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खराब नहीं, दोबारा चलेगी EV बैटरी, दुनिया की सबसे बड़ी मेगाफैक्ट्री शुरू

EV Battery Reuse: दुनिया की सबसे बड़ी EV बैटरी रीपर्पजिंग मेगाफैक्ट्री कनाडा में शुरू हो गई है, जो खराब हो चुकें इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरियों को नया जीवन देगी.

EV Battery Reuse: अब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में पेट्रोल-डीजल का क्रेज धीरे-धीरे खत्म हो रहा है क्योंकि पूरी दुनिया इलेक्ट्रिक व्हीकल की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रही है. जिसके चलते अब हमें सड़कों पर भी EV गाड़ियां खूब देखने को मिल रही हैं. हालांकि, इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है कि जब गाड़ियों की बैटरियां खराब होंगी तो उनका क्या होगा. लेकिन अब इस टेंशन का जवाब मिल गया है. 

बता दें कि, कनाडा के वैंकूवर में दुनिया की सबसे बड़ी EV बैटरी रीपर्पजिंग मेगाफैक्ट्री शुरू हो चुकी है. मोमेंट एनर्जी नाम की कंपनी ने इस मेगाफैक्ट्री 1 को तैयार किया है. यह प्लांट उन खराब EV बैटरियों को नया जीवन देगा जिन्हें लोग अब तक बेकार समझते थे. अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों से निकली ये बैटरियां फेंकी नहीं जाएंगी बल्कि उन्हें रीयूज़ करके पावरफुल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम बनाए जायेंगे जो बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स और अस्पतालों को बिजली देंगे. तो चलिए पुरे विस्तार से समझते हैं इस खबर को.

पुरानी बैटरियों को मिलेगी नई जिंदगी

बता दें कि, अक्सर लोगों को लगता है कि जब एक बैटरी गाड़ी के लिए बेकार हो जाती है. तो वो पूरी तरह खत्म हो गई है. लेकिन सच इससे उल्टा है क्योंकि, ईवी से रिटायर होने के बाद भी इन बैटरियों में लगभग 70 से 80 परसेंट तक कैपेसिटी बची रहती है. मेगाफैक्ट्री 1 इसी बची हुई एनर्जी का सही इस्तेमाल करेगी. कंपनी इन पुरानी बैटरियों को रिकवर करेगी और उन्हें मॉडुलर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स में बदल देगी. 

जिससे यह सिस्टम बिजली सप्लाई ठप होने पर बैकअप का काम करेंगे. इस टेक्नोलॉजी से ना सिर्फ ई-वेस्ट कम होगा. बल्कि क्लीन एनर्जी का एक बढ़िया ऑप्शन भी मिलेगा जो एनवायरनमेंट के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा.

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पावर शॉर्टेज को करेगा दूर

आपको पता ही होगा आजकल AI और डेटा सेंटर्स की वजह से पूरी दुनिया में बिजली की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ा है. नॉर्थ अमेरिका जैसे इलाकों में तो पावर शॉर्टेज एक बड़ी प्रॉब्लम बन चुकी है. ऐसे में यह मेगाफैक्ट्री एक गेम-चेंजर की तरह सामने आई है. 

इस फैक्ट्री में बनने वाले बैटरी सिस्टम्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे माइक्रोग्रिड्स, डेटा सेंटर्स, फैक्ट्रियों और अस्पतालों को बिना रुके बिजली दे सकें. इस तरह पुरानी बैटरियों से एक नया पावर सोर्स खड़ा किया जा रहा है जो फ्यूचर की एनर्जी जरूरतों को आसानी से हैंडल करेगा.

2030 तक 1 GWh का है बड़ा टारगेट

जानकारी के लिए आपको बता दें कि, इस मेगाफैक्ट्री की सबसे हैरान करने वाली बात इसका स्पीड. प्रोजेक्ट के अनाउंसमेंट के सिर्फ 6 हफ्ते के अंदर ही कंपनी ने इस प्लांट को ऑपरेशनल कर दिया. इस बड़े प्रोजेक्ट को चलाने के लिए कनाडा सरकार ने भी लगभग 4.9 मिलियन कनाडाई डॉलर्स की फंडिंग दी है. 

कंपनी का टारगेट है कि साल 2030 तक यहां हर साल 1 GWh कैपेसिटी के बैटरी स्टोरेज सिस्टम्स बनाए जायें. इससे ना सिर्फ एनवायरनमेंट साफ रहेगा, बल्कि लोकल लेवल पर 100 से ज्यादा डायरेक्ट जॉब्स और 1,000 से ज्यादा इनडायरेक्ट जॉब्स भी जेनरेट होंगी  जो इकोनॉमी के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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