डीजल जैसा दम और 29 kmpl का दावा, रेनो ने उतारी पहली हाइब्रिड डस्टर
रेनो डस्टर अब पेट्रोल और बिजली, दोनों से चलने वाले नए अवतार में आ गई है. जानिए, इसमें क्या नया है, कंपनी माइलेज के क्या दावे कर रही है और खरीदने से पहले किन बातों को परखना जरूरी

बीते कुछ सालों में डीजल एसयूवी की जगह लेने वाली गाड़ियों की तलाश बढ़ी है. इसी मौके पर रेनो ने भारत में अपनी पहली स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड डस्टर पेश की है. कंपनी इसे डीजल का विकल्प बताकर बेच रही है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 16.99 लाख रुपये है. इसमें पेट्रोल इंजन के साथ बिजली की मदद भी जुड़ी है. जानें कि इसमें असल में क्या मिलता है.
नया क्या है इस डस्टर में
अब तक डस्टर सिर्फ टर्बो पेट्रोल इंजन में मिलती थी. हाइब्रिड मॉडल इसका तीसरा इंजन विकल्प है और रेनो के E-Tech सिस्टम पर बनाया है. यही तकनीक कंपनी यूरोप में पहले से इस्तेमाल करती है. बुकिंग 21,000 रुपये में पहले ही खुल गई थी. कंपनी का निशाना वे खरीदार हैं जो डीजल जैसी चाल और कम खर्च, दोनों चाहते हैं. इसकी तीन वेरिएंट हैं. 16.99 लाख, 18.99 लाख और 19.49 लाख रुपये हैं, जो एक्स-शोरूम हैं. अपने शहर में कितना पैसा लगेगा, यह रजिस्ट्रेशन, बीमा और बाकी खर्चों के बाद ही पता चलेगा.
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पेट्रोल और बिजली मिलकर कैसे चलाते हैं गाड़ी
इसके अंदर 1.8 लीटर का पेट्रोल इंजन है. उसके साथ दो इलेक्ट्रिक मोटर और 1.4 kWh की छोटी बैटरी लगी है. तीनों मिलकर कुल 160 PS की ताकत देते हैं. गियरबॉक्स तय करता है कि किस वक्त कौन सा हिस्सा काम करेगा. धीमी रफ्तार पर या ट्रैफिक में अक्सर सिर्फ मोटर गाड़ी खींच सकती है और इंजन बंद रहता है. तेज रफ्तार या ज्यादा जोर की जरूरत पर इंजन भी साथ देता है.
29 kmpl का आंकड़ा कितना भरोसेमंद
यह गाड़ी स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड है, इसलिए इसे घर पर प्लग लगाकर चार्ज नहीं करना पड़ता. बैटरी चलते-चलते और ब्रेक लगाने से बनी ऊर्जा से भर जाती है. कंपनी ने ARAI से 29 किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज का प्रमाण बताया है. लेकिन ARAI का आंकड़ा जांच के तय हालात में निकलता है. रोज की सड़क पर माइलेज इससे कम भी हो सकती है. उस पर ट्रैफिक, एसी, मौसम, सवारियों का वजन और आपके चलाने का तरीका असर डालते हैं.
खरीदने से पहले ये सवाल पूछ लें
इस श्रेणी में रेनो को Maruti Grand Vitara, Maruti Victoris और Toyota Hyryder से टक्कर मिलेगी. तीनों में भी हाइब्रिड तकनीक है. इसलिए सिर्फ माइलेज देखकर फैसला न करें. अपने रूट पर टेस्ट ड्राइव लें. बैटरी की वारंटी, सर्विस सेंटर की पहुंच और हर वेरिएंट के फीचर जरूर पूछ लें. रखरखाव का खर्च. यह भी तय करें कि रोज आप शहर में ज्यादा चलाते हैं या हाईवे पर, क्योंकि हाइब्रिड का फायदा शहर में ज्यादा दिखता है.
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