पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटी, CNG और EV की बढ़ी मांग
भारतीय ऑटो बाजार में घटी पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी. सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में जबरदस्त उछाल, जानें पूरी रिपोर्ट.

इंडिया में पिछले कुछ समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. यह परिवर्तन आपके पास भी दिख रहा होगा. क्योंकि जहां सड़कों पर पहले केवल पेट्रोल और डीजल गाड़ियां देखने को मिलती थी. वहीं अब यह ग्राफ नीचे जाते दिख रहा है ऐसा हम नहीं बल्कि डेटा बता रहा है. भारत में लगातार बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दामों के चलते ऐसा देखने को मिल रहा है.
जबकि अब मार्केट में सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. जिससे पारंपरिक पेट्रोल गाड़ियों का मार्केट शेयर रिकॉर्ड स्तर पर नीचे आ गया है. चलिए इस खबर में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि पेट्रोल गाड़ियों की हिस्सेदारी क्यों घट रही है. जबकि सीएनजी और ईवी का दबदबा बाजार में कैसे बढ़ रहा है.
पेट्रोल कारों का घटा ग्राफ
आपको बता दें कि भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार में लंबे समय तक पेट्रोल और डीजल कारों का राज रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है. अभी हाल ही में ऑटोमोबाइल सेल्स रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटकर करीब 41 फीसदी के आसपास आ गई है. लेकिन कुछ समय पहले तक यह बहुत ज्यादा हुआ करती थी. अब बात करते हैं ऐसा क्यों हो रहा है तो इसमें कई बड़े कारण छिपे हुए हैं.
जिसमें महंगे फ्यूल के दाम सबसे ऊपर हैं. इसके अलावा देश में पेट्रोल के साथ ई-20 फ्यूल यानी एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर ग्राहकों के मन में माइलेज और इंजन की लाइफ को लेकर तमाम तरह की चिंताएं बनी हुई हैं. लोग अब ऐसी गाड़ी खरीदना चाहते हैं जिसे रोज चलाने में उनकी जेब पर कम से कम बोझ पड़े और यही वजह है कि वे पेट्रोल इंजन से दूरी बनाने लगे हैं.

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सीएनजी गाड़ियों ने थोड़े सारे रिकॉर्ड
पेट्रोल कारों की कम बिक्री का सबसे बड़ा फायदा सीएनजी गाड़ियों को हुआ है. क्योंकि बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो सीएनजी सेगमेंट ने इस बदलाव में सबसे आगे रहकर अपनी हिस्सेदारी को मजबूत किया है. मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियां अब फैक्टरी-फिटेड सीएनजी विकल्प लगभग अपने हर छोटे-बड़े मॉडल में मुहैया करा रही हैं. जिससे ग्राहकों को बाहर से किट लगवाने का झंझट नहीं रहता है.
वहीं सीएनजी कारों की रनिंग कॉस्ट पेट्रोल के मुकाबले आधी से भी कम बैठती है. जो रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले या ज्यादा सफर करने वाले लोगों के लिए बेहद किफायती साबित होती है. कम खर्च और बेहतरीन माइलेज के दम पर सीएनजी गाड़ियां आज देश के मिडिल क्लास परिवारों की पहली पसंद बनती जा रही हैं और इसी कारण इनकी बिक्री में लगातार रिकॉर्ड तोड़ बिक्री देखने को मिल रही है.

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हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की भी बढ़ी बिक्री
बता दें कि सीएनजी के अलावा इलेक्ट्रिक गाड़ियों और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की मांग ने भी सभी को हैरान कर दिया है. टाटा, महिंद्रा और एमजी जैसी कंपनियां अपने नए और आधुनिक ईवी मॉडल्स के साथ बाजार में धमाल मचा रही हैं. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होने और लंबी ड्राइविंग रेंज मिलने के कारण लोग अब इलेक्ट्रिक कारों को आसानी से खरीद रहें हैं.
जबकि दूसरी तरफ जो ग्राहक पूरी तरह बैटरी पर निर्भर नहीं रहना चाहते वे हाइब्रिड गाड़ियों का विकल्प चुन रहे हैं जो पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर के मेल से गजब का माइलेज देती हैं.
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