टूरिस्ट बस का कारोबार कितना फायदेमंद, जानें खर्च और कमाई?
टूरिस्ट बस का कारोबार कितना फायदेमंद है? जानिए इस बिजनेस में आने वाला खर्च, बस की कीमतें, रनिंग कॉस्ट और संभावित कमाई का पूरा हिसाब.

हमारे देश में अभी लग्जरी और टूरिस्ट बसों का बिजनेस बहुत तेजी से बढ़ रहा है. पहले जब भी किसी लंबे सफर पर जाना होता था तो ट्रेन की ऑप्शन रहता था. लेकिन अब ऐसा नहीं है और अब हर जगह जाने के लिए टूरिस्ट बस चलने लगी हैं. जिसके चलते अब लोगों को काफी आराम हो गया है. बस का बिजनेस अभी बहुत ट्रेंडिंग में है क्योंकि बढ़ते टूरिस्ट, शादियों के सीजन और कॉर्पोरेट ट्रिप्स की वजह से इस बिजनेस में कमाई का मौका ज्यादा मिल रहा है.
लेकिन इस बिजनेस को स्टार्ट करने के लिए आपको इन्वेस्टमेंट ज्यादा करना पड़ता है. अगर आप भी इस बिजनेस को शुरू करना चाहतें हैं तो सबसे पहले आपको खर्च के बारें में समझना होगा. तो चलिए जानतें हैं कि टूरिस्ट बस बिजनेस में कुल कितना मुनाफा आप कमा सकते हैं.
करना होगा बड़ा इन्वेस्ट
बता दें कि टूरिस्ट बस का बिजनेस शुरू करने के लिए सबसे बड़ा खर्च बस खरीदने में आता है. यदि आप अशोक लेलैंड या टाटा जैसी कंपनियों की सामान्य और आरामदायक 40 से 50 सीटर टूरिस्ट बस खरीदते हैं तो उसकी एक्स-शोरूम कीमत लगभग 35 लाख से 45 लाख रुपये तक होती है.
जबकि इसके अलावा यदि आपका प्लान वोल्वो या स्कैनिया जैसी लग्जरी कोच या स्लीपर बसें खरीदने का है तो एक नई गाड़ी की कीमत 1 से 2 करोड़ रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है. वहीं ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट, कमर्शियल इंश्योरेंस और शुरुआती वर्किंग कैपिटल मिलाकर आपको बिजनेस शुरू करने से पहले आपको बड़ा अमाउंट तैयार रखना पड़ेगा.

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फिक्स और अन्य खर्च
वहीं बस सड़क पर चले या न चले मालिक के पास कुछ ऐसे खर्चे होते हैं जो हर महीने खर्च होने हैं. सबसे पहले कमर्शियल व्हीकल टैक्स और हर साल लगने वाला टूरिस्ट परमिट फीस आता है जो बस के साइज के हिसाब से काफी भारी-भरकम होता है.
जबकि इसके अलावा हर बस के लिए सालाना कमर्शियल इंश्योरेंस प्रीमियम और चालकों का वेतन जोड़कर लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये का फिक्स खर्च हर महीने रहता है. वहीं जब बस लंबी दूरी के टूर पर निकलती है तो डीजल की खपत, टोल टैक्स, पार्किंग शुल्क और समय-समय पर होने वाली मेंटेनेंस का वेरिएबल खर्च भी इसमें जुड़ जाता है.
कितनी होती है कमाई?
अब बात करते हैं कि इस बिजनेस में कमाई कितनी हो जाती है. तो बता दें कि इस बिजनेस में कमाई दो तरीकों से होती है. पहला, ट्रैवल एजेंसियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर बस चलाना और दूसरा शादियों या छुट्टियों के सीजन में टूरिस्ट ग्रुप्स को सीधे गाड़ी किराए पर देना. आमतौर पर बस संचालक प्रति किलोमीटर के हिसाब से या प्रतिदिन के फिक्स किराए पर गाड़ियां बुक करते हैं. जिसमें रोजाना कम से कम 250 से 300 किलोमीटर बस चलती है.
अगर आपकी बस महीने में अच्छे से चल रही है और लंबे टूर या शादियों के सीजन में लगातार चलती है. तो तमाम खर्चे और ईएमआई चुकाने के बाद भी एक बस से महीने में 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा आराम से दे देती है. जबकि ऑफ-सीजन के दौरान बुकिंग कम मिलने पर यह मार्जिन थोड़ा नीचे भी आ सकता है.

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कुछ जरूरी टिप्स
बता दें कि टूरिस्ट बस के कारोबार को लंबे समय तक फायदेमंद बनाए रखने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. हमेशा अपनी गाड़ी की बुकिंग किसी भरोसेमंद ट्रैवल एजेंसी, कॉरपोरेट ऑफिस या स्कूल-कॉलेज के ट्रिप के साथ जोड़कर रखें ताकि सालभर कमाई होती रहे.
वहीं इसके अलावा ड्राइवर के तौर पर किसी अनुभवी और भरोसेमंद इंसान को रखें ताकि गाड़ी का माइलेज बेहतर मिले और मेंटेनेंस का खर्च कम से कम हो. यदि आप सही रूट प्लानिंग और समझदारी के साथ इस बिजनेस में उतरते हैं तो कुछ ही सालों में यह आपके लिए एक शानदार और बेहतर आमदनी का जरिया बन सकता है.
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