नौकरी गई तो नहीं होगी पैसों की टेंशन, 3-6-9 रूल से तैयार करें अपना इमरजेंसी फंड
Financial Planning: इमरजेंसी फंड अचानक आने वाले खर्चों और आर्थिक संकट से बचाने में मदद करता है. आइए जानते हैं वित्तीय सुरक्षा के लिए कितना इमरजेंसी फंड होना चाहिए और इसे बनाने के आसान तरीके क्या हैं.

Emergency Fund News: हमारी जिंदगी में कब किस तरह की आर्थिक चुनौतियां सामने आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. अचानक नौकरी छूट जाना, मेडिकल इमरजेंसी आ जाना या कारोबार में नुकसान होने जैसी परिस्थितियों का सामना किसी को भी करना पड़ सकता है. ऐसे मुश्किल समय में अगर आपके पास लिमिटेड बचत नहीं है, तो आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यही वजह है कि वित्तीय एक्सपर्ट नियमित बचत के साथ-साथ इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं.
इमरजेंसी फंड वित्तीय सुरक्षा का एक ऐसा जरिया है, जो मुश्किल समय में आपके जरूरी खर्चों के लिए काम आ सकता है. ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इमरजेंसी फंड के लिए कितनी रकम होनी चाहिए. आइए जानते हैं ऐसे आसान तरीके, जिनकी मदद से आप इमरजेंसी फंड तैयार कर सकते हैं.
क्या है 3-6-9 रूल?
3-6-9 रूल के मुताबिक आपको अपने मासिक जरूरी खर्चों का 3, 6 या 9 गुना पैसा इमरजेंसी फंड के रूप में तैयार कर अलग रखें. इसमें किराया, ईएमआई, राशन, बिजली-पानी के बिल और अन्य जरूरी खर्च शामिल होते हैं.
- 3 महीने का फंड: जिन लोगों की नौकरी स्थिर है और परिवार में आय के दूसरे स्रोत मौजूद हैं, उनके लिए कम से कम 3 महीने के खर्च के बराबर फंड तैयार होना चाहिए.
- 6 महीने का फंड: वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह सबसे बेहतरीन ऑप्शन माना जाता है. इससे अचानक नौकरी जाने या किसी आपात स्थिति में आपका सहारा बन सकता है.
- 9 से 12 महीने का फंड: बिजनेस करने वालों, फ्रीलांसरों या परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य के लिए 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर फंड रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
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इमरजेंसी फंड कैसे बनाएं?
- सबसे पहले अपने सभी जरूरी मासिक खर्चों का लिस्ट बनाएं.
- इमरजेंसी फंड के लिए अलग बैंक अकाउंट या निवेश का ऑप्शन चुनें.
- सैलरी मिलते ही 5% से 10% राशि ऑटोमैटिक इस फंड में ट्रांसफर करने की आदत डालें.
- धीरे-धीरे इस फंड को बढ़ाते रहें और इसे सिर्फ आपात स्थिति में ही इस्तेमाल करें.
- जोखिम वाले निवेश विकल्पों की बजाय सुरक्षित और आसानी से निकाले जा सकने वाले साधनों को प्राथमिकता दें.
कितना फंड होना चाहिए?
उदाहरण के तौर पर अगर आपके जरूरी मासिक खर्च 30,000 रुपये हैं, तो 3-6-9 रूल के मुताबिक आपका इमरजेंसी फंड इस तरह का हो सकता है.
- 3 महीने के खर्च के लिए: 90,000
- 6 महीने के खर्च के लिए: 1,80,000
- 9 महीने के खर्च के लिए: 2,70,000
- 12 महीने के खर्च के लिए: 3,60,000
इमरजेंसी फंड कहां रखें?
इमरजेंसी फंड हमेशा ऐसी जगह पर निवेश करें, जहां से जरूरत पड़ने पर बिना किसी परेशानी के तुरंत पैसे निकाला जा सके.
- सेविंग्स अकाउंट: अचानक आने वाले खर्चों का कुछ हिस्सा बैंक खाते में रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत रकम निकाला जा सके.
- लिक्विड म्यूचुअल फंड: यहां बेहतर लिक्विडिटी के साथ आपको बचत खाते के मुकाबले में बेहतर रिटर्न मिल सकता है.
- फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): ऐसी एफडी चुनें जिसे जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन आसानी से तोड़ा जा सके.
इन बातों का रखें ध्यान
- इमरजेंसी फंड को निवेश पोर्टफोलियो से अलग रखें.
- इन पैसे का इस्तेमाल सिर्फ अचानक आए हुए किसी जरूरी चीजों पर ही खर्च करें.
- हर साल अपने खर्चों के हिसाब से फंड की समीक्षा करें.
- सैलरी बढ़ने के साथ-साथ इमरजेंसी फंड की रकम भी बढ़ाते रहें.
- इन पैसों को छुट्टियां मनाने, शॉपिंग या किसी गैर-जरूरी खर्चों में इस्तेमाल करने से बचें.
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