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Expert View: भारत बन सकता है दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी, लेकिन सामने हैं ये 3 बड़ी अड़चनें

Indian Economy: दुनिया की तमाम रेटिंग एजेंसियां अनुमान लगा रही हैं कि भारत कुछ ही सालों में तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने का लक्ष्य हासिल कर लेगा. हालांकि, इसे इसमें अभी वक्त लग सकता है.

Indian Economy: भारत की इकोनॉमी तेजी से आगे बढ़ रही है. इस साल मई में नीति आयोग के सीईओ (CEO) बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने बताया कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने का मुकाम हासिल कर चुका है. भारत की इकोनॉमी 4 ट्रिलियन डॉलर या 4 लाख करोड़ डॉलर की है, जो जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली जैसे कई देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. 

अगले साल भी ग्रोथ रहेगी बरकरार

हाल ही में IMF (International Monetary Fund) ने 'डेटामैपर' की मदद से अनुमान लगाया कि साल 2025 की ही तरह अगले साल 2026 में भी ग्रोथ की यह रफ्तार जारी रहेगी और अमेरिका, चीन, जर्मनी के बाद भारत 4.5 ट्रिलियन डॉलर डॉलर के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बना रहेगा.

अब इसका अगला लक्ष्य जर्मनी से आगे निकलते हुए और चीन को कड़ी टक्कर देते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने का है. इन्वेस्टमेंट कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने जुलाई में अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि भारत 2028 तक जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा. वहीं, 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था दोगुनी से भी ज्यादा होकर 10.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने भी अगले साल भारतीय इकोनॉमी के 6.4 परसेंट की रेट से बढ़ने का अनुमान लगाया है. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि उसे उम्मीद है कि भारत G-20 देशों में से सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला इकोनॉमी बनकर उभरेगा. इसका रियल जीडीपी ग्रोथ 2025 में 7 परसेंट रहने का अनुमान है, जो साल 2024 के 6.7 परसेंट से ज्यादा है. मूडीज का अनुमान है कि भारत की जीडीपी साल 2026 में 6.4 परसेंट और 2027 में 6.5 परसेंट की दर से आगे बढ़ेगी.

तीन पॉइंट में समझें देश की इकोनॉमी

इस पर जाने-माने इकोनॉमिस्ट व प्रोफेसर आलोक पुराणिक ने कहा कि इसके लिए सबसे पहले इकोनॉमी के स्ट्रक्चर को समझना होगा.

  • 140 करोड़ लोगों के इस देश का 5 परसेंट इंडिया का 'अमेरिका' है, जिनके पास खूब सारा पैसा है.
  • जबकि 35-40 करोड़ की जनता मिडिल क्लास की कैटेगरी में आती है, जो इंडिया का 'मलेशिया' है.
  • बाकी 80 करोड़ की जनता इंडिया का 'युगांडा' है, जिनको सरकार की तरफ से तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है.

इसी 80 करोड़ के युगांडा को इंडिया का मलेशिया बनने में वक्त लगेगा, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है. इससे साफ है कि देश में रोजगार असमानता बहुत ज्यादा है. एक तबके के पास बहुत ज्यादा पैसा है, जबकि दूसरा तबका कमी से जूझ रहा है. एक विकसित देश में रोजगार समानता एक बड़ा फैक्टर है, जो Per Capita GDP ग्रोथ को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे इकोनॉमी आगे बढ़ती है. 

जनसंख्या अब 'अभिशाप' नहीं 'वरदान'

वह आगे कहते हैं, ''भारत की यही बढ़ी हुई आबादी अब कहीं न कहीं चलकर उसकी ताकत भी बनती दिख रही है क्योंकि लोग जितने ज्यादा है बाजार उतना बड़ा होगा. चीजों की खरीद-बिक्री भी इस हिसाब से ज्यादा होगी, जिससे मार्केट बूस्ट होगा. यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियां आज भारत आकर अपना कारोबार शुरू कर रही हैं. ऐप्पल जैसी कंपनी भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा रही है.''

वह आगे कहते हैं, ''आज के समय में  कोई भी ग्लोबल कंपनी आज के समय में भारत को इग्नोर नहीं कर सकती क्योंकि उन्हें अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए भारत जितने बड़े मार्केट का प्रॉफिट जो मिल रहा है. इस हिसाब से देखे तो अगले कुछ सालों में भारत बेशक दो से तीन साल के अंदर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है, लेकिन फिर उसे चीन के लेवल और उसके बाद अमेरिका के लेवल तक पहुंचने में लंबा वक्त लग सकता है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि इन चंद सालों में भारत बहुत एडवांस्ड या विकसित देशों की कैटेगरी में शामिल हो जाए, इसकी भी वजह यहां की आबादी ही है. जीडीपी बढ़ने से बेशक प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) बढ़ेगी, लेकिन चूंकि इतना बड़ा देश है इसलिए Per Capita GDP के आधार पर हम खुद को बहुत ज्यादा विकसित देश होने का दावा नहीं कर सकते हैं.''

कई दूसरे सेक्टर्स पर भी फोकस जरूरी 

देश की इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए सरकार लगातार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने में जुटी हुई है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे सेक्टर भी हैं, जो इकोनॉमी को आगे बढ़ाने में अपना अहम योगदान दे सकते हैं. इस पर प्रोफेसर पुराणिक ने कहा, ''मैन्युफैक्चरिंग के अलावा देश का टूरिज्म सेक्टर, मेडिकल सेक्टर, एजुकेशन सेक्टर भी इकोनॉमी को ग्रो करने में अपना योगदान दे सकते हैं. इनमें संभावनाएं काफी ज्यादा है इसलिए इन और काम करने की जरूरत है.''

उन्होंने आगे कहा, ''भारत का सर्विस सेक्टर, सॉफ्टवेयर सेक्टर पहले से ही काफी बड़ा है. भारत की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी काफी बड़ी है, इस पर भी फोकस किया जा सकता है. इन सभी सेक्टर्स में हमें मौके तलाशने चाहिए.''

यानी कि वह दिन बहुत दूर नहीं जब भारत का नाम दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी वाले देशों में तीसरे नंबर पर आए, लेकिन इसे और ज्यादा एडवांस्ड बनाने में देश को अपने अंदर छिपी क्षमताओं पर और गहराई से काम करने की जरूरत है. 

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