रात में 3 और दिन में 5 रुपए हो EV चार्जिंग यूनिट, गडकरी ने दिया नया प्लान
मौजूदा रिपोर्टस के जरिये बताया गया है नितिन गडकरी ने ईवी चार्जिंग के लिए रात में 3 और दिन में 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली का सुझाव जारी किया है. इससे 1 हजार KM का सफर करीब 600 रुपये में पूरा हो सकता है.

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसी दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक नया सुझाव दिया है.
बिजली की कीमत कम होने से इलेक्ट्रिक वाहन चलाना लोगों के लिए ज्यादा किफायती हो सकता है. इस प्रस्ताव के तहत रात और दिन में ईवी चार्जिंग के लिए अलग-अलग दरें रखने की बात कही गई है.
1 हजार KM चलाने पर कितना आएगा खर्च?
गडकरी के प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई इलेक्ट्रिक कार एक यूनिट बिजली में 5 किलोमीटर चलती है, तो 1,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए उसे 200 यूनिट बिजली की जरूरत होगी. रात में 3 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से इसका कुल खर्च सिर्फ 600 रुपये होगा.
वहीं, 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देने वाली पेट्रोल कार से इतनी दूरी तय करने पर मुंबई के अनुमानित पेट्रोल रेट के अनुसार करीब 7,414 रुपये खर्च होंगे. डीजल कार के लिए यही खर्च लगभग 6,522 रुपये होगा. इस तुलना में इलेक्ट्रिक कार से पेट्रोल के मुकाबले करीब 6,814 रुपये और डीजल के मुकाबले 5,922 रुपये की बचत हो सकती है. हालांकि, ये आंकड़े अनुमानित माइलेज और ईंधन की कीमतों पर आधारित हैं.
रात में 3 रुपये और दिन में 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली का प्रस्ताव
नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए रात में 3 रुपये और दिन में 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली की दर तय की जाए. उन्होंने KPMG ENRich 2026 कार्यक्रम में यह बात कही. उनके अनुसार, दिन के समय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करके और रात में कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराकर ईवी का उपयोग बढ़ाया जा सकता है.
गडकरी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने वालों के बारे में भी पूछा. उनके मुताबिक, वहां मौजूद करीब 20-25 प्रतिशत लोगों ने ईवी होने की बात कही. उन्होंने अनुमान जताया कि अगले साल तक यह आंकड़ा बढ़कर 35-40 प्रतिशत हो सकता है.
इथेनॉल और हाइड्रोजन वाहनों को भी बढ़ावा
उन्होंने 100 प्रतिशत बायोइथेनॉल से चलने वाली टोयोटा इनोवा का भी जिक्र किया. गडकरी के अनुसार, इस गाड़ी का इस्तेमाल करने का खर्च पेट्रोल के 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर पड़ता है. उन्होंने बताया कि कई वाहन कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल कारों और दोपहिया वाहनों पर काम कर रही हैं.
इसके अलावा, तीन हाइड्रोजन से चलने वाले टाटा ट्रक तैयार किए जा रहे हैं. सरकार 10 हाइड्रोजन कॉरिडोर और उनसे जुड़े फिलिंग स्टेशन विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है.
कृषि कचरे से ईंधन बनाने पर जोर
गडकरी ने पराली और दूसरे कृषि कचरे से बायो-CNG बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की. उन्होंने बताया कि गोबरधन योजना के तहत करीब 3 हजार प्लांट पंजीकृत हुए हैं, जिनमें से 280 शुरू हो चुके हैं. उनका कहना है कि कृषि कचरे का इस्तेमाल ईंधन बनाने में करने से पराली जलाने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है.
इलेक्ट्रिक बसों और बैटरी पर भी कही बात
गडकरी ने बताया कि लिथियम-आयन बैटरी की कीमत पहले करीब 150 डॉलर प्रति किलोवाट घंटा थी, जो अब घटकर लगभग 50 डॉलर रह गई है. हालांकि, बाजार में इनकी मांग अभी भी उपलब्धता से ज्यादा है. भारत में हर साल करीब 6 हजार इलेक्ट्रिक बसें बनाई जा रही हैं और अगले दो सालों में 10 हजार बसों की जरूरत होगी.
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