बज गया बिगुल! आ रहा है इतिहास का सबसे बड़ा IPO, पैसों का अभी से कर लें इंतजाम
Reliance Jio IPO: रिलायंस जियो के आईपीओ को इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इश्यू माना जा रहा है. इसकी वैल्यूएशन करीब 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के बीच आंकी जा रही है.

Reliance Jio IPO: शेयर बाजार निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस से जुड़ी अपनी कंपनी Jio Platforms की शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए कदम आगे बढ़ा चुकी है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, Jio Platforms के शुरुआती पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) इस महीने के आखिर तक फाइल किया जा सकता है.
Jio Platforms के इस इश्यू को मैनेज करने के लिए 17 बैंकर्स भी नियुक्त किए गए हैं. इनमें Morgan Stanley, HSBC Holdings, JP Morgan, Citigroup और Goldman Sachs Group के शामिल होने की बात कही जा रही है. घरेलू मोर्चे पर कंपनी ने इस इश्यू को मैनेज करने के लिए Kotak Mahindra Capital Company, Axis Capital, JM Financial और SBI Capital Markets को नियुक्त किया है.
इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ
Jio Platform का IPO भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा IPO हो सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले Reliance Group का लगभग दो दशकों में यह पहला IPO होगा. 2026 की शुरुआत से लेकर साल के बीचोबीच IPO को लॉन्च किए जाने का प्लान है. इसकी अनुमानित वैल्यूएशन 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के बीच होने की संभावना है.
कुछ अनुमानों के मुताबिक, इसकी वैल्यूएशन 180 बिलियन तक जा सकती है. हालांकि, कंपनी ने वैल्यूएशन के मामले में अब तक चुप्पी साध रखी है. Meta Platforms और Google की पैरेंट कंपनी Alphabet जैसी ग्लोबल टेक कंपनियों ने 2020 में Jio Platforms में लगभग 10 बिलियन डॉलर का भारी निवेश किया था. ऐसे में आईपीओ के जरिए इन बड़े निवेशकों को अपने शेयर बेचकर कंपनी से बाहर निकलने और मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा.
क्या होता है DRHP?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस Jio Platforms के IPO के लिए जल्द ही DRHP फाइल करा सकता है. DRHP एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसें कंपनी सेबी के पास जमा करती है. इसमें आईपीओ से जुड़ी सारी डिटेल और बिजनेस प्लान संबंधित जानकारी होती है.
लिस्टिंग के क्या है नए नियम?
भारत ने हाल ही में अपने लिस्टिंग फ्रेमवर्क में एक अहम सुधार किया है, जिससे मेगा-IPO लाने वाली कंपनियों के लिए डाइल्यूशन के नियम आसान हो गए हैं. पहले नियम यह था कि जब कोई कंपनी अपना आईपीओ लेकर आती है, तो उसे कम से कम अपना 10 परसेंट या उससे ज्यादा हिस्सा बेचना पड़ता था.
अब नए नियम के मुताबिक, अगर किसी कंपनी की मार्केट वैल्यू आईपीओ के बाद 5 लाख करोड़ से ज्यादा है, तो उन्हें अब 10 परसेंट हिस्सा बेचने की जरूरत नहीं है. ऐसी कंपनियां सिर्फ 2.5 परसेंट हिस्सा बेचकर ही शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती हैं. ऐसे में मुकेश अंबानी जैसे बड़े प्रोमोटर्स को आईपीओ लाने के लिए कंपनी में अपना बड़ा हिस्सा नहीं छोड़ना होगा. ये कम शेयर बेचकर भी मार्केट में लिस्ट हो सकते हैं. इससे कंपनी पर इनका कंट्रोल भी बना रहेगा.
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