Opinion: सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा का बढ़ाया जाना क्यों है सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है) से जुड़ी 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंप दी गई है. इस फैसले से सीमा सुरक्षा, सैन्य तैयारियों और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इलाका है. यह लगभग 60 किलोमीटर लंबा और 22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा भूभाग है, जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरा हुआ है. यही रास्ता मुख्य भारत को उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम और अरुणाचल प्रदेश से जोड़ता है. इस क्षेत्र में करीब 5 करोड़ लोग रहते हैं और लगभग 95 प्रतिशत व्यापार इसी कॉरिडोर के जरिए होता है.
चिकन नेक बहुत संवेदनशील
संकरा होने के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. किसी भी सैन्य तनाव की स्थिति में इस रास्ते को बाधित कर उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से अलग किया जा सकता है. यह इलाका तिब्बत के पास स्थित चुम्बी घाटी के करीब होने के कारण और भी संवेदनशील माना जाता है.
120 एकड़ जमीन मिलने से कई रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी. पहले भूमि संबंधी विवादों के कारण नेशनल हाईवे (NH-10 और NH-31) के विस्तार और सीमा पर बाड़ लगाने जैसे कार्य प्रभावित हो रहे थे. अब इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा. साथ ही, भारतीय सेना को नई चौकियां स्थापित करने और त्वरित कार्रवाई बलों की तैनाती के लिए पर्याप्त स्थान मिलेगा. धुबरी (असम), चोपड़ा (पश्चिम बंगाल) और किशनगंज (बिहार) में नई चौकियां विकसित की जा रही हैं.
इसके अलावा, सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है. पहले, द्वितीय विश्व युद्ध के समय के पुराने हवाई पट्टियों को आधुनिक बनाया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय वायुसेना तुरंत कार्रवाई कर सके और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से सैनिकों की तैनाती कर सके.
वॉर की स्थिति में लाइफ लाइन
दूसरे, इस संवेदनशील क्षेत्र में एक अंडरग्राउंड (भूमिगत) रेलवे नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जो बिहार के किशनगंज को डमडांगी से जोड़ेगा. यह बम-रोधी रेल नेटवर्क युद्ध की स्थिति में भी सेना और आवश्यक आपूर्ति की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा.
यह कदम उत्तर-पूर्वी भारत की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
[यह आर्टिकिल लेखक का निजी विचार है]
“ Opinion: भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, बॉर्डर की सामरिक चुनौतियां और भविष्य के खतरे

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