गाड़ी को मॉडिफाई करने वालों की खैर नहीं, हर हाल में मानने होंगे ये नियम
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 52 के तहत गाड़ी की मूल बनावट या स्वरूप में ऐसा बदलाव करना प्रतिबंधित है, जो नियमों के अनुरूप न हो. आइए यहां डिटेल्स जान लेते हैं.

अगर आपने अपनी कार या बाइक में अपनी पसंद के हिसाब से मॉडिफिकेशन कराया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है. दरअसल, केरल में अवैध रूप से मॉडिफाइड गाड़ियों के खिलाफ मोटर वाहनविभाग (MVD) और पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है.
केरल हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद गैर-कानूनी मॉडिफिकेशन पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है. खास बात यह है कि सिर्फ जुर्माना भरकर मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि गाड़ी से अवैध बदलाव हटाकर उसे दोबारा जांच के लिए पेश करना होगा.
मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया जब बाढ़ राहत कार्य में इस्तेमाल की जा रही एक मॉडिफाइड थार पर कार्रवाई हुई. इसके बाद अवैध मॉडिफिकेशन को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया और राज्य में ऐसी गाड़ियों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए.
सिर्फ चालान नहीं, मॉडिफिकेशन भी हटाना होगा
- नई कार्रवाई में गाड़ी मालिकों को केवल 5,000 रुपये का जुर्माना भरकर आगे बढ़ने की इजाजत नहीं मिलेगी. जिस पार्ट या मॉडिफिकेशन को अवैध माना जाएगा, उसे गाड़ी से हटाकर गाड़ी को दोबारा उसके मूल रूप में लाना होगा. इसके बाद गाड़ी को फिर से इंस्पेक्शन के लिए पेश करना पड़ेगा. जांच में नियमों के मुताबिक पाए जाने के बाद ही गाड़ी दोबारा सड़क पर चलाने की अनुमति मिलेगी.

- केरल हाईकोर्ट ने खास तौर पर ऐसे मॉडिफिकेशन पर नाराजगी जताई है, जो सड़क पर दूसरे लोगों के लिए परेशानी या खतरा पैदा कर सकते हैं. इनमें बहुत चौड़े टायर, तेज LED लाइट बार और लाल-नीली स्ट्रोब लाइट जैसे बदलाव शामिल हैं. इसके अलावा बहुत तेज आवाज करने वाले आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट और ऐसे एग्जॉस्ट जिनसे आग की लपटें निकलती हैं, उन पर भी सख्ती की जा रही है.
- अदालत का मानना है कि इस तरह के बदलाव सिर्फ गाड़ी का लुक बदलने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि दूसरे गाड़ी चालकों के लिए परेशानी और सुरक्षा का खतरा पैदा कर सकते हैं. इसी कार्रवाई के तहत ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने सभी RTO से पिछले तीन महीनों में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 3 सितंबर तक मांगी है.
मॉडिफाइड गाड़ियों को बढ़ावा देने वालों पर भी नजर
- इस कार्रवाई का दायरा सिर्फ गाड़ी मालिकों तक सीमित नहीं है. ऐसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी नजर रखी जा रही है, जो अवैध रूप से मॉडिफाइड गाड़ियों के वीडियो या रील बनाकर उन्हें बढ़ावा देते हैं. अधिकारियों से ऐसे मामलों में की गई कार्रवाई की अलग रिपोर्ट भी मांगी गई है. यानी अब गैर-कानूनी मॉडिफिकेशन को सोशल मीडिया पर प्रमोट करना भी जांच के दायरे में आ सकता है.
- एक तरफ MVD और पुलिस अवैध मॉडिफिकेशन पर सख्ती कर रहे हैं, वहीं राज्य सरकार कुछ छोटे और सुरक्षित बदलावों को कानूनी मंजूरी देने पर विचार कर रही है. परिवहन मंत्री सी. पी. जॉन के मुताबिक सरकार 100 दिनों के भीतर ऐसे जरूरी बदलावों को मंजूरी देने की संभावना पर काम कर रही है, ताकि गाड़ी मालिकों को राहत मिल सके.

मोटर वाहन अधिनियम में क्या है नियम?
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 52 के तहत गाड़ी की मूल बनावट या स्वरूप में ऐसा बदलाव करना प्रतिबंधित है, जो नियमों के अनुरूप न हो. केरल में मॉडिफिकेशन को लेकर पहले 18 बदलावों की सूची जारी की गई थी, लेकिन इसे लेकर लोगों की प्रतिक्रिया पूरी तरह संतोषजनक नहीं रही. अब MVD ने लोगों की राय जानने के लिए पब्लिक सर्वे शुरू किया है. इसके आधार पर भविष्य में कुछ सुरक्षित और जरूरी बदलावों को तय फीस के साथ मंजूरी देने पर विचार किया जा सकता है.
- कहा जा सकता है कि केरल में मॉडिफाइड गाड़ी के खिलाफ कार्रवाई अब पहले से ज्यादा सख्त हो गई है. अगर किसी कार या बाइक में गैर-कानूनी बदलाव कराया गया है, तो मालिक को 5,000 के जुर्माने के साथ उस मॉडिफिकेशन को हटाने और गाड़ी को दोबारा जांच के लिए पेश करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. इसलिए गाड़ी मालिकों के लिए जरूरी है कि वे अपनी गाड़ी में कराए गए मॉडिफिकेशन की वैधता की जांच कर लें, खासकर अगर उसमें तेज लाइट, चौड़े टायर, तेज आवाज वाला एग्जॉस्ट या अन्य आफ्टरमार्केट बदलाव किए गए हैं.
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