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न पेट्रोल, न डीजल, फिर भी दौड़ती है ये ट्रेन, जानिए इसका सीक्रेट

Worlds first Narrow Gauge Hydrogen Train: बिना पेट्रोल-डीजल और बिजली के दौड़ेगी दुनिया की पहली नैरो-गेज हाइड्रोजन ट्रेन. जानिए स्विट्जरलैंड की कंपनी द्वारा बनाई गई इस अनोखी ट्रेन का सीक्रेट, जो धुएं की जगह सिर्फ पानी छोड़ेगी.

Worlds first Narrow Gauge Hydrogen Train: आजकल दुनियाभर में प्रदूषण को लेकर सभी तरफ गंभीर समस्या चल रही है. बढ़ते प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए हर देश में नए-नए आविष्कार हो रहे हैं. इसी कड़ी में रेलवे की दुनिया में भी एक बेहद ही हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. बता दें कि, स्विट्जरलैंड की मशहूर ट्रेन निर्माता कंपनी स्टैडलर ने दुनिया की पहली नैरो-गेज हाइड्रोजन ट्रेन (Narrow-Gauge Hydrogen Train) का सफल अविष्कार कर दिया है. 

इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए न तो पेट्रोल-डीजल की जरूरत पड़ती है और न ही बिजली की. बता दें कि, यह पूरी तरह से ग्रीन हाइड्रोजन पर दौड़ती है और सबसे मजेदार बात यह है कि यह चलते समय धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप छोड़ती है. तो चलिए जानतें हैं कि, इस नए स्पेशल ट्रेन के बारे में डिटेल्स में.

आखिर कैसे चलती है यह ट्रेन?

अगर आप सोच रहे हैं कि बिना डीजल और बिजली के यह ट्रेन इतनी ताकत कहां से लाती है तो इसका जवाब इसके बीच में लगे एक खास डिब्बे में छुपा है. जिसे कंपनी ने पावर पैक नाम दिया है. इस केबिन के अंदर बड़े-बड़े हाइड्रोजन टैंक और एडवांस्ड फ्यूल सेल्स फिट किए गए हैं. 

जब टैंक से हाइड्रोजन गैस इन फ्यूल सेल्स में जाती है तो वहां एक केमिकल रिएक्शन होता है. यह रिएक्शन हाइड्रोजन को सीधे इलेक्ट्रिकल एनर्जी यानी बिजली में बदल देता है. यही बिजली ट्रेन के नीचे लगी हैवी ट्रैक्शन बैटरियों को लगातार चार्ज करती रहती है और ट्रेन को चलने के लिए सुपर पावर देती है.

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पर्यावरण को मिलेगा फायदा

आपको बता दें कि, यह ट्रेन उन इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जहां पहाड़ों या संकरे रास्तों की वजह से बिजली की लाइनें बिछाना मुमकिन नहीं था और पुरानी डीजल ट्रेनें चलानी पड़ती थीं. कंपनी के मुताबिक, इटली के सार्डिनिया में ऐसी सिर्फ 10 ट्रेनें चलाने से हर साल हवा में घुलने वाला 2100 टन से ज्यादा जहरीला कार्बन डाइऑक्साइड रुक जाएगा. 

यह प्रदूषण कम करना किसी कार द्वारा पूरी दुनिया के 450 चक्कर लगाने के दौरान होने वाले धुएं को रोकने के बराबर है. इसके अलावा इस ट्रेन को चलाने के लिए जो हाइड्रोजन गैस इस्तेमाल होगी उसे भी 100% सोलर पावर की मदद से ही तैयार किया जाएगा. यानी यह शुरू से अंत तक पूरी तरह इको-फ्रेंडली है.

मिलेगा आलीशान सफर 

नैरो-गेज यानी पतली पटरी पर चलने वाली पुरानी ट्रेनें काफी हिलती थीं और उनमें बहुत तेज शोर भी होता था. लेकिन इस नई हाइड्रोजन ट्रेन को एकदम हल्के और मजबूत एल्युमिनियम मटीरियल से डिजाइन किया गया है. इसकी वजह से सफर के दौरान आपको न तो पुरानी डीजल गाड़ियों की तरह झटके महसूस होंगे और न ही इंजन की खटखट सुनाई देगी. 

पूरी ट्रेन एकदम साइलेंट और वाइब्रेशन-फ्री होगी. पैसेंजर्स के लिए इसमें बड़ी-बड़ी पैनोरमिक खिड़कियां लगाई गई हैं ताकि बाहर का नजारा साफ दिखे. साथ ही बुजुर्गों और व्हीलचेयर वाले लोगों की सुविधा के लिए इसका फर्श काफी नीचे रखा गया है. कुल मिलकर यह ट्रेन प्रदुषण भी कम करती है और सफर भी आलिशान है.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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