क्रिसमस के मौके पर केक और चॉकलेट की मिठास, जानें भारत में कितना बड़ा है बाजार
आज 25 दिसंबर को पूरे देश में क्रिसमस का त्यौहार मनाया जा रहा है. क्रिसमस के मौके पर केक और चॉकलेट की मांग बढ़ जाती है. इस दिन लोग बड़े शौक से केक खाते हैं....

Christmas Cake and Chocolate: आज 25 दिसंबर को पूरे देश में क्रिसमस का त्यौहार मनाया जा रहा है. क्रिसमस के मौके पर केक और चॉकलेट की मांग बढ़ जाती है. इस दिन लोग बड़े शौक से केक खाते हैं. केक की डिमांड क्रिसमस से लेकर न्यू ईयर तक बनी रहती है. क्रेक विक्रता तो इसके लिए नवंबर महीने से ही तैयारी शुरू कर देते हैं.
साथ ही विभिन्न प्रकार की चॉकलेट की मांग भी खूब रहती है. अक्सर लोग एक-दूसरे को चॉकलेट गिफ्ट के तौर पर देते हैं. 28 अक्टूबर को पूरे देश में राष्ट्रीय चॉकलेट डे मनाया जाता है. भारतीय खाने में मीठे का महत्व बहुत अधिक है. भारतीय लोग हर खुशी के अवसर पर मीठा खाते और खिलाते है. आइए जानते हैं, चॉकलेट को लेकर कुछ दिलचस्प बातें.... .
भारतीय को चॉकलेट आती हैं पसंद
कैंडी , बार और विभिन्न प्रकार के चॉकलेट लोगों की पहली पसंद है. डॉर्क चॉकलेट खाने की सलाह तो डॉक्टर भी देते हैं. डॉर्क चॉकलेट खाने से कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ होते हैं. पिछले कुछ सालों में भारतीयों में चॉकलेट खाने की आदत में तेजी भी देखी गई है. टीवी 9 भारतवर्ष में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चॉकलेट का बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है.
क्या कहती है रिपोर्ट?
मोर्डोर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, भारत में लगातार चॉकलेट बाजार में बढ़ोतरी हो रही है. साल 2025 में इसका आकार करीब 2.48 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है, जो 2030 तक बढ़कर 3.58 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है. यानी इसमें हर साल लगभग 7.63 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
इस तेजी के पीछे लोगों की बढ़ती आमदनी, पसंद में बदलाव और सेहत को लेकर जागरूकता हैं. अब लोग सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, सेहत को ध्यान में रखते हुए चॉकलेट का चयन कर रहे हैं. हेल्दी विकल्प जैसे डार्क या शुगर-फ्री चॉकलेट्स लोगों की पसंद बन रही हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और रिटेल स्टोर्स भी लगातार अपनी रेंज बढ़ा रहे हैं, जिससे चॉकलेट अब ज्यादा लोगों तक पहुंच पा रही है.
भारतीयों को पसंद आ रहा हेल्दीयर चॉकलेट
भारतीयों का एक बहुत बड़ा हिस्सा हेल्दीयर चॉकलेट के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार है. हेल्थ को लेकर हो रही जागरूकता के कारण लोग अब शुगर-फ्री, ऑर्गेनिक वैरिएंट्स और हाई कोको कंटेंट वाली डार्क चॉकलेट को पसंद कर रहे हैं. कंपनियां भी इस बदलते ट्रेंड को समझ कर अपनी तैयारियां में बदलाव कर रही है. बड़ी कंपनियों से लेकर छोटी कंपनियां तक हेल्दीयर वर्जन वाले चॉकलेट और इसकी यूनिक पैकजिंग पर ध्यान दे रहे हैं.
नेस्ले इंडिया के डायरेक्टर, कॉर्पोरेट अफेयर्स कुंवर हिम्मत सिंह की मानें तो चॉकलेट को तैयार करने में कड़े मानदंडों का पालन किया जाता है. न सिर्फ फूड सेफ्टी वहां पर काम कर रहे श्रमिकों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है. यानी हर स्तर पर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है, चाहे बात फूड सेफ्टी की हो या कामगारों की. कुंवर हिम्मत सिंह के अनुसार चॉकलेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के चयन के लिए एक विशेषज्ञ पैनल होता है, जो उसकी कड़ाई से जांच करता है. सभी सामग्री के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड तय हैं और किसी भी सामग्री को उन्हीं मानकों पर खरा उतरना आवश्यक है.
उत्पाद तैयार होने के बाद भी कई स्तरों पर क्वालिटी टेस्ट किए जाते हैं. रॉ मटेरियल, स्टोरेज, प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग—हर चरण में यह सुनिश्चित किया जाता है कि उपभोक्ता तक उत्पाद नेस्ले के वादे के समान गुणवत्ता के साथ पहुंचे. कंपनी में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी लागू है. यानी अगर किसी कच्चे माल में मामूली भी कमी या गुणवत्ता में अंतर पाया जाता है, तो उसे अस्वीकार कर दिया जाता है.
कुंवर हिम्मत सिंह ने आगे बताया कि अगर रॉ मटेरियल ठीक हो, लेकिन उत्पाद ज्यादा या कम पक जाए, तो भी उसे आगे नहीं भेजा जाता. हर स्तर पर तय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है. प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही कच्चे माल का उपयोग होता है. ब्रांड और कैटेगरी से जुड़ी टीमें 24 घंटे उपभोक्ता की मांग और पसंद को ध्यान में रखते हुए काम करती हैं. रिसर्च के अलग-अलग विभाग यह सुनिश्चित करते हैं कि उपभोक्ता को स्वाद, गुणवत्ता और अनुभव के मामले में सर्वोत्तम उत्पाद मिले.
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Source: IOCL






















