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Explained: सैमसंग मोबाइल-लैपटॉप होंगे महंगे! कंपनी में इतिहास की सबसे बड़ी हड़ताल, भारत में कितनी बढ़ जाएंगी कीमतें?

Samsung Union Strike: भारतीय ग्राहकों के लिए सीधा मतलब है कि आने वाले महीनों में कोई नया फोन या लैपटॉप खरीदने की सोच रहे हैं, तो कीमतें अभी की तुलना में 15 से 40 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकती हैं.

अगर आप अगला सैमसंग फोन या लैपटॉप खरीदने का महंगा सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है. दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के 48,000 से ज्यादा कर्मचारी 18 दिनों की ऐतिहासिक हड़ताल पर जाने वाले हैं. ये हड़ताल कोई मामूली विरोध-प्रदर्शन नहीं है. यह कंपनी के 50 साल के इतिहास की सबसे बड़ी हड़ताल होगी और इसकी चपेट में सिर्फ सैमसंग नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के टेक्नोलॉजी लवर्स आ सकते हैं. सवाल है कि साउथ कोरिया की कंपनी की हड़ताल से भारत में आप पर क्या फर्क पड़ेगा?

दुनिया की दूसरी बड़ी मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में हड़ताल क्यों हो रही है?

ये पूरा विवाद परफॉर्मेंस बोनस को लेकर है. दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बूम की वजह से सैमसंग को सेमीकंडक्टर चिप्स की जबरदस्त मांग मिल रही है. पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट साढ़े आठ गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है. कंपनी दुनिया की दूसरी ऐसी एशियाई कंपनी बन गई जिसकी मार्केट वैल्यू 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 96.93 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच गई. लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ये रिकॉर्ड मुनाफा उनके साथ सही से शेयर नहीं कर रही.

फिलहाल सैमसंग परफॉर्मेंस बोनस को कर्मचारी की सालाना सैलरी के 50 प्रतिशत पर कैप करता है. ऐसे में कर्मचारी तीन बड़ी मांगें कर रहे हैं:

  • ये कैप पूरी तरह खत्म हो
  • ऑपरेटिंग प्रॉफिट का 15 प्रतिशत हिस्सा बोनस के तौर पर कर्मचारियों को मिले
  • बोनस कैलकुलेशन का पूरा तरीका पारदर्शी और कानूनी रूप से संस्थागत हो.

विवाद की असली जड़ सैमसंग की प्रतिद्वंदी कंपनी SK हाइनिक्स है. SK हाइनिक्स ने पिछले साल अपने बोनस की 10 साल पुरानी कैप खत्म कर दी और कर्मचारियों को ऑपरेटिंग प्रॉफिट का 10 प्रतिशत बोनस के तौर पर देना शुरू कर दिया. सैमसंग कर्मचारियों का कहना है कि इस वजह से SK हाइनिक्स के कर्मचारी उनसे तीन गुना ज्यादा बोनस कमा रहे हैं.

अब तक की बातचीत में क्या हुआ?

इस हड़ताल को टालने के लिए दक्षिण कोरिया की सरकार ने भी पूरी ताकत झोंक दी. खुद राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कैबिनेट बैठक में कहा कि मजदूरों के अधिकारों को 'सामूहिक फायदे के लिए हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए' और प्रधानमंत्री किम मिन-सोक ने चेतावनी दी कि इस हड़ताल से 'पूरी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर गहरे घाव' लग सकते हैं.

इसके बावजूद बात नहीं बनी. 20 मई को नेशनल लेबर रिलेशंस कमीशन की मध्यस्थता में हुई बातचीत टूट गई. यूनियन ने कमीशन का प्रस्ताव मान लिया, लेकिन सैमसंग मैनेजमेंट ने इसे ठुकरा दिया. सैमसंग का कहना था कि यूनियन की मांगें 'कंपनी के प्रदर्शन-आधारित मुआवजे के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करती है'. इसके बाद खुद श्रम मंत्री किम यंग-हून ने आखिरी वक्त पर मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन कोई हल नहीं निकला.

कोर्ट ने भी इस मामले में दखल दिया. सैमसंग की याचिका पर सुवॉन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने आदेश दिया कि हड़ताल के दौरान भी सुरक्षा और ज़रूरी कामकाज के लिए 7,087 कर्मचारियों को ड्यूटी पर बने रहना होगा.

सैमसंग में हड़ताल का दुनिया पर क्या असर होगा?

यह सबसे अहम सवाल है कि लेकिन घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि सैमसंग डिवाइसेज की कीमतें फौरन नहीं बढ़ेगीं. सैमसंग और दूसरी बड़ी टेक कंपनियों के पास फिलहाल चिप्स का बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे कुछ हफ्तों तक प्रोडक्शन पर कोई असर नहीं दिखेगा. लेकिन अगर हड़ताल पूरे 18 दिन चली, तो हाला बदल सकते हैं.

सैमसंग ग्लोबल DRAM मार्केट का 36 प्रतिशत और NAND मार्केट का 32 प्रतिशत हिस्सा रखता है. केबी सिक्योरिटीज के एनालिस्ट जेफ किम के मुताबिक, 18 दिनों की हड़ताल से दुनिया भर में DRAM की सप्लाई 3 से 4 प्रतिशत और NAND की सप्लाई 2 से 3 प्रतिशत प्रभावित हो सकती है. ये आंकड़े छोटे लग सकते हैं, लेकिन जब मार्केट पहले से ही सप्लाई की कमी से जूझ रहा हो, तो ये कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल सकते हैं.

ताइवान की मेमोरी कंपनी ADATA के चेयरमैन चेन ली-बाई का कहना है कि 'कीमतें निश्चित रूप से बढ़ेंगी' और 2026 और 2027 में मेमोरी चिप की कमी बनी रहेगी. मिजुहो सिक्योरिटीज के जॉर्डन क्लाइन का अनुमान है कि 2026 और 2027 में मेमोरी की सप्लाई डिमांड से काफी कम रहेगी. रिसर्च फर्म SemiAnalysis को उम्मीद है कि मेमोरी चिप की कीमतें 2025 के मुकाबले इस साल के अंत तक दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती हैं.

दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर होगा. सैमसंग देश के कुल निर्यात का करीब एक चौथाई हिस्सा अकेले बनाता है. एक अनुमान के मुताबिक, सबसे खराब स्थिति में कोरिया की जीडीपी ग्रोथ में 0.5 प्रतिशत की कटौती हो सकती है और 100 ट्रिलियन वॉन (करीब 67 अरब डॉलर) तक का नुकसान हो सकता है.

भारत में सैमसंग लवर्स पर क्या असर होगा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये हड़ताल भारतीय ग्राहकों के लिए दोहरी मार साबित हो सकती है:

  1. चिप की कमी का असर: भारत पहले से ही मेमोरी चिप की गंभीर कमी से जूझ रहा है. DRAM और NAND चिप की कीमतें पिछली कुछ तिमाहियों में चार से पांच गुना तक बढ़ चुकी हैं. इसका नतीजा ये हुआ है कि कई डिवाइसेज की बिल ऑफ मटेरियल्स में मेमोरी की हिस्सेदारी 7-10 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है. भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं ने 2026 की बाकी अवधि के लिए अपना प्रोडक्शन 10 से 20 प्रतिशत तक कम कर दिया है.
  2. स्मार्टफोन की कीमतों पर सीधी चोट: ऑल इंडिया मोबाइल रिटेल एसोसिएशन (AIMRA) ने चेतावनी दी है कि भारत में बिकने वाले 80 प्रतिशत स्मार्टफोन मॉडल्स की कीमतों में जल्द ही बढ़ोतरी हो सकती है, जो औसतन 15 प्रतिशत तक हो सकती है. सैमसंग पहले ही अपने कई मॉडल्स पर 3 से 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर चुका है, जबकि दूसरे ब्रांड जैसे ओप्पो (6-18%), शाओमी (3-15%) और रियलमी (12% तक) भी कीमतें बढ़ा चुके हैं.

इसके अलावा मेमोरी की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर बजट स्मार्टफोन और 500 डॉलर (करीब 42,000 रुपये) से कम कीमत वाले लैपटॉप पर पड़ेगा. इन डिवाइसेज की कुल लागत में मेमोरी का हिस्सा 25 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसकी वजह से कंपनियां एंट्री-लेवल डिवाइसेज बनाने की बजाय प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं. भारत में 10,000 रुपये वाले स्मार्टफोन सीधे 14,000 रुपये पर पहुंच गए हैं, यानी 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी.

क्या भारत में बने सैमसंग फोन सस्ते रहेंगे?

सैमसंग का दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल प्लांट उत्तर प्रदेश के नोएडा में है, जहां सालाना 12 करोड़ फोन बनाने की क्षमता है. गैलेक्सी S26 सीरीज भी इसी प्लांट में बन रही है, लेकिन यहां एक अहम बात समझनी होगी. ये प्लांट सिर्फ असेंबली का काम करता है. असली मेमोरी चिप्स तो कोरिया की फैक्ट्रियों से ही आती हैं. तो भले ही फोन नोएडा में बने, चिप की बढ़ती कीमत का असर भारतीय ग्राहकों को भी झेलना पड़ेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेमोरी चिप की ये कमी 2027 के आखिर या 2028 की शुरुआत से पहले खत्म होने के आसार नहीं हैं.

फिलहाल, सैमसंग और यूनियन के बीच बातचीत जारी है. यूनियन ने कहा है कि वो हड़ताल के दौरान भी बातचीत के लिए तैयार रहेगी. सैमसंग मैनेजमेंट ने भी कहा है कि किसी भी हालत में हड़ताल नहीं होनी चाहिए.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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