एक्सप्लोरर

नवरात्र की पूजा में छिपा है प्रकृति और पर्यावरण के सरंक्षण का संदेश

पितृपक्ष समाप्त होने के बाद भारत में त्योहारों का मौसम शुरू गया है, सभी आयु वर्ग के लोग नवरात्रि और दुर्गा पूजा समारोह का आनंद ले रहे हैं. भारत के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से में नौ दिनों तक नवरात्रि मनाया जाता है जबकि पश्चिम बंगाल और अन्य पूर्वी राज्यों में दुर्गा पूजा एक भव्य त्योहार है जो मनाया जा रहा है. बसंत के समय नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि, वर्ष में दो बार मनाये जाते हैं. बसंत नवरात्रि नये वर्ष तथा नयी फसलों, नए मौसम और जीवनदायिनी शक्ति से प्रेरित है. उस समय हम उस शक्ति की पूजा करते हैं जो विश्व को चला रही है. शक्ति यानि दुर्गा की पूजा सनातन की आस्था का चरम बिंदु है, इनकी उपासना ब्रह्मांड की पोषिका, रक्षिका एवं शक्ति का संतुलन बनाये रखने वाली देवी के रूप में करोड़ो भारतीयों द्वारा की जाती है. यह देवी सिर्फ शक्ति माया या विद्या की प्रतीक ही नहीं हमारी जननी है जो हमारे दैनिक कर्मों में शामिल है.

भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण है एकात्म 

हमारे नित्यकर्म ही प्रकृति यानि शक्ति की रक्षा है, यह बात बड़ी ही बेमानी लगती है जब भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण की बात की जाती है क्योंकि हमारी पूजा, व्रत- त्योहार सब ही तो संरक्षण आधारित है. नवरात्र को दोनों फसल चक्रों की खुशी के रूप में भी देखा जा सकता है. प्रसाद के रूप में उपयोग किये जानेवाले फल भोजन और मौसम के संबंध की ओर इंगित करते हैं तो हवन के समय उपयोग की जानेवाली सामाग्री सुगंधित एवं औषधीय पेड़-पौधों के भाग होते हैं जो वायु को शुद्ध करते हैं. शारदीय नवरात्रि, को अकाल बोधन से भी जाना जाता है. अकाल यानी असमय.. यह असमय पूजन राम के द्वारा शक्ति के आह्वान के लिए किया गया था. जब किसी भी तरह रावण परास्त नहीं हो रहा था, तब राम ने युद्ध की बागडोर लक्ष्मण के हाथ में दे कर नौ दिन तक देवी का ध्यान किया. नवरात्र के प्रथम दिन घर-घर में मिट्टी के घट रूपी मां दुर्गा की स्थापना की जाती है. कलश स्थापना के समय विभिन्न पेड़ों की लकड़ियों एवं पत्तियों को रखा जाता है. कलश को जीवनदायिनी जल से भरा जाता है, घड़े को दूब , अक्षत आदि से पूजन के पश्चात् आम के पत्ते के ऊपर सृष्टि के प्रथम भ्रूण के रूप में कल्पवृक्ष रूपी नारियल से प्राप्त श्रीफल को रखा जाता है. जौ का अंकुरण मिट्टी,जल,वायु जैसे मूल तत्वों के संयोग की ओर इंगित करता है तथा प्रकृति के पारितंत्र में जैव और अजैव कारकों की महता को चिन्हित करता है.

नौ रूप बताते हैं प्रकृति से साथ का महत्व

बीज, मिट्टी, जल के संतुलन को बना आंखों की हरीतिमा के साथ प्रथम दिन घट स्थापना के साथ हमें प्रकृति की फसल का इंतजार रहता है. नवरात्र के दूसरे दिन वनदेवी, जो ब्रह्मचारिणी हैं की पूजा होती है. पत्ती और फल के सहारे साधना करने वाली देवी का यह स्वरूप शाकाहार का उच्चतम रूप हैं. ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत पौधे हैं, ना कि जानवर, और यही भोजन का शुद्धतम रूप है. जलवायु संकट के दौर में शाकाहार जरूरत है और यही देवी ब्रह्मचारिणी का संदेश भी. देवी स्थापना के दूसरे दिन से ही आहार शृंखला के महत्व को बताना शुरु हो जाता है. देवी का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा, चंद्रमा की शीतलता और बाघ पर सवार घंटी की भयानक गर्जना के साथ शक्ति का संगम है. चंद्रमा समुद्र यानी जलतंत्र और बाघ जंगल यानी सम्पूर्ण पारिस्थितिकी के स्थायित्व का द्योतक है. मस्तक पर चंद्रमा और सिंह सवार देवी की यह परिकल्पना हमारे लोक की यह संरक्षण कला काबिलेगौर है. सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना ही नहीं और सूर्य की ऊर्जा का नगण्य भाग ही पृथ्वी अवशोषित कर पाती है. मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी. अतः ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं. इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है. वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है. नवरात्र के चौथे दिन देवी रूप का नाम कुष्मांडा दिया गया है. संस्कृत में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते है इसलिए इस देवी को कृष्णा देवी कहा जिनका वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है. प्रचलित मान्यतायें पहले पूजा फिर कानून का रूप ले लेती है. मिथकों और मान्यताओं ने भी वैज्ञानिक खोज की ओर प्रेरित किया. सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं के पास माना गया. फिर इन्हें ब्रह्मांड की रचनाकार अर्थात हमारे पूर्वजों ने सूर्य की शक्ति को अंतर्निहित करने वाली इस शक्ति की पूजा प्रारंभ की होगी. आज हम सभी को पता है सूर्य ऊर्जा का प्रथम स्रोत है. पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वाली शक्ति का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता.  

नवरात्रि में पांचवें दिन देवी के इस रूप की पूजा-अर्चना की जाती है. पहाड़ दृढ़ता के प्रतीक व हमारी नदियों की जन्मस्थली होते हैं. ये दृढ़ पहाड़ लाखों वर्षों से हवा, पानी के थपेड़े सहते खड़े रहते हैं. पहाड़ जब मरते हैं तब मर जाती है नदी, मर जाते हैं वृक्ष. इन्हीं पहाड़ों के कुछ भाग धरण सहते-सहते अंत में माटी में तब्दील हो जाते हैं. अनुसंधानों से यह पता चलता है कि छ: इंच मिट्टी बनने में डेढ़ सौ साल लग जाते हैं. शुद्धता और पवित्रता के साथ ऑक्सीजन को बचाये रखने हेतु आज भी हम देखते हैं कि देवियों के वासस्थल, देवी के मंदिर ऊँचे पहाड़ों, गुफाओं या घने जंगलों में होते है,  नवरात्र का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है. इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है. शक्ति के भयंकर रूपों में से एक जो निर्माण को बचाने के लिए संहार का सहारा लेती हैं. यह प्रमाणिक है कि समय-समय पर इस धरती को संहारक तत्वों का सामना करना होता है. यह बीमारी, बाढ़, अकाल, प्राकृतिक आपदा के रूप में धरती के सृजन का विध्वंस करते हैं. जब पृथ्वी का विध्वंसक तत्वों (वायरस जैसे तत्व) ने जन्म लिया होगा और उनकी आक्रमकता का सामना कोई भी भी नहीं कर पा रहा था. तब स्कंदमाता के द्वारा ऊर्जा का संचरण होता है इस बात को ध्यान में रखते हुए हमारे पुरखों ने चारों ओर बिखरी ऊर्जा को एकीकृत किया. संयुक्त ऊर्जा से इस देवी या शक्ति का निर्माण हुआ. कहा जाता है कि किरणें कात्यायन ऋषि के आश्रम में क्रिस्टलीकृत हुई, और ये किरणे ऊर्जा से पूर्ण एक शक्ति बनीं, इसलिए उन्हें कात्यायनी या 'कात्यायन की बेटी' भी कहा जाता है. सप्तमी के दिन की पूजा मूल रुप से किसानों की पूजा है जिसे नवपत्रिका पूजा कहलाती है

खेती और किसानी से है गहरा नाता

आज भी किसानों के द्वारा नौ तरह की पत्तियों की पूजा होती है जिसमें खरीफ फसल की अच्छी कटाई की कामना होती है. नवपत्रिका के रूप में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है. केले के पत्ते को ब्रहाणि के रूप में तो कच्चू या घुइयाँ पत्र को महाकाली के रूप में पूजा जाता है. हल्दी की उपयोगिता से हम सब वाकिफ हैं,इसकी पत्तियों को स्वयं शक्तिस्वरूपा माँ दुर्गा के रूप में रखा जाता है. जयंती की पत्तियों को माँ कात्यायनी तो बिल्व पत्र को शक्ति के रूप में पूजा जाता है. अनार की पत्तियाँ रक्तदंतिका तो सीता अशोक,ओल और धान की पत्तियों को क्रमश: शोकरहिता, चामुंडा तथा महालक्ष्मी के प्रतीकों में पूजा जाता है. इन पत्तों की पूजा को देख ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे पूर्वजों ने पेड़ों को देवी स्वरूप माना इससे हमारे अंदर श्रद्धा भाव रहेगा और हम इन पौधों को नुकसान नहीं पहुचायेंगे. हवन के समय उपयोग किये जानेवाली सामाग्री सुगंधित एवं औषधीय पेड़ पौधों के भाग होते हैं जो वायु को शुद्ध करते हैं. नवरात्र की षष्ठी बेल निमन्त्रण को इस बात को दर्शाता है कि प्रकृति को भी आदर और सम्मान की जरूरत है. इस प्रकार दुर्गा पूजा आहार चक्र की महत्ता को बताता है जंगल में सबसे ऊपर बाघ जो देवी की सवारी है अगर एक बाघ जीवित है तो प्रकृति संतुलित है. प्रकृति की शक्ति यानि समाज की शक्ति हम सबका बल जैसे- जैसे प्रकृति का दोहन हो रहा इसकी भी शक्ति क्षीण होते जा रही. इधर बारिश हो रही तो अविचल खड़ा पहाड़ भी उन बूंदों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा. भरभरा कर गिरते पहाड़ अचानक आई बाढ़,रूठते  जंगल इस बात के संकेत हैं कहीं न कहीं हमने प्रकृति को चोट पहुँचाई हैं . भारतीय संस्कृति का आधार ही प्रकृति है जिसमें दूब घास से लेकर बाघ तक को बचाने का उपाय हमारे पूर्वजों ने किया. उनलोगों ने सम्मान दिया तो प्रकृति ने भी उनकी रक्षा की आज वर्तमान पीढ़ी को प्रकृति के सम्मान को शक्ति के सम्मान के साथ देखने जरूरत है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ़ लेखक ही ज़िम्मेदार हैं.]

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

जनगणना 2027 में OBC कॉलम पर कांग्रेस का बड़ा प्लान, दिल्ली में होगी बैठक
जनगणना 2027 में OBC कॉलम पर कांग्रेस का बड़ा प्लान, दिल्ली में होगी बैठक
रांची प्रोटेस्ट: JSSC CGL एग्जाम रद्द, CM हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान
रांची प्रोटेस्ट: JSSC CGL एग्जाम रद्द, CM हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान
Watch: कपिल देव का आया भयंकर गुस्सा, बोले- बता देते सिर्फ फोटो के लिए...
कपिल देव का आया भयंकर गुस्सा, बोले- बता देते सिर्फ फोटो के लिए...
आम्रपाली दुबे ने पवन सिंह को दिया शादी का ऑफर, काजल राघवानी ने तेज प्रताप संग रचाया 'रास'
आम्रपाली दुबे ने पवन सिंह को दिया शादी का ऑफर, काजल राघवानी ने तेज प्रताप संग रचाया 'रास'

वीडियोज

ChatGPT Viral Video: AI का कमाल! भीड़ में खोई चप्पल, ChatGPT ने ऐसे ढूंढ निकाली, वीडियो चौंका देगा!
Himanshi Khurana का बड़ा खुलासा, Asim Riaz संग रिश्ते में लगा था भगवान को धोखा देने का डर
Lalit Modi ने ठुकराई Bigg Boss 20 में एंट्री की खबर, Salman Khan के शो पर दिया बड़ा बयान
Shah Rukh Khan, Ajay Devgn और Tiger Shroff को Vimal Elaichi Ad पर Maharashtra FDA का नोटिस
Sansani: कैमरे में कैद मर्डर की LIVE पिक्चर

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
जनगणना 2027 में OBC कॉलम पर कांग्रेस का बड़ा प्लान, दिल्ली में होगी बैठक
जनगणना 2027 में OBC कॉलम पर कांग्रेस का बड़ा प्लान, दिल्ली में होगी बैठक
रांची प्रोटेस्ट: JSSC CGL एग्जाम रद्द, CM हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान
रांची प्रोटेस्ट: JSSC CGL एग्जाम रद्द, CM हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान
Watch: कपिल देव का आया भयंकर गुस्सा, बोले- बता देते सिर्फ फोटो के लिए...
कपिल देव का आया भयंकर गुस्सा, बोले- बता देते सिर्फ फोटो के लिए...
आम्रपाली दुबे ने पवन सिंह को दिया शादी का ऑफर, काजल राघवानी ने तेज प्रताप संग रचाया 'रास'
आम्रपाली दुबे ने पवन सिंह को दिया शादी का ऑफर, काजल राघवानी ने तेज प्रताप संग रचाया 'रास'
क्या ईरान पर परमाणु हथियारों से हमला करेंगे ट्रंप? कांग्रेसवुमन के दावे से हड़कंप
क्या ईरान पर परमाणु हथियारों से हमला करेंगे ट्रंप? कांग्रेसवुमन के दावे से हड़कंप
संगठन में वापसी पर स्मृति ईरानी का पहला रिएक्शन, 'मेरे जैसे कार्यकर्ता का...'
संगठन में वापसी पर स्मृति ईरानी का पहला रिएक्शन, 'मेरे जैसे कार्यकर्ता का...'
Viral Video: ट्रेन की पेंट्री में दिखा चूहा, वायरल वीडियो पर आया IRCTC का जवाब
ट्रेन की पेंट्री में दिखा चूहा, वायरल वीडियो पर आया IRCTC का जवाब
'बंटवारा 1947' के फैंस के लिए खुशखबरी, मंगलवार को 99 रुपये में देख पाएंगे फिल्म
'बंटवारा 1947' के फैंस के लिए खुशखबरी, मंगलवार को 99 रुपये में देख पाएंगे फिल्म
Embed widget