कार-बाइक खरीदने का प्लान, पहले जान लें Insurance का नया गणित
नई कार या बाइक खरीदने का प्लान है तो इंश्योरेंस का नया नियम जान लें. सुप्रीम कोर्ट ने नई कारों के लिए 4 साल और टू-व्हीलर्स के लिए 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य कर दिया है.

अगर आप भी नई कार खरीदने का मन बना रहे हैं तो यह खबर आपको झटका दे सकती है. क्योंकि, अब नई कार खरीदना पहले से महंगा हो गया है. ऐसा इस लिए है क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने देश में बिना इंश्योरेंस सड़कों पर दौड़ रही गाड़ियों और सड़क हादसों के पीड़ितों को सही समय पर मुआवजा न मिल पाने की समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब नई कार खरीदने पर 3 साल नहीं बल्कि पूरे 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा. वहीं अगर आप नया टू-व्हीलर खरीदते हैं तो आपको 5 साल के बजाय पूरे 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कवर एक साथ लेना पड़ेगा. इस नए फैसले से ऑन-रोड कीमत थोड़ी बढ़ जाएगी. चलिए विस्तार से पूरी खबर के बारें में जानतें हैं.
क्यों लेना पड़ा बड़ा फैसला?
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट यह कदम भारत की सड़कों पर बिना वैध इंश्योरेंस के दौड़ रहे वाहनों की डराने वाली संख्या को देखते हुए उठाया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की सड़कों पर चल रहे कुल 30 करोड़ से ज्यादा वाहनों में से लगभग 56 फीसदी यानी 16.5 करोड़ से अधिक गाड़ियों के पास कोई वैध इंश्योरेंस ही नहीं है.
किसी सड़क हादसे में जब कोई ऐसी गाड़ी शामिल होती है जिसके पास बीमा नहीं है तो पीड़ित परिवार या मृतक के आश्रितों को वर्षों तक मुआवजे के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंसानी जिंदगी की सुरक्षा और मुआवजे के अधिकार से बढ़कर कोई प्रशासनिक या आर्थिक तर्क नहीं हो सकता.

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कितना बढ़ सकता है दाम?
अब इस नए आदेश के बाद नई गाड़ियों की ऑन-रोड प्राइस बढ़ जाएगा. पहले नई कार लेते समय ग्राहक को 3 साल का थर्ड-पार्टी और 1 साल का ओन-डैमेज बीमा का प्रीमियम देना पड़ता था. अब 4 साल के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का एक साथ पैसे का भुगतान करना होगा.
वहीं, ठीक इसी तरह बाइक और स्कूटर खरीदारों को भी 5 साल की जगह 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस एक साथ पे करना होगा. हालांकि, यह राहत की बात है कि यह बढ़ा हुआ नियम पुरानी गाड़ियों पर लागू नहीं होगा. यह केवल उन गाड़ियों के लिए है जिन्हें इस नए आदेश के बाद शोरूम से नई खरीदा जाएगा.

कम हो रहा है अपराध
आपको बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट सिर्फ इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाकर ही नहीं रुका बल्कि उसने इसे सख्ती से लागू कराने के लिए कई आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का भी निर्देश दिया है. नेशनल और स्टेट हाईवे पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरे लगाए जा रहे हैं. जिन्हें सीधा इंश्योरेंस डेटाबेस और वाहन पोर्टल से जोड़ा जाएगा.
अगर बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी सड़क से गुजरती है तो कैमरे से ही अपने आप ई-चालान कटकर गाड़ी मालिक के मोबाइल पर पहुंच जाएगा. इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस को भी ऐसे आधुनिक हैंडहेल्ड गैजेट्स दिए जा रहे हैं जिनसे वे मौके पर ही गाड़ी का नंबर डालकर इंश्योरेंस की पूरी सच्चाई जान सकेंगे.
नहीं मिल सकता है पेट्रोल-डीजल
वहीं, अदालत ने बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों पर नकेल कसने के लिए एक बेहद अनोखा सुझाव भी दिया है. कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटर और सड़क परिवहन मंत्रालय को एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की सलाह दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत अगर किसी वाहन का इंश्योरेंस एक्सपायर हो चुका है तो उसे पेट्रोल पंपों पर ईंधन यानी पेट्रोल या डीजल देने से मना किया जा सकता है.
जब तक गाड़ी मालिक अपनी गाड़ी का रिन्यूअल नहीं करा लेता तब तक उसे ईंधन नहीं मिलेगा. इसके साथ ही बीमा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे गाड़ी खरीदते समय ग्राहकों को एक आसान कस्टमर ऑप्शन फॉर्म दें ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार सही इंश्योरेंस कवर चुन सकें.
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