Gen Z के लिए Cool बनेंगे सरकारी बैंक, लेकिन कैसे? वित्त मंत्री ने समझाया
Banking for Gen Z: आजकल की नई पीढ़ी के बीच सरकारी बैंकों को लेकर एक 'पर्सेप्शन गैप' है, जिसे पाटने की बहुत ज्यादा जरूरत है इसके लिए बैंकों को भी अपनी छवि सुधारनी होगी.

- सीतारमण ने सरकारी बैंकों को युवा-केंद्रित बनने का निर्देश दिया.
- बैंक 2 अक्टूबर से 'बैंकिंग फॉर यूथ' अभियान चलाएंगे.
- बैंक कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में जाकर सीधे युवाओं से जुड़ेंगे.
- सरकारी बैंक युवाओं के लिए 'कूल' बनें, समर्पित सेवाएं दें.
Banking for youth campaign: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों से कहा है कि वे युवाओं के हिसाब से खुद में बदलाव करें. उन्होंने पब्लिक सेक्टर के बैंकों को सुझाव देते हुए कहा कि वे यंग कस्टमर्स के साथ अपने कनेक्शंस बनाए, उनके लिए बैंकिंग को आसान, पर्सनलाइज्ड और चौबीसों घंटे उपलब्ध बनाएं क्योंकि देश अपनी युवा आबादी के लिए एक मजबूत फाइनेंशियल इकोसिस्टम बनाना चाहता है.
केंद्रीय वित्त मंत्री ने सरकारी बैंकों को सलाह दी कि वे अपनी पारंपरिक छवि को बदलकर Gen Z के लिए 'Cool' और आकर्षक बनें ताकि नई पीढ़ी प्राइवेट बैंकों के बजाय सरकार बैंकों को तरजीह दे.
यंग कस्टमर्स से खुद कनेक्ट करें बैंक
नई दिल्ली में दो दिन तक चले PSB कॉन्फ्लुएंस के आखिरी सेशन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने सरकारी बैंकों से 2 अक्टूबर से एक महीने तक चलने वाला 'बैंकिंग फॉर यूथ' कैंपेन शुरू करने को कहा. इसका मकसद देश के युवाओं के बीच अपनी 'कूल' इमेज बनाना है, साथ ही बैंकिंग कारोबार के लिए जरूरी सावधानी और समझदारी को भी बनाए रखना है. बैंकों को निर्देश दिया गया है. कि वे युवाओं के बैंक आने का इंतजार न करें, बल्कि खुद ही कॉलेजों, यूनिवर्सिटी और स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स में जाकर युवाओं से सीधे कनेक्ट करें.
A banking relationship established between ages 16 and 18 can deepen over decades as a young person moves through education, employment, entrepreneurship, home ownership, investment and wealth creation.
— Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) August 18, 2026
Public Sector Banks must be the first and most trusted choice of young… https://t.co/jSH37eoVlG
खुद को 'कूल' बनाएं सरकारी बैंक
इस पहल का मकसद युवाओं के साथ लॉन्ग टर्म में अपना मजबूत बॉन्ड बनाना है, जो कैंपस से करियर और उसके आगे भी चले, न कि सिर्फ अकाउंट ओपन करने तक ही सिमट कर रह जाए. सीतारमण ने कहा कि सरकारी बैंकों की छवि अभी भी 'सरकारी बैंकों' वाली है और युवा ग्राहक अक्सर उन्हें प्राइवेट बैंकों के मुकाबले कम आकर्षक मानते हैं. उन्होंने सरकारी बैंकों से कहा कि वे सीधे युवाओं से बात करें और समझें कि वे अपने बैंकों से क्या उम्मीद करते हैं.
सीतारमण ने कहा, "पब्लिक सेक्टर के बैंक युवा भारतीयों की पहली और सबसे भरोसेमंद पसंद होने चाहिए." उन्होंने आगे कहा कि बैंकों को युवाओं की फाइनेंशियल यात्रा के हर पड़ाव पर उनके साथ होना चाहिए, जैसे कि उनका पहला अकाउंट, पहली सैलरी, हायर एजुकेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और पहला इन्वेस्टमेंट. बैंक जाने-माने एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स और प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर फ्री ऑनलाइन लर्निंग कंटेंट भी दे सकते हैं ताकि एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट के जरिए युवा कस्टमर्स को जोड़ा जा सके.
युवाओं के लिए हो डेडिकेडेट सर्विस
सीतारमण ने बैंक ब्रांचों में युवाओं के लिए खास 'युवा कियोस्क' या 'युवा बैंकिंग मित्र' का इंतजाम किए जाने की भी बात कही है. इस व्यवस्था के तहत युवाओं को बिना किसी हिचकिचाहट के बैंकिंग और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स समझने में मदद मिलेगी.
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