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सारे सबूत मिटा दो! गूगल ने अपने कर्मचारियों से ऐसा क्यों कहा?

गूगल को लेकर दावा किया गया है कि उसने कथित तौर पर अपने कर्मचारियों से कहा कि वह अपने टेक्स्ट संदेशों के सबूत नष्ट कर दें और इंटरनल कम्यूनिकेशन के दौरान कुछ शब्दों का इस्तेमाल न करें.

सर्च इंजन कंपनी गूगल को लेकर एक बड़ा दावा किया गया है. अमेरिका के अविश्वास कानून से परेशान गूगल को लेकर दावा किया गया है कि उसने अपने कर्मचारियों पर संचार संबंधी कई पाबंदियां लगाई हैं. दावा ये भी है कि गूगल ने अपने कर्माचारियों को निर्देश दिया कि वह अपने इंटरनल चैट्स को डिलीट कर दें और आपसी टेक्स्ट बातचीत में कुछ खास शब्दों का इस्तेमाल ना करें.

गूगल को लेकर क्या है दावा

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सर्च इंजन कंपनी गूगल, जो इस समय अमेरिका में एंटी-ट्रस्ट मुकदमों का सामना कर रही है, ने कथित तौर पर अपने कर्मचारियों से कहा कि वह अपने टेक्स्ट संदेशों के सबूत नष्ट कर दें और इंटरनल कम्यूनिकेशन के दौरान कुछ शब्दों का इस्तेमाल न करें. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गूगल लगभग 15 वर्षों में एंटी-ट्रस्ट मामलों से बचने के लिए इस तरह की रणनीतियों को अपनाती रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने ये रणनीतियां 2008 से अपनानी शुरू की थीं, जब कंपनी एक विज्ञापन समझौते के कारण अपने पहले कॉम्पिटिटर Yahoo के साथ कानूनी जांच के दायरे में आई थी. उस समय कंपनी की तरफ से एक कॉन्फिडेंशियल मेमो भेजा गया था, जिसमें कर्मचारियों को चेतावनी दी गई थी कि रेगुलेटरी बॉडी उनकी आपसी बातचीत में इस्तेमाल किए गए शब्दों का हवाला दे सकते हैं, इसलिए कर्मचारी किसी भी "हॉट टॉपिक्स" पर लिखने से पहले "दो बार सोचें".

इन शब्दों से बचने के लिए कहा गया

2011 में जारी एक ज्ञापन में कर्मचारियों से कहा गया कि वह "बाजार हिस्सेदारी" "प्रभुत्व" और "विजय" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचें. कर्मचारियों से ये भी कहा गया कि वह किसी भी आंतरिक दस्तावेज़ में "अटॉर्नी-क्लाइंट विशेषाधिकार" को जोड़ें और कंपनी के वकीलों को प्राप्तकर्ताओं की लिस्ट में शामिल करें. रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम गूगल की दस्तावेज़ संरक्षित न करने वाले सिस्टम को कवर करने के लिए उठाया गया था.

दरअसल, अमेरिका में सरकारी नियमों के तहत कंपनियों को कानूनी कार्रवाई की संभावना होने पर अपने दस्तावेजों को संरक्षित करना अनिवार्य होता है. लेकिन गूगल की इंटरनल कम्यूनिकेशन सिस्टम को इस तरह से बदला गया था कि चैट्स को मिटाने का विकल्प डिफॉल्ट था और कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे कर्मचारियों पर यह निर्भर था कि वह अपनी चैट हिस्ट्री को रखें या डिलीट कर दें.

अदालत ने क्या कहा

गूगल बनाम एपिक गेम्स मामले में कैलिफ़ोर्निया के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज ने गूगल पर "साक्ष्यों को दबाने के सिस्टमैटिक कल्चर" को अपनाने का आरोप लगाया. वहीं, वर्जीनिया की एक अन्य अदालत ने गूगल की डॉक्यूमेंट रिटेंशन पॉलिसीज़ की आलोचना करते हुए कहा कि इनसे "बहुत सारे साक्ष्य नष्ट हो गए हैं." वहीं, कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने एक अन्य मामले में गूगल द्वारा विशेषाधिकार के नाम पर रोके गए डॉक्यूमेंट्स की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि ये दस्तावेज़ कानूनी सुरक्षा के तहत नहीं आते हैं.

गूगल का जवाब

इन आरोपों पर गूगल ने जवाब देते हुए कहा कि उसने हमेशा अपने दस्तावेज़ पेश करने और उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारियों को गंभीरता से लिया है. कंपनी ने यह भी कहा कि वह अपने कर्मचारियों को कानूनी विशेषाधिकारों के सही उपयोग के लिए ट्रेन्ड करती है. गूगल के वकील ने अदालत में कहा कि कंपनी ने कर्मचारियों के काम में ट्रांसपेरेंसी लाने और गलतफहमियों से बचने के लिए नीतियों में बदलाव किए. उन्होंने, अदालत में दावा किया कि गूगल के कर्मचारी अन्य कंपनियों के मुकाबले अधिक ईमेल लिखते हैं, जिससे जांचकर्ताओं को सबूत खोजने में ज्यादा चुनौतियां आती हैं.

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