रिफंड मिलने में परेशानी होगी? जानिए इसके लिए आयकर के क्या नियम हैं.

ITR Mutual Funds News: म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करने वाले कई लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि अगर उन्होंने एकमुश्त पैसा लगाया है, लेकिन ITR में इसकी जानकारी नहीं दी तो क्या परेशानी हो सकती है. सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि सिर्फ म्यूचुअल फंड खरीदने और उसे बेचने के टैक्स नियम अलग होते हैं.
अगर आपने फाइनेंशियल ईयर में म्यूचुअल फंड की यूनिट्स खरीदी हैं और उन्हें बेचा या रिडीम नहीं किया है, तो सिर्फ इन्वेस्टमेंट करने से आम तौर पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं बनता. इसलिए इसे कैपिटल गेन के तौर पर ITR में दिखाने की जरूरत नहीं होती.
बड़े इन्वेस्टमेंट की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तक पहुंच सकती है. फाइनेंसियल ईयर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा की म्यूचुअल फंड यूनिट्स खरीद की जानकारी SFT के जरिए रिपोर्ट की जाती है. इसलिए AIS और TIS में इस लेनदेन की जानकारी जरूर जांच लें.
यूनिट बेचने पर देना होगा हिसाब
अगर आपने म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बेच दी हैं या रिडीम की हैं, तो इससे मुनाफा या नुकसान हो सकता है. ऐसे लेनदेन को ITR में सही तरीके से बताना जरूरी है. मुनाफे पर नियम के अनुसार शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है. वहीं, नुकसान को रिपोर्ट करने पर मान्य नुकसान को आगे के साल में ले जाने का फायदा मिल सकता है.
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अगर टैक्स लगने वाली कैपिटल गेन आय ITR में छूट गई है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच या प्रोसेसिंग के दौरान ज्यादा टैक्स बन सकता है. इससे आपका रिफंड कम हो सकता है. लेकिन सिर्फ AIS में म्यूचुअल फंड की जानकारी होने से हर व्यक्ति का रिफंड अपने आप नहीं रुकता. असर इस बात पर डिपेंड करता है कि आपने कौनसा लेनदेन किया और उससे टैक्सेबल आय बनी या नहीं.
गलती हो गई तो क्या करें?
सबसे पहले ई-फाइलिंग अकाउंट से AIS और TIS चेक करें. इसके बाद फंड हाउस, CAMS, KFintech या ब्रोकर से Consolidated Capital Gain Statement निकालें. अगर बिक्री से हुआ कैपिटल गेन या लॉस ITR में छूट गया है और समय बाकी है, तो Revised ITR दाखिल कर गलती ठीक की जा सकती है.
2026-27 के लिए Revised ITR 31 मार्च 2027 तक दाखिल किया जा सकता है, बशर्ते असेसमेंट पहले पूरा नहीं हुआ हो. 31 दिसंबर 2026 के बाद Revised ITR दाखिल करने पर Section 234-I के अनुसार एक्स्ट्रा फीस लागू होगी.
अगर Revised ITR की समय सीमा निकल गई है, तो कुछ मामलों में ITR-U का ऑप्शन हो सकता है. इसे संबंधित समय के अनुसार 48 महीने तक दाखिल किया जा सकता है, लेकिन इसमें ज्यादा टैक्स और दूसरी शर्तें लागू होती हैं. ITR-U से रिफंड बढ़ाने का रास्ता नहीं मिलता. इसलिए गलती का पता चलते ही समय रहते सही रिटर्न दाखिल करना बेहतर है.
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