सड़क पर खड़ी कार में एयरबैग खुलने से शख्स की मौत, जानिए किन चीजों का ध्यान रखना जरूरी?
Car Safety Features: एयरबैग एक मजबूत कपड़े का बैग होता है, जिस पर विशेष कोटिंग की जाती है. इसे स्टीयरिंग, डैशबोर्ड, दरवाजों और कार के दूसरे हिस्सों में लगाया जाता है. आइए डिटेल्स जानते हैं.

कार खरीदते समय ज्यादातर लोग सबसे पहले सेफ्टी फीचर्स पर ध्यान देते हैं. इनमें एयरबैग सबसे जरूरी सेफ्टी फीचर माना जाता है, क्योंकि एक्सीडेंट के दौरान यही यात्रियों की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाता है. लेकिन अगर यही एयरबैग बिना किसी एक्सीडेंट के अचानक खुल जाए तो यह खुद खतरे की वजह भी बन सकता है.
महाराष्ट्र के ठाणे में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां खड़ी कार में अचानक एयरबैग खुलने से 25 साल के कार डीलर की मौत हो गई. इस घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर बिना दुर्घटना के एयरबैग कैसे खुल सकता है और क्या दूसरी कारों में भी ऐसा होने का खतरा है?
कैसे हुआ हादसा?
शख्स करीब 15 साल पुरानी कार के अंदर बैठा हुआ था. तभी अचानक कार का एयरबैग खुल गया. एयरबैग इतनी तेज स्पीड से बाहर आया कि उसका जोरदार झटका चेहरे और गर्दन पर लगा. उस समय कार खड़ी थी, इसलिए उसने सीट बेल्ट भी नहीं पहन रखी थी. गंभीर चोट लगने और ज्यादा खून बहने के चलते उसकी मौत हो गई. एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरबैग खुलते समय इसकी रफ्तार लगभग 200 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है, इसलिए अगर सही स्थिति में न हो या सीट बेल्ट न पहनी हो तो यह गंभीर चोट पहुंचा सकता है.
इस तरह की घटना के पीछे कई कारण हो सकते हैं. पहला कारण एयरबैग सेंसर का गलती से एक्टिव हो जाना है. अगर कार के आगे वाले हिस्से में तेज झटका लगे या सेंसर किसी वजह से गलत संकेत पकड़ ले तो एयरबैग को खुलने का आदेश दे सकता है. दूसरा कारण कंट्रोल यूनिट में तकनीकी खराबी हो सकती है. पुरानी कारों में समय के साथ इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम या एयरबैग कंट्रोल मॉड्यूल में खराबी आने की आशंका बढ़ जाती है, जो सामान्य फिटनेस टेस्ट में हमेशा पकड़ में नहीं आती.
तीसरा कारण वायरिंग में खराबी होना है. कई बार चूहे वायर काट देते हैं या आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज लगाते समय वायरिंग सही तरीके से नहीं की जाती, जिससे शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट हो सकता है और एयरबैग अनजाने में एक्टिव हो सकता है.
कैसे काम करता है एयरबैग?
दरअसल, एयरबैग एक मजबूत कपड़े का बैग होता है, जिस पर विशेष कोटिंग की जाती है. इसे स्टीयरिंग, डैशबोर्ड, दरवाजों और कार के दूसरे हिस्सों में लगाया जाता है. जैसे ही कार के सेंसर किसी गंभीर टक्कर का पता लगाते हैं, वे कुछ मिलीसेकंड के भीतर कंट्रोल यूनिट को संकेत भेजते हैं. इसके बाद इन्फ्लेटर तेजी से गैस बनाकर एयरबैग को फुला देता है. पूरा प्रोसेस लगभग 50 मिलीसेकंड में पूरा हो जाता है. यही वजह है कि एक्सीडेंट के समय एयरबैग यात्री के सिर और सीने को डैशबोर्ड या स्टीयरिंग से टकराने से बचाता है.
कार मालिकों के लिए यह भी जरूरी है कि वे समय-समय पर एयरबैग सिस्टम की जांच कराते रहें. जब भी कार स्टार्ट होती है, इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में एयरबैग की चेतावनी कुछ सेकंड के लिए जलती है और फिर बंद हो जाती है. अगर यह लाइट लगातार जलती रहे या बार-बार दिखाई दे तो यह एयरबैग सिस्टम में खराबी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में कार को तुरंत सर्विस सेंटर पर दिखाना चाहिए. इसके साथ ही हमेशा सीट बेल्ट पहनकर ही कार में बैठें, क्योंकि एयरबैग और सीट बेल्ट मिलकर ही सबसे बेहतर सेफ्टी प्रदान करते हैं.
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