बेरोजगार होने जा रहे 1 लाख लोग! ये कार कंपनी कर सकती है बड़ी छंटनी, जानिए क्या है वजह?
Volkswagen Lay Offs: कंपनी केवल कर्मचारियों की संख्या ही कम नहीं करना चाहती, बल्कि अपने कई प्रोडक्शन सेंटर भी बंद करने की तैयारी में है. जर्मनी में मौजूद चार फैक्ट्रियों पर ताला लगाने का प्रस्ताव है.

ऑटोमोबाइल कंपनी Volkswagen Group बड़े स्तर पर लागत कम करने की योजना बना रही है. कंपनी आने वाले समय में करीब 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है. इसके अलावा कई फैक्ट्रियों को बंद करने की भी तैयारी की जा रही है. दरअसल, Volkswagen Group के CEO ओलिवर ब्लूम ने कंपनी की मैनेजमेंट बोर्ड बैठक में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है.
इस योजना के तहत कंपनी अपने कुल कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कटौती करना चाहती है. फिलहाल Volkswagen Group में लगभग 6.57 लाख कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन कंपनी का टारगेट इसे घटाकर करीब 5.57 लाख तक लाना है. यानी आने वाले समय में लगभग 1 लाख नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं.
क्या है कटौती की वजह?
इस प्रस्ताव पर अगले हफ्ते होने वाली सुपरवाइजरी बोर्ड की बैठक में विस्तार से चर्चा होगी. अगर बोर्ड इस योजना को मंजूरी देता है तो यह Volkswagen के कर्मचारियों की सबसे बड़ी कटौती में से एक हो सकती है. कंपनी का मानना है कि बदलते ऑटो बाजार में कॉम्पिटीशन बनाए रखने के लिए खर्च कम करना जरूरी हो गया है.
कंपनी केवल कर्मचारियों की संख्या ही कम नहीं करना चाहती, बल्कि अपने कई प्रोडक्शन सेंटर भी बंद करने की तैयारी में है. जर्मनी में मौजूद चार फैक्ट्रियों पर ताला लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. इनमें Audi की नेकरसुल्म यूनिट, Hanover में मौजूद Volkswagen प्लांट, Zwickau और Emden के प्लांट शामिल हैं. इसके साथ ही कंपनी अलग से एक नया कंपोनेंट प्लांट स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही है.
अगले 10 सालों के लिए कंपनी का ये टारगेट
Volkswagen का टारगेट अगले 10 सालों में अपनी कुल लागत में लगभग 12.5 अरब डॉलर यानी करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये की कमी लाना है. कंपनी का मानना है कि खर्च घटाने से वह भविष्य की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेगी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों समेत नई तकनीकों में ज्यादा इन्वेस्ट कर पाएगी.
Volkswagen इस समय कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है. अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ, चीन की इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी BYD से बढ़ते कॉम्पिटीशन और ग्लोबल ऑटो बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों ने कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है. यही वजह है कि कंपनी अपने पूरे बिजनेस मॉडल में बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
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